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Bollywood Movies Based on Real life Gangsters : बॉलीवुड फिल्मों में विलेन के रोल हमेशा से दर्शकों को लुभाते रहे हैं. विलेन का किरदार जितना खतरनाक होगा, मूवी का रोमांच उतना ही बढ़ जाता है. बॉलीवुड की ज्यादातर फिल्मों का आधार ही यही है. 70 के दशक में दो फिल्में ऐसी आईं जो असल गैंगस्टर-क्रिमिनल की रियल लाइफ से इंस्पायर्ड थीं. दिलचस्प बात यह है कि कुछ एक्टर इन ‘विलेन’ से मिले. फिर ऐसे किरदार निभाए दर्शक हैरान रह गए. 25 साल में बनीं इन तीन फिल्मों में से दो ब्लॉकबस्टर रहीं. एक मूवी कल्ट हिट मानी जाती है. इन तीन फिल्में ने 6 सितारों की तकदीर बदल दी. ये तीनों फिल्में कौन सी हैं, वो एक्टर कौनसे हैं जो रियल लाइफ ‘गैंगस्टर-विलेन’ से मिले, आइये जानते हैं….

70 के दशक ने हिंदी सिनेमा को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया. एक ऐसी फिल्म आई जिसने पांच सितारों की तकदीर बदलकर रख दी. एक ऐसी राइटर जोड़ी सामने आई जिसने रियल-लाइफ विलेन-गैंगस्टर के किरदारों को फिल्म में डालना शुरू किया. सोने पर सुहागा तो ये हुआ कि इन रियल लाइफ विलेन-क्रिमिनल-गैंगस्टर से एक्टर मिले. उनकी निजी जिंदगी को अपने किरदार में शामिल किया. फिर क्या था, अपनी एक्टिंग से सबको दीवाना बना लिया. 25 साल के अंतराल में ऐसी तीन फिल्में आई जिनमें रियल लाइफ-क्रिमिनल से एक्टर मिले. तीनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर जबर्दस्त हिट रहीं. ये फिल्में थीं : जंजीर, दीवार और सत्या. आइये जानते हैं इन फिल्मों से जुड़े दिलचस्प अनछुए पहलू…….

सबसे पहले बात करते हैं 11 मई 1973 को रिलीज हुई प्रकाश मेहरा की फिल्म ‘जंजीर’ जिसने अमिताभ बच्चन को बॉलीवुड इंडस्ट्री का नया सुपरस्टार बना दिया. उन्हें एंग्रीमैन का नाम दिलाया. यह एक एक्शन क्राइम फिल्म थी जिसका डायरेक्शन-प्रोडक्शन प्रकाश मेहरा ने किया था. स्क्रिप्ट सलीम-जावेद ने लिखी थी. फिल्म में जया भादुड़ी, प्राण, अजी खान और बिंदु नजर आए थे. म्यूजिक कल्याण जी -आनंद जी का था. जंजीर फिल्म के किस्से आप सभी ने सुने होंगे. कैसे इस फिल्म के लिए प्रकाश मेहरा ने सबसे पहले धर्मेंद्र को अप्रोच किया था. अमिताभ उन दिनों फिल्म इंडस्ट्री में स्ट्रगल कर रहे थे. प्रकाश मेहरा ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि जंजीर फिल्म धर्मेंद्र के लिए बनाई जा रही थी. उन्होंने फिल्म ठुकरा दी तो देवानंद और राजकुमार से संपर्क किया गया. फिल्म समाधि और जंजीर की स्क्रिप्ट की अदला-बदली हुई थी. धर्मेंद्र के भाई उसी दौरान ‘प्रतिज्ञा’ बना रहे थे, इसलिए वह टाइम नहीं दे पाए. एक्टर प्राण के बेटे ने प्रकाश मेहरा को उन्हीं दिनों अमिताभ बच्चन की रिलीज हुई फिल्म ‘बॉम्बे टू गोवा’ देखने की सलाह दी. अमिताभ बच्चन की-शत्रुघ्न सिन्हा के बीच एक फाइट सीन था. यह सीन देखते ही प्रकाश मेहरा ने अमिताभ को फिल्म में ले लिया. यह कहानी तो सबको पता है.

