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मशहूर गीतकार वर्मा मलिक ने अपने गीतों से लाखों-करोड़ों दिलों को छुआ. पंजाब में जन्मे मलिक ने बंटवारे के बाद कड़ा स्ट्रगल किया और भजन गायकी से पहचान बनाई. उनके करियर का टर्निंग पॉइंट अभिनेता मनोज कुमार के साथ उनकी मुलाकात रही, जिन्होंने फिल्म ‘यादगार’ के जरिए उन्हें इंडस्ट्री में स्थापित किया. ‘एक तारा बोले तुम तुम’ और ‘सबसे बड़ा नादान वही है’ जैसे कालजयी गीतों के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड से भी नवाजा गया. उनकी कलम ने देशभक्ति, सामाजिक दर्द और शादी-ब्याह के उत्सवों को बेहद खूबसूरती से बयां किया.

वर्मा मलिक ने कई यादगार गाने लिखे थे.
नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के इतिहास में वर्मा मलिक एक ऐसा नाम है, जिन्होंने अपनी कलम के जादू से गीतों को अमर बना दिया. 13 अप्रैल को उनकी जयंती है और आज भी उनके लिखे गाने उतने ही ताजा लगते हैं जितने दशकों पहले थे. पंजाब के फिरोजपुर में जन्मे वर्मा मलिक के मन में बचपन से ही देशभक्ति कूट-कूट कर भरी थी, जिसका असर उनके काम में भी दिखा. बंटवारे के बाद जब वे भारत आए, तो स्ट्रगल के दिनों में उन्होंने भजनों के जरिए अपनी पहचान बनाई. साल 1954 में फिल्म ‘दोस्त’ से उन्हें बड़ा मौका मिला, जहां उनके लिखे गीत ‘आए भी अकेले, जाएंगे भी अकेले’ ने जीवन की गहरी सच्चाई को बयां किया. तलत महमूद की आवाज में यह गाना हिट तो हुआ, लेकिन अफसोस कि उन्हें इसके बाद लंबे समय तक वह पहचान नहीं मिल सकी जिसके वे हकदार थे.
वर्मा मलिक की जिंदगी में असली मोड़ तब आया जब उनकी मुलाकात अभिनेता मनोज कुमार से हुई. मनोज कुमार ने उनके हुनर को पहचाना और 1970 की फिल्म ‘यादगार’ के सभी गाने लिखने की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी. यहीं से शुरू हुआ उनके करियर का ‘यादगार’ सफर. इस फिल्म का गाना ‘एक तारा बोले तुम तुम’ घर-घर में गूंजने लगा और वर्मा मलिक रातों-रात स्टार गीतकार बन गए. मनोज कुमार उनके करियर के लिए एक ऐसे सारथी साबित हुए, जिन्होंने उन्हें इंडस्ट्री में मजबूती से स्थापित कर दिया. उसी साल फिल्म ‘पहचान’ के गाने ‘सबसे बड़ा नादान वही है’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला, जिसने साबित कर दिया कि सादगी भरे शब्दों में भी कितनी ताकत होती है.
हर मूड के लिखे गाने
वर्मा मलिक की खासियत यह थी कि वे हर मूड के गाने लिखने में माहिर थे. चाहे ‘आज मेरे यार की शादी है’ जैसा खुशी का माहौल हो, ‘दो बेचारे बिना सहारे’ जैसी मस्ती हो, या ‘महंगाई मार गई’ जैसा सामाजिक दर्द उनकी कलम ने हर भावना को बखूबी पकड़ा. उन्होंने लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और शंकर-जयकिशन जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ मिलकर ‘नागिन’ और ‘विक्टोरिया नंबर 203’ जैसी फिल्मों को संगीत से सजाया. सिर्फ हिंदी ही नहीं, उन्होंने पंजाबी फिल्मों के लिए भी शानदार काम किया. 15 मार्च 2009 को भले ही उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनके लिखे गीत आज भी हमें अपनी जड़ों और भावनाओं से जोड़े रखते हैं. उनके गीतों की फिलॉसफी और सच्चाई उन्हें हमेशा हमारे बीच जिंदा रखेगी.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
