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इंडियन म्यूजिक की अमर पहचान आशा भोंसले का जाना न केवल एक युग का अंत है, बल्कि कला के उस शिखर का शून्य हो जाना है जिसे भर पाना नामुमकिन है. आशा भोसले का नाम भारतीय प्लेबैक सिंगिंग के इतिहास में एक ऐसी योद्धा के तौर पर दर्ज है, जिन्होंने न सिर्फ अपनी मशहूर बहन लता मंगेशकर की परछाई से लड़कर अपनी पहचान बनाई, बल्कि इंडस्ट्री की उस सोच को भी तोड़ा जो उन्हें सेकंड ग्रेड सिंगर मानती थी. कहा जाता है कि शुरुआत में आशा जी को सिर्फ वही गाने ऑफर होते थे जिन्हें लता दीदी या गीता दत्त रिजेक्ट कर देती थीं. हालांकि, अपनी बेमिसाल मेहनत और अपनी आवाज की जादुई फ्लेक्सिबिलिटी से उन्होंने उन रिजेक्ट किए गए गानों को अपनी सबसे बड़ी पहचान बना लिया. कंपोजर ओपी नैयर के साथ उनके कोलेबोरेशन ने म्यूजिक का ग्रामर बदल दिया और यह साबित कर दिया कि एक आर्टिस्ट की असली कामयाबी उसके पक्के इरादे और जुनून में होती है.

नई दिल्ली. भारतीय संगीत की दुनिया में आज एक युग का दुखद अंत हो गया है. ‘मेलोडी की रानी’ आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं. उन्होंने रविवार, 12 अप्रैल 2026 को आखिरी सांस ली. अपनी जादुई आवाज से सात दशकों तक फिल्म इंडस्ट्री पर राज करने वाली आशा दीदी का निधन संगीत की दुनिया के लिए बहुत बड़ा नुकसान है. प्लेबैक सिंगिंग में उन्होंने जो रिकॉर्ड बनाए, वे आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा बने रहेंगे (तस्वीर बनाने में AI की मदद ली गई है).

बॉलीवुड की गलियों में एक समय ऐसा भी था जब लता मंगेशकर म्यूजिशियंस की पहली और आखिरी पसंद होती थीं. उनके डिसिप्लिन और प्योर आवाज के जादू ने पूरे देश को दीवाना बना दिया था. उसी समय उनकी छोटी बहन आशा भोसले अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही थीं. आशा जी के लिए चैलेंज दो गुना था- एक तरफ घर का मुश्किल माहौल और दूसरी तरफ उनकी बड़ी बहन की जबरदस्त कामयाबी, लेकिन इतिहास गवाह है कि जो पत्थर पर तराशा जाता है, वही मूर्ति बन जाता है. आशा जी ने उन मौकों को जिन्हें दूसरों ने कचरा समझकर छोड़ दिया था, उसे अपनी ढाल बना लिया.

1950 और 60 के दशक में आशा भोसले को अक्सर सेकंड ग्रेड सिंगर माना जाता था. उस समय के मशहूर कंपोजर बड़े बजट की फिल्मों और लीड हीरोइन रोल के लिए सिर्फ लता मंगेशकर या गीता दत्त को ही साइन करते थे. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें आशा जी को ऐसे गाने ऑफर किए जाते थे जो या तो कैबरे डांस होते थे या ऐसे गाने जिन्हें लता दीदी गाने से मना कर देती थीं. आशा जी ने खुद एक इंटरव्यू में माना था कि उन्हें सिर्फ वही गाने ऑफर किए जाते थे जिन्हें दूसरों ने मिस कर दिया था, लेकिन वह इन गानों को इन्सल्ट नहीं, बल्कि ऑपर्च्युनिटी मानती थीं.
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आशा भोसले के करियर में टर्निंग प्वाइंट तब आया जब उनकी मुलाकात जादुई म्यूजिशियन ओपी नैयर से हुई. नैयर साहब अकेले ऐसे बड़े म्यूजिशियन थे जिन्होंने लता मंगेशकर के साथ कभी काम नहीं किया था. वो एक ऐसी आवाज की तलाश में थे जिसमें शरारत, चार्म और मॉडर्निटी हो. उन्हें ये सब आशा भोसले में मिला. नैयर साहब ने आशा से ऐसे गाने गवाए जो लता दीदी कभी नहीं गा सकती थीं. ‘नया दौर (1957)’ के गानों ने रातोंरात आशा जी को मेनस्ट्रीम एक्ट्रेस की आवाज बना दिया.

कहा जाता है कि आशा जी की पहचान उनकी वर्सेटिलिटी थी. उन्हें एहसास हुआ कि अगर उन्हें लता दीदी से अलग दिखना है, तो उन्हें अपनी आवाज के साथ एक्सपेरिमेंट करना होगा. ‘दम मारो दम’ जैसे गानों में उन्होंने जिस तरह से अपनी सांस का इस्तेमाल किया, वह उस समय किसी भी सिंगर के लिए बेमिसाल था. वह एक ही दिन में भजन और क्लब सॉन्ग गा सकती थीं. उन्होंने इन गानों में क्लासिकल म्यूजिक की बारीकियां और वेस्टर्न पॉप का टच डाला. आशा जी ने अपने स्टाइल से रिजेक्टेड गानों को ट्रेंडसेटर में बदल दिया.

लता मंगेशकर की आवाज को परफेक्ट माना जाता था, लेकिन आशा जी की आवाज इंसानी थी- इसमें दर्द, सेंसुअलिटी, गुस्सा और चंचलता झलकती थी. उन्होंने जानबूझकर अपनी गायकी को लता दीदी से अलग बनाया. लता जी जहां ऊंचे सुरों की मास्टर थीं, वहीं आशा जी की बीच और नीचे के ऑक्टेव पर मजबूत पकड़ थी. यही वजह है कि जब आरडी बर्मन (पंचम दा) इंडस्ट्री में आए, तो उन्हें अपने म्यूजिक के लिए आशा जी की आवाज में सबसे ज्यादा सिक्योर महसूस हुआ.

एक जमाना था, जब जो कंपोजर उन्हें सिर्फ आइटम सॉन्ग के लिए बुलाते थे, वे ‘उमराव जान’ के लिए उनके पास हाथ जोड़कर आते थे. कहा तो ये भी जाता है कि जब खय्याम साहब ने उनसे ‘दिल चीज क्या है’ गाने के लिए कहा, तो आशा जी ने इसे एक नए चैलेंज के तौर पर लिया. उन्होंने अपनी पिच को दो नोट नीचे करके गाया, जिसके लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला. यह उस सिंगर के लिए सबसे बड़ी जीत थी जिसे कभी सेकंड ग्रेड माना जाता था. आशा जी के नाम 12,000 से ज्यादा गानों का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड है. अपनी बहन लता जी की इज्जत करते हुए, उन्होंने अपनी एक अलग दुनिया बनाई जहां वह खुद नंबर वन रहीं. आशा जी, भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगी.
