Last Updated:
Immaan Dharam Movie Unknwon Facts : बॉलीवुड में रिश्तों की अपनी अहमियत है. फिल्मों की कहानियों की तरह यहां प्रेम और समर्पण है तो रिश्ते के बीच घुटन-दर्द और जलन भी है. बॉलीवुड में परिवार के एक सदस्यों के बीच मनमुटाव कोई नई बात नहीं है. एक बार तो चाचा की फिल्म फ्लॉप होने पर भतीजा खुशी से झूम उठा. बॉलीवुड में फिल्मी सितारों की जिंदगी में ऐसी ही अजीब घटनाएं कई बार हो चुकी हैं. चाचा-भतीजा दोनों ही अपने जमाने के दिग्गज अभिनेता था. दोनों का बॉलीवुड में जलवा था. चाचा-भतीजे की यह जोड़ी कौन सी थी और वो फिल्म कौन सी थी, जिसके फ्लॉप होने का जश्न भतीजे ने मनाया, आइये जानते हैं……..

साल था 1977. सीता और गीता, जंजीर, शोले और दीवार जैसी फिल्मों की जबर्दस्त कामयाबी के बाद सलीम-जावेद की जोड़ी ने एक और शानदार स्क्रिप्ट लिखी. प्रोड्यूसर प्रेम जी को स्क्रिप्ट पसंद आई तो उन्होंने इस पर फिल्म बनाने का फैसला किया. फिल्म का नाम ‘ईमान-धर्म’ रखा गया. स्टार कास्ट फाइनल हुई. शशि कपूर, संजीव कुमार और अमिताभ बच्चन को लीड रोल में लेने का फैसला हुआ. साथ में रेखा, अपर्णा सेन, हेलेन और प्रेम चोपड़ा का नाम फाइनल हुआ. फिल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी देश मुखर्जी ने संभाली. फिल्म का मुहुर्त जनवरी 1975 में हुआ था. मल्टी-स्टारर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही. सलीम-जावेद की जोड़ी को गहरा धक्का लगा. बॉलीवुड के हीरो ऋषि कपूर ने फिल्म के फ्लॉप होने का खूब जश्न मनाया. उन्होंने ऐसा क्यों किया था, आइये जानते हैं……

ईमान-धर्म भी एक मसाला फिल्म थी. इसमें सलीम-जावेद की बाकी फिल्मों की तरह एक्शन-इमोशन की भरमार थी. म्यूजिक लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का था. अमिताभ-शशि कपूर ने ठग का रोल निभाया था. दोनों कोर्ट में झूठी गवाही देते हैं और पैसे कमाते हैं. भारी-भरकम बजट और बड़े सितारों से सजी यह 14 जनवरी 1977 को रिलीज हुई थी मगर बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई. फिल्म का प्लॉट बहुत ही प्रिडेक्टिबल था. स्टोरी में सलीम-जावेद का रंग नजर नहीं था. फिल्म फ्लॉप हुई तो इंडस्ट्री के एक खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई.

दरअसल, 70 के दशक में बॉलीवुड में मनमोहन देसाई भी मसाला फिल्में बनाने के लिए जाने जाते थे. सलीम-जावेद को वो बहुत नापसंद करते थे. ‘ईमान-धर्म’ जब फ्लॉप हुई तो उन्होंने फिल्म की असफलता का खूब जश्न मनाया. फिर भी मन नहीं भरा, तो उन्होंने ऋषि कपूर को उकसाया. मनमोहन देसाई ने अपने एक असिस्टेंड को इसका जिम्मा सौंपा. ऋषि कपूर भी उनकी बातों में आ गए और फिल्म के फ्लॉप होने का जश्न मनाने के लिए जावेद अख्तर के घर पहुंच गए. जावेद का उन्होंने जमकर मजाक उड़ाया.
Add News18 as
Preferred Source on Google

