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संजय दत्त पिछले 40 सालों से एक्शन सिनेमा के बेताज बादशाह रहे हैं. उन्होंने ‘वास्तव’ और ‘खलनायक’ जैसी फिल्मों से खुद को स्थापित किया. उन्होंने ‘अग्निपथ’ में कांचा चीना और ‘केजीएफ 2’ में अधीरा जैसे खौफनाक विलेन के किरदारों के लिए खुद को पूरी तरह बदल दिया था. उन्होंने 25 किलो का कवच पहनकर शूटिंग भी की. फिल्म ‘नाम’ से उन्हें सीरियस एक्टर के तौर पर लिया गया. संजय दत्त ने न सिर्प बॉलीवुड, बल्कि साउथ सिनेमा में भी अपनी धाक जमाई है. वे मुश्किल किरदारों और हाई-ऑक्टेन एक्शन के दम पर आज भी मेकर्स की पहली पसंद बने हुए हैं.

नई दिल्ली: संजय दत्त की धांसू डील-डौल, गहरी आवाज, किलर लुक और गहरी एक्टिंग ने उन्हें दर्शकों का चहेता बनाया. वे अपने बेबाक अंदाज से सबका ध्यान खींचते हैं. उन्होंने पिछले 40 सालों से पर्दे पर जो धाक जमाई है, वैसी मिसाल कम ही देखने को मिलती है. वे अपने दम पर एक्शन सिनेमा का एक ऐसा चमकता सितारा बना बैठे हैं, जिसकी बराबरी करना आज के एक्टर्स के लिए भी एक बड़ी चुनौती है.

संजय के करियर की सबसे बेहतरीन फिल्मों में ‘वास्तव’ का नाम सबसे ऊपर आता है. संजू बाबा खुद मानते हैं कि इस किरदार के लिए उन्होंने मशहूर हॉलीवुड फिल्म ‘स्कारफेस’ के अल पचीनो से प्रेरणा ली थी. फिल्म का वो आखिरी सीन तो सबको याद ही होगा, जिसे उन्होंने सिर्फ दो टेक में खत्म कर दिया था. उनकी वो शिद्दत आज भी पर्दे पर साफ दिखती है.

90 के दशक में ‘खलनायक’ फिल्म ने जो गदर मचाया था, उसे भुलाना मुश्किल है. 1993 की यह दूसरी सबसे बड़ी हिट फिल्म थी. इसमें संजय दत्त ने ‘बल्लू’ का किरदार निभाया था, जो न तो पूरी तरह हीरो था और न ही पूरी तरह विलेन. इस फिल्म का गाना ‘चोली के पीछे’ और संजू बाबा का स्वैग उस दौर में हर किसी की जुबान पर चढ़ गया था.
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संजू बाबा ने ‘अग्निपथ’ का कांचा चीना नाम का खौफनाक किरदार निभाया था. उन्होंने इस रोल के लिए खुद को पूरी तरह बदल लिया था. सिर मुंडवाना, कानों में बड़े छेद और वो डरावनी हंसी, संजय दत्त ने इस किरदार में जान डाल दी थी. उन्हें इस जबरदस्त परफॉर्मेंस के लिए बेस्ट विलेन का नॉमिनेशन भी मिला था.

संजय दत्त ने ‘केजीएफ: चैप्टर 2’ में ‘अधीरा’ बनकर सबको चौंका दिया था. क्या आप जानते हैं कि उन्होंने फिल्म के एक्शन सीन्स के दौरान करीब 25 किलो का भारी-भरकम कवच पहना था? उनकी उम्र और सेहत को देखते हुए यह वाकई काबिले-तारीफ है. उन्होंने इसी फिल्म के जरिए कन्नड़ सिनेमा में अपनी शानदार शुरुआत की और साबित किया कि बॉस आखिर बॉस ही होता है.

संजू बाबा सिर्फ एक्शन ही नहीं, बल्कि सीरियस एक्टिंग में भी माहिर हैं. इसकी झलक हमें 1986 में आई फिल्म ‘नाम’ में देखने को मिली थी. यह फिल्म उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट थी. इसके बाद ही, लोगों ने उन्हें सिर्फ एक एक्शन स्टार के तौर पर नहीं, बल्कि एक मंझे हुए और सीरियस एक्टर के रूप में पहचानना शुरू किया.

संजय की एक्शन फिल्मों की लिस्ट में ‘शूटआउट एट लोखंडवाला’ का जिक्र न हो, ऐसा हो नहीं सकता. इस फिल्म में उन्होंने एसीपी शमशेर खान का किरदार निभाया था, जो असल जिंदगी के एक जांबाज पुलिस ऑफिसर थे. मुंबई के इतिहास की सबसे बड़ी मुठभेड़ को लीड करनेवाले इस पुलिस ऑफिसर के रोल में संजय दत्त ने गजब की मैच्योरिटी दिखाई थी.

संजय दत्त का जादू सिर्फ हिंदी या कन्नड़ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने 2023 में ‘लियो’ के साथ तमिल सिनेमा में भी कदम रखा. वे इसमें साउथ के सुपरस्टार विजय के सामने विलेन ‘एंटनी दास’ के रूप में नजर आए. वे आज भी अपनी मेहनत और अलग-अलग तरह के किरदारों से हम सबको हैरान करते रहते हैं, जो उनकी सबसे बड़ी खासियत है.
