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आज के युवा राकेश बेदी को फिल्म ‘धुरंधर’ से जानते हैं, जिन्होंने जमील जमाली के रोल से पाकिस्तान में खलबली मचा दी है. दरअसल, ‘धुरंधर’ में उनका किरदार पाकिस्तानी नेता की जिंदगी से प्रेरित है, जिसे सीक्वल में भारतीय जासूस के रूप में दिखाया गया है. राजेश बेदी 90s के किड्स के लिए नए नहीं हैं. वे दशकों से लोकप्रिय हैं. उन्होंने 80 के दशक से अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को खूब एंटरटेन किया. रणवीर सिंह स्टारर ‘धुरंधर’ में ‘जमीला जमाली’ के दमदार रोल के लिए उन्हें काफी सराहना मिल रही है. उन्होंने ‘चश्मे बद्दूर’ जैसी फिल्मों मे मजेदार रोल निभाए. उन्हें टेलीविजन में ‘ये जो है जिंदगी’ से बड़ा ब्रेक मिला. इसके बाद, वे ‘श्रीमान श्रीमती’ में दिलरुबा, ‘यस बॉस’ में मोहन और ‘भाबीजी घर पर हैं’ में भूरीलाल के किरदारों से घर-घर पॉपुलर हुए.

नई दिल्ली: राकेश बेदी एक ऐसा नाम है जिसे सुनते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. 80 के दशक से अपनी कॉमिक टाइमिंग का लोहा मनवाने वाले राकेश बेदी को आज ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर: द रिवेंज’ जैसी फिल्मों के बाद वह असली पहचान और सम्मान मिल रहा है, जिसके वो हमेशा से हकदार थे. रणवीर सिंह के साथ ‘जमीला जमाली’ के किरदार में उन्होंने साबित कर दिया कि उम्र बस एक नंबर है, हुनर तो आज भी वही पुराना और धारदार है.

जमील जमाली के करियर की शुरुआत की बात करें तो 1981 की फिल्म ‘चश्मे बद्दूर’ को भला कौन भूल सकता है? उन्होंने ओमी के किरदार में जो शरारती और लड़कियों के पीछे भागने वाले रूममेट का रोल निभाया, वह आज भी कल्ट माना जाता है. फारूक शेख के साथ उनकी जुगलबंदी ने इस फिल्म को यादगार बना दिया. कई लोग मानते हैं कि यही वह मोड़ था जिसने उन्हें बॉलीवुड का एक बेहतरीन कॉमेडी स्टार बना दिया.

टीवी की दुनिया में उनका जलवा हमेशा बरकरार रहा. 90 के दशक का सुपरहिट शो ‘श्रीमान श्रीमती’ तो आपको याद ही होगा. इसमें उन्होंने दिलरुबा जरनैल सिंह खुराना का रोल प्ले किया था, जो अपनी पड़ोसन कोकिला पर लट्टू रहते थे. अपनी पत्नी प्रेमा शालिनी (अर्चना पूरन सिंह) के सामने उनका वह डर और पड़ोसन के लिए वो मासूम सा क्रश, दर्शकों को हंसते-हंसते लोटपोट कर देता था. (फोटो साभार: IMDb)
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‘ये जो है जिंदगी’ के जरिए राजेश बेदी हर घर का हिस्सा बन गए. उन्होंने शो में एक बेरोजगार साले का किरदार निभाया था, जो अपनी बहन और जीजा के साथ रहता है. भले ही उनके कैरेक्टर के इरादे नेक होते थे, लेकिन उनके अतरंगी आइडियाज हमेशा घर में नई मुसीबत खड़ी कर देते थे. दूरदर्शन के उस दौर में इस शो ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई.

राकेश बेदी सिर्फ कॉमेडी एक्टर नहीं थे. उन्होंने ‘मेरा दामाद’ जैसी फिल्मों में भी अपनी रेंज दिखाई. उन्होंने रवि के किरदार में जिस तरह फारूक शेख के कैरेक्टर को गुमराह किया और पूरी कहानी का रुख मोड़ दिया, वह काबिल-ए-तारीफ था. उनके काम की वजह से फिल्म में जो कन्फ्यूजन पैदा होता है, वही कहानी की जान थी. यह रोल दिखाता है कि वे सिर्फ हंसाते ही नहीं, कहानी को आगे ले जाने वाले मजबूत एक्टर भी हैं.

कॉमेडी के सफर में ‘यस बॉस’ एक और बड़ा पड़ाव रहा. आसिफ शेख और कविता कपूर के साथ उनकी केमिस्ट्री जबरदस्त थी. ऑफिस में अपनी ही पत्नी से शादी छुपाने का जो स्ट्रगल मोहन (राकेश बेदी) करता था, वह देखने लायक होता था. बॉस की फ्लर्टिंग और मोहन की बेबसी के बीच जो कॉमेडी निकलती थी, उसने इस शो को सालों तक लोगों का पसंदीदा बनाए रखा.

राकेश बेदी ने ‘जाने भी दो पारो’ में भी अपनी कॉमिक टाइमिंग का जादू बिखेरा. अर्चना पूरन सिंह के साथ उनकी जोड़ी यहां भी हिट रही. रोजमर्रा की जिंदगी की छोटी-छोटी परेशानियों को अपनी एक्सप्रेसिव एक्टिंग से बड़ा और मजेदार बना देना राकेश बेदी की खासियत रही है.इस शो ने साबित किया कि लीड रोल हो या सपोर्टिंग, राकेश बेदी हर फ्रेम में अपनी छाप छोड़ना जानते हैं.

राकेश बेदी आज के समय में ‘भाबीजी घर पर हैं’ में अंगूरी भाभी के पिता ‘भूरीलाल’ बनकर छाए हुए हैं. दामाद मनमोहन तिवारी की टांग खींचना और शराब के प्रति उनका प्रेम दर्शकों को खूब भाता है. 80 के दशक से शुरू हुआ सफर आज भी पूरे शबाब में है. राकेश बेदी का हर किरदार हमें यही सिखाता है कि सलीके से की गई कॉमेडी कभी पुरानी नहीं होती.
