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Mohammed Rafi Superhit Song : संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल डायरेक्टर-प्रोड्यूसर राज खोसला से मिलने पहुंचे. उन्होंने गाना सुनाया. गाना सुनते ही राज खोसला का दिल खुश हो गया. इस पर संगीतकार जोड़ी ने कहा कि उन्होंने तो सिर्फ ट्यून बनाई थी. ट्यून को शब्दों का गहना आनंद बख्शी ने पहनाया था. उन्होंने अपनी कलम से इतना सुंदर गाना लिखा है. तय हुआ कि मोहम्मद रफी से गाना गंवाया जाए. जब राजेश खन्ना को यह पता चला तो उन्होंने किशोर कुमार का नाम लिया. इस पर प्यारेलाल ने जिद की और कहा कि ये सॉन्ग तो सिर्फ रफी साहब ही गाएंगे. बड़ी मुश्किल से राजेश खन्ना ने मोहम्मद रफी के नाम पर सहमति दी. मोहम्मद रफी ने अपनी जादुई आवाज से गाने को अमर कर दिया. यह फिल्म कौन सी था, गाना कौनसा था, आइये जानते हैं दिलचस्प किस्सा………

70 का दशक शुरू होने से पहले बॉलीवुड में राजेंद्र कुमार-शम्मी कपूर-देवानंद की तिकड़ी राज कर रही थी. राजेश खन्ना धीरे-धीरे अपनी पैठ मजबूत करने लगे थे. 1969 तक बॉलीवुड में किशोर कुमार की डिमांड होने लगी थी. ‘आराधना’ फिल्म के सभी गाने किशोर कुमार ने गाए थे. उन्होंने पहली बार अपनी आवाज राजेश खन्ना के लिए दी थी. राजेश खन्ना उनके फैन हो गए थे. उन्हीं दिनों एक और फिल्म ‘दो रास्ते’ बन रही थी. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. राजेश खन्ना ने फिल्म का एक गाना मोहम्मद रफी की बजाय किशोर कुमार से गंवाने को कहा. बड़ी मुश्किल से उन्होंने मोहम्मद रफी के नाम पर सहमति जताई.

रफी साहब ने इस गाने में अपनी आवाज का ऐसा जादू बिखेरा कि मूवी तो सुपरहिट हुई ही, गाने भी कालजयी साबित हुआ. यहां तक कि आराधना फिल्म के गानों से ज्यादा तारीफ बटोरी. बात हो रही है 1969 में आई राजेश खन्ना की फिल्म ‘दो रास्ते’ के कालजयी सॉन्ग ‘ये रेश्मी जुल्फें’ की.

लीजेंड मोहम्मद रफी की मखमली आवाज 60 के दशक के सभी स्टार्स पर फबती थी. उन्होंने राजेश खन्ना के करियर की पहला हिट गाना भी दिया. यह गाना राज़ फिल्म (1967) का था जिसके बोल थे ‘अकेले है चले आओ, जहां हो’. 1969 में आराधना फिल्म के रिलीज होते ही राजेश खन्ना रातोंरात सुपर स्टार बन गए. इस फिल्म में किशोर कुमार ने राजेश खन्ना को अपनी आवाज दी थी. किशोर दा इससे पहले सिर्फ देवानंद के लिए गाने गाते थे. यह पहला मौका था जब राजेश खन्ना के लिए उन्होंने गाया था. राजेश खन्ना उन्हें मनाने के लिए किशोर दा के घर भी गए थे.
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आराधना फिल्म की कामयाबी के बाद राजेश खन्ना हर प्रोड्यूसर-डायरेक्टर पर अपनी फिल्म में किशोर दा को लेने का दबाव डालते थे. उन्हीं दिनों डायरेक्टर-प्रोड्यूसर राज खोसला एक फिल्म ‘दो रास्ते’ बना रहे थे जिसममें राजेश खन्ना, मुमताज, बलराज साहनी, प्रेम चोपड़ा और बिंदु लीड रोल में थे. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का और गीतकार आनंद बख्शी थे. फिल्म के तीन गाने ‘ये रेशमी जुल्फें, ये शरबती आंखें’ और ‘तूने काजल लगाया दिन में रात हो गई’ और ‘बिंदिया चमकेगी, चूड़ी खनकेगी’ सदाबहार साबित हुए.

‘दो रास्ते’ फिल्म की कहानी उपन्यास ‘नीलाम्बरी’ से ली गई थी. यह उपन्यास मराठी उपन्यासकार चंद्रकात काकोडकर ने लिखा था. काकोडकर को बेस्ट स्टोरी का फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिला था. 40 लाख के बजट में बनी इस फिल्म ने 3 करोड़ से ज्यादा की कमाई की थी. यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी.

सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिल्म में राजेश खन्ना दाढ़ी-मूंछ में नजर आए थे. इसके पीछे की वजह और भी रोचक है. दरअसल वो उस समय ‘इत्तिफाक’ फिल्म की भी शूटिंग कर रहे थे जो कि एक फैमिली ड्रामा फिल्म थी. राजेश खन्ना इस फिल्म के लिए पहली पसंद नहीं थे. राज खोसला संजय खान के साथ बनाना चाहते थे लेकिन उनके सीक्रेटरी ने फीस ज्यादा मांगी थी तो उन्होंने राजेश खन्ना के साथ फिल्म बनाने का फैसला किया.

एक्ट्रेस मुमताज इस फिल्म से पहले बी-ग्रेड फिल्मों में काम करती थीं. यह पहला मौका था, जब उन्होंने किसी ए-ग्रेड फिल्म में काम किया था. अपने छोते से रोल में उन्होंने जान डाल दी. ग्लैमरस अंदाज और खूबसूरत गानों की बदौलत वह छा गई थीं.

दो रास्ते फिल्म का सबसे पॉप्युलर सॉन्ग ‘ये रेशमी जुल्फें, ये शरबती आंखें…’ की ट्यून पर 90 के दशक में एक और गाना बनाया गया. यह गाना 1996 में आई फिल्म ‘छोटा सा घर’ में सुनाई दिया थ. गाने के बोले ‘तेरी आंखों की कसम, तुझे प्यार करता हूं, तू झूठ बोलता है’ थे. कुमार सानू ने इस गाने को गाया है. संगीतकार राजेश रोशन थे.