जंजीर में विलेन धरम तेजा का किरदार एक्टर अजीत खान ने निभाया था. धरम तेजा का किरदार रियल लाइफ से इंस्पायर्ड था. आंध्र प्रदेश का रहने वाला धरम तेजा एक NRI था. साठ के दशक में धर्म तेजा ने जहाज खरीदने के लिए भारत सरकार से 20 करोड़ का कर्ज लिया था. उसने अपनी शिपिंग योजना से तत्कालीन प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू को प्रभावित कर दिया था. बताया जाता है इ इंदिरा गांधी उनकी आवभगत किया करती थीं. वो देश छोड़कर भाग गया. 1970 में लंदन में उसे गिरफ्तार किया गया. प्रत्यर्पण के जरिये भारत लाया गया. भारत में उस पर मुकदमा चला. जयंती शिपिंग कंपनी के मालिक धरम तेजा कर्ज नहीं चुका पाया. अदालत ने तीन साल की सजा दी थी. 1975 में भारतीय जेल से रिहा हुआ और 1977 में वह विदेश भाग गया. अमेरिका में ही उसका निधन हो गया.
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एक्टर अजीत खान ने अपने एक इंटरव्यू में रियल धरम तेजा को लेकर दिलचस्प खुलासा किया था. अजीत ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘एक पिक्चर जो बहुत मशहूर हुई, जिसकी वजह से मैंने डायलॉग बोलना वगैरल शुरू किया, वो फिल्म थी जंजीर. एक्चुली मुझे ‘धरम तेजा’ का नाम फिल्म में दिया गया था. इत्तिफाक से मेरी मुलाकात उन साहब से एक पार्टी में हुई थी. मैंने देखा कि वो कितना कूल और निहायत ही शांत आदमी है. उनके पीछे बहुत केस हुआ था लेकिन उस आदमी के बात करने में ऐसा कोई फर्क नहीं लगा. बड़े ठंडे से और बड़े मीठे से वो बात करते थे. मुझे ऐसा लगा कि इस पिक्चर में मेरा नाम ‘धरम तेजा’ है तो मैं अगर इनकी कॉपी कर लूं तो बहुत अच्छा रहेगा. इत्तिफाक से उस पिक्चर ने कई लोगों की तकदीरे बदल दीं. डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, हीरो, राइटर और मेरी भी तकदीर बदली गई. उसके बाद से लगातार मेरी पिक्चर हिट होती चली गईं.’

जंजीर फिल्म में शेर खान का किरदार प्राण ने निभाया था. अमिताभ बच्चन का जंजीर फिल्म का डायलॉग ‘जब तक बैठने के लिए ना कहा जाए शराफत से खड़े रहो. यह पुलिस स्टेशन है तुम्हारे बाप का घर नहीं.’ हमेशा के लिए अमर हो गया. यह डायलॉग उन्होंने प्राण साहब के लिए ही बोला था. सभी जानते हैं कि यह किरदार 70 के दशक के मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला से इंस्पायर्ड था. अफगानिस्तान में जन्मे करीम लाला को मुंबई का पहला अंडरवर्ल्ड डॉन माना जाता है. उसका असली नाम अब्दुल करीम शेर खान था. 1950 से 1980 के बीच करीम लाला ने मुंबई पर एकतरफा राज किया. करीम लाला ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की बीच बाजार पिटाई की थी. 1981 में दाऊद के भाई शब्बीर की हत्या करवा दी थी. 1980 के बाद से ही दाऊद इब्राहिम गैंग का खौफ बढ़ता गया. दाऊद ने उनके पूरे गैंग का खात्मा कर दिया. अपने भाई शब्बीर की मौत के ठीक 5 साल बाद 1986 में करीम लाला के भाई रहीम खान का मर्डर करवाया था.

जंजीर फिल्म का म्यूजिक भी कमाल का था. फिल्म के गाने ‘दीवाने हैं दीवानो को ना घर चाहिए’, ‘बना के क्यों बिगाड़ा रे’ और ‘यारी है ईमान मेरा, यार मेरी जिंदगी’ बहुत पॉप्युलर हुए थे. गीत प्रकाश मेहरा ने लिखे थे. ‘यारी है ईमान मेरा, यार मेरी जिंदगी’ गीतकार गुलशन बावरा ने लिखा था. गुलशन बावरा ने फिल्म में एक छोटा सा रोल भी निभाया था. जंजीर फिल्म के बजट और कलेक्शन की सटीक जानकारी नहीं मिलती. माना जाता है कि फिल्म का बजट करीब 90 लाख था और मूवी ने 3 करोड़ की कमाई की थी. जंजीर फिल्म को चार फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे. बेस्ट लिरिसिस्ट का अवॉर्ड गुलशन बावरा, बेस्ट स्टोरी-बेस्ट स्क्रीनप्ले का अवॉर्ड सलीम-जावेद को और बेस्ट एडिटिंग का अवॉर्ड आर. महादिक को मिला था. जंजीर गुजरते समय के साथ एक आइकॉनिक मूवी बन गई. इस फिल्म ने रियल-लाइफ गैंगस्टर की जिंदगी पर आधारित फिल्मों की नींव भी डाली.

