February 27, 2026
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टी20 वर्ल्ड कप 2026 में एक बार फिर निराशाजनक प्रदर्शन के बाद श्रीलंका क्रिकेट टीम में बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है. सह-मेजबान होने के बावजूद टूर्नामेंट के सुपर-8 चरण से बाहर होना टीम और फैंस दोनों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है. अब खबरें सामने आ रही हैं कि इस हार का असर सीधे टीम की कप्तानी और चयन समिति पर पड़ सकता है.

सुपर-8 से बाहर होते ही बढ़ा दबाव

ग्रुप स्टेज में लगातार तीन मैच जीतकर शानदार शुरुआत करने वाली श्रीलंकाई टीम से काफी उम्मीदें थीं. हालांकि जैसे ही टीम सुपर-8 में पहुंची, उसका प्रदर्शन अचानक गिर गया. पहले मुकाबले में इंग्लैंड से हार मिली और इसके बाद न्यूजीलैंड ने भी उन्हें मात दे दी. इन दो लगातार हार ने टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने के सारे रास्ते बंद कर दिए.

साल 2014 में टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली श्रीलंका की टीम पिछले कई सालों से बड़े टूर्नामेंट में टॉप-4 तक भी नहीं पहुंच पाई है. इस बार घरेलू मैदान पर खेलते हुए भी टीम उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी, जिससे अब क्रिकेट बोर्ड पर कड़े फैसले लेने का दबाव बढ़ गया है. 

कप्तान और चयनकर्ताओं पर गिर सकती है गाज

एएफपी की रिपोर्ट और समाचार एजेंसी की रिपोर्ट्स के मुताबिक, टूर्नामेंट खत्म होने के बाद श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड टीम के प्रदर्शन की समीक्षा करेगा. इसके बाद कप्तान दासुन शनाका और राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को हटाने जैसे बड़े फैसले लिए जा सकते हैं. यह भी कहा जा रहा है कि कुछ अधिकारी खुद ही अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं.

इससे पहले टीम के हेड कोच सनथ जयसूर्या जनवरी में ही घोषणा कर चुके थे कि वर्ल्ड कप के बाद वह अपने पद से हट जाएंगे. ऐसे में आने वाले समय में टीम मैनेजमेंट में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

हार के बाद क्या बोले कप्तान?

न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली हार के बाद कप्तान दासुन शनाका काफी हताश दिख रहे थे. उन्होंने माना कि घरेलू दर्शकों के सामने इस तरह टूर्नामेंट से बाहर होना बेहद शर्मनाक एहसासा है. उनके अनुसार टीम ने शुरुआत तो अच्छी की थी, लेकिन अहम मौकों पर गेंदबाज और बल्लेबाज दोनों ही दबाव में आ गए.

शनाका ने कहा कि टीम को अब किसी एक या दो खिलाड़ियों पर निर्भर रहने की आदत छोड़नी होगी. उन्होंने यह भी माना कि टी20 जैसे तेज फॉर्मेट में सकारात्मक सोच और आक्रामक रवैया बेहद जरूरी है, लेकिन इस टूर्नामेंट में टीम वैसा खेल नहीं दिखा सकी.

अब देखना दिलचस्प होगा कि टूर्नामेंट के बाद श्रीलंका क्रिकेट में किस तरह के बदलाव होते हैं और क्या टीम नए नेतृत्व के साथ भविष्य की ओर कदम बढ़ाती है या नहीं. 



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