March 19, 2026
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बॉलीवुड मूवी धुरंधर- 2: भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे चर्चित सीक्वल फिल्मों में से एक धुरंधर-2 आज रिलीज हो गई है. फिल्म के निर्देशक आदित्य धर ने अपनी इस फिल्म में अपराध और राजनीति के उस गठजोड़ को पर्दे पर उतारा है, जिसने दशकों तक उत्तर प्रदेश को अपनी मुट्ठी में रखा था. फिल्म में ‘आतिफ अहमद’ नाम का एक किरदार है, जिसका अंदाज, पहनावा, बातचीत का तरीका और अपराध करने का पैटर्न हूबहू यूपी के पूर्व सांसद और बाहुबली अतीक अहमद से मेल खाता है. दर्शकों के बीच इस बात की सबसे ज्यादा चर्चा है कि क्या फिल्म में दिखाए गए तथ्य अतीक की असली जिंदगी के पन्नों से लिए गए हैं.

अतीक अहमद की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. 1962 में प्रयागराज के एक साधारण परिवार में जन्मे अतीक के पिता तांगा चलाते थे, लेकिन अतीक की महत्वाकांक्षाएं बहुत बड़ी थीं. महज 17 साल की उम्र में उस पर हत्या का पहला आरोप लगा और देखते ही देखते उसके नाम पर 100 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हो गए. हत्या, अपहरण, रंगदारी और जमीन कब्जाना अतीक के गिरोह ‘गैंग आईएस-227’ का मुख्य काम था. 1989 में उसने राजनीति में कदम रखा और इलाहाबाद पश्चिम से निर्दलीय विधायक बनकर सबको चौंका दिया. इसके बाद वह पांच बार विधायक और एक बार फूलपुर से सांसद रहा.

फिल्म ‘धुरंधर-2’ में एक दमदार डायलॉग है ‘जब तक आतिफ अहमद है, जेल में हो या बाहर, सब संभाल लेगा.’

कौन था अतीक अहमद?

फिल्म ‘धुरंधर-2’ में एक दमदार डायलॉग है ‘जब तक आतिफ अहमद है, जेल में हो या बाहर, सब संभाल लेगा.’ यह अतीक अहमद की उस ताकत को दर्शाता है जिसे यूपी पुलिस ने भी महसूस किया था. अतीक अहमद ने देवरिया जेल में रहते हुए एक कारोबारी का अपहरण करवाकर उसे जेल के भीतर ही पिटवाया था. फिल्म में भी दिखाया गया है कि कैसे यह किरदार जेल के भीतर से मोबाइल फोन के जरिए रंगदारी और फेक करेंसी का नेटवर्क चलाता है. फिल्म का मुख्य नायक हमजा (रणवीर सिंह) इसी नेटवर्क को ध्वस्त करने के मिशन पर निकलता है, जो आतिफ अहमद के जरिए अंतरराष्ट्रीय आतंकियों से जुड़ा होता है.

अतीक अहमद का अंत और फिल्म का क्लाइमेक्स

अतीक अहमद के पतन की शुरुआत 2005 में राजू पाल हत्याकांड से हुई थी, लेकिन उसका अंत 15 अप्रैल 2023 को हुआ, जब पुलिस हिरासत में मेडिकल जांच के लिए ले जाते समय कैमरों के सामने उसे और उसके भाई अशरफ को गोलियों से भून दिया गया. फिल्म ‘धुरंधर-2’ में इस घटना को एक अलग नजरिए से दिखाया गया है. फिल्म में ‘आतिफ अहमद’ का अंत केवल एक गैंगवार नहीं, बल्कि एक बड़े राष्ट्रीय सुरक्षा मिशन का हिस्सा बताया गया है. निर्देशक ने अतीक के किरदार को अंतरराष्ट्रीय साजिशों और अंडरवर्ल्ड कनेक्शन से जोड़कर पेश किया है, जिससे कहानी में रोमांच का तड़का लग गया है.

तांगेवाले का बेटा जो बना ‘सिस्टम’ का बादशाह

हालांकि फिल्म में कई काल्पनिक तत्व जोड़े गए हैं, लेकिन अतीक अहमद की प्रोफाइल से प्रेरित ‘आतिफ’ का किरदार दर्शकों को यूपी के उस दौर की याद दिलाता है जब सड़क से लेकर सदन तक माफिया का खौफ था. फिल्म में दिखाए गए ‘आतिफ’ के राजनीतिक संरक्षण और उसकी अकूत बेनामी संपत्ति के आंकड़े अतीक अहमद की उन जांचों से मिलते-जुलते हैं, जिनमें उसकी सैकड़ों करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई थी. ‘धुरंधर-2’ में अतीक अहमद जैसे किरदारों का चित्रण यह संदेश देने की कोशिश करता है कि अपराध की उम्र चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हो, उसका अंत कानून या कुदरत के हाथों तय होता है.



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