अमिताभ बच्चन को सही मायने में स्टारडम 24 जनवरी 1975 को रिलीज हुई दीवार फिल्म ने दिया. दीवार फिल्म के डायरेक्टर यश चोपड़ा थे. प्रोड्यूसर गुलशन राय थे. दीवार में अमिताभ बच्चन, शशि कपूर, निरूपा रॉय, नीतू सिंह, परवीन बॉबी, इफ्तिखार खान, मदन पुरी अहम भूमिकाओं में नजर आए ते. आरडी बर्मन के म्यूजिक ने दर्शकों को दीवाना बना लिया था. यह फिल्म हिंदी सिनेमा की 100 मस्ट वॉच मूवी में शामिल है. फिल्म का दो डायलॉग ‘मैं आज भी फेंके हुए पैसे नहीं उठाता’ और ‘मेरे पास मां है’ अमर हो गए. दोनों डायलॉग कालजयी हैं. आज भी हर किसी की जुबान पर रहते हैं.

बहुत कम लोग यह जानते हैं कि ‘दीवार’ फिल्म की कहानी मुंबई के अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान की लाइफ से इन्स्पायर्ड थी. सलीम-जावेद ने एक बार फिर से एक रियल लाइफ-गैंगस्टर की कहानी पर किरदार गढ़ा था. फिल्म में अमिताभ बच्चन ने विजय का किरदार निभाया था. विजय की कहानी और हाजी मस्तान की लाइफ में कई समानताएं हैं. मझगांव डाकयार्ड में कुली के तौर पर अपनी जिंदगी की शुरुआत करने वाले हाजी मस्तान ने पठान गैंग के खिलाफ मोर्चा लिया था.
‘दीवार’ फिल्म में विजय वर्मा भी हफ्ता वसूल करने वाली गैंग से पंगा लेता है. दीवार फिल्म का जब प्रीमियर हुआ तो सबने इसे फ्लॉप करार दिया था लेकिन दर्शकों ने उन्हें गलत साबित कर दिया. फिल्म ने इतिहास रच दिया. 1975 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली यह चौथी फिल्म थी.

आगे चलकर जुलाई 1998 में एक ऐसी फिल्म आई जिसका किरदार आज भी दर्शकों के जेहन में जिंदा है. यह किरदार उस एक्टर का उपनाम बन गया. जिस फिल्म में यह कालजयी किरदार नजर आया उसका नाम सत्या था जो कि क्राइम एक्शन मूवी थी. रामगोपाल वर्मा डायरेक्टर-प्रोड्यूसर थे. सत्या फिल्म में मनोज बाजपेयी ने भीखू म्हात्रे का यादगार किरदार निभाया था. मनोज बाजपेयी ने भीखू म्हात्रे के आइकॉनिक रोल के लिए खास तैयारी की थी. उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि यह रोल उन्होंने अपने शहर बेतिया के एक बड़े क्रिमिनल से इंस्पायर्ड होकर किया था. बदन में नीचे बनियान, शर्ट के खुले बटन…सबकुछ उन्होंने अपने किरदार में ज्यों का त्यो कॉपी किया. सत्या फिल्म बहुत ही रियलिस्ट फिल्म थी. इस फिल्म ने मनोज बाजपेयी, राम गोपाल वर्मा, अनुराग कश्यप और सौरभ शुक्ला की किस्मत बदल दी. बॉलीवुड में रियलिस्टिक सिनेमा का नया ट्रेंड स्थापित किया. यह फिल्म पूरे एक हफ्ते तक दर्शकों के लिए तरसती रही थी, फिर दर्शकों की भीड़ उमड़ने लगी. थिएटर फुल होने लगे.