इस दौरान ऋषि कपूर यह भी भूल गए कि ‘ईमान-धर्म’ फिल्म में उनके चाचा शशि कपूर भी काम कर रहे थे. वह अतिथि की मर्यादा भी भूल गए थे. किसी के घर पर पहुंचकर उसके जले पर नमक छिड़कना सभ्यता का तकाजा नहीं है. ऋषि कपूर ने अपनी किताब ‘खुल्लम खुल्ला’ में इस घटना का जिक्र किया है. ऋषि कपूर ने अपनी बायोग्राफी में लिखा है, ‘1977 में अमर अकबर एंथनी में मैंने काम किया था. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर रही. कई रिकॉर्ड तोड़ दिए थे जबकि सलीम-जावेद की ‘ईमान धरम’ बुरी तरह फ्लॉप रही. यह पहला मौका था जब सलीम-जावेद की कोई फिल्म इतनी बुरी तरह पिटी थी. हालांकि फिल्म में अमिताभ बच्चन, शशि कपूर और संजीव कुमार जैसे स्टार थे.’

उन्होंने आगे का घटनाक्रम बताते हुए कहा था, ‘जावेद साहब ने हमारा स्वागत-सत्कार किया. हमें ड्रिंक्स पिलाई. हमने बार-बार उनके सामने कहा कि ईमान धर्म फ्लॉप हो गई. जावेद अख्तर पर कई बार तंज कसे लेकिन उन्होंने बुरा नहीं माना. बस पलटकर इतना ही कहा कि सरकार, हमारी तो एक फिल्म फ्लॉप हुई है, आपने तो फ्लॉप फिल्मों के ग्रंथ लिखे हैं.’

सलीम-जावेद और मनमोहन देसाई के बीच इस फिल्म को लेकर मनमुटाव को लेकर एक और कहानी है. बताया जाता है कि सलीम-जावेद ‘ईमान-धर्म’ की स्क्रिप्ट लेकर सबसे पहले मनमोहन देसाई से मिले थे. मनमोहन देसाई यह फिल्म बनाने के लिए तैयार हो गए. प्रोड्यूसर एजी नाडियाडवाला फिल्म को प्रोड्यूस करने वाले थे. नाडियाडवाला ने सलीम-जावेद को बड़ी रकम दी और स्टोरी खरीद ली. फिर सलीम-जावेद की मुलाकात प्रोड्यूसर प्रेम जी से हुई. उन्होंने दोगुनी कीमत में स्क्रिप्ट खरीदने की बात कही. सलीम-जावेद मनमोहन देसाई के पास पहुंचे और बोले कि स्क्रिप्ट में कुछ कमियां हैं औ वो इसे पूरा नहीं कर पाएंगे. फिर उन्होंने डायरेक्टर देश मुखर्जी के साथ स्क्रिप्ट पूरी की. जब मनमोहन देसाई को यह पता चला तो उन्होंने सेम आइडिया पर स्क्रिप्ट लिखवाई और ‘अमर अकबर एंथोनी’ फिल्म बनाई.

ईमान-धर्म के डायरेक्टर के साथ प्रोड्यूसर टोनी-टीटो ने जो किया, वो और भी दिलचस्प है. प्रोड्यूसर टोनी-टीटो ने देश मुखर्जी को 70 के दशक में एक कार साइनिंग अमाउंट के तौर पर दी थी. यह कार तब दी थी जब मल्टी स्टारर ‘ईमान-धर्म’ बन रही थी. फिल्म जब बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही तो प्रोड्यूसर टोनी-टीटो ने उन्हें घुमाने के बहाने कार में ले गए. बीच रास्ते में कार से उतारा और चले गए. देश मुखर्जी की बतौर डायरेक्टर यह इकलौती फिल्म है. वो बहुत बड़े आर्ट डायरेक्टर थे. उन्होंने ‘तीसरी कसम’ (1966) और ‘दीवार’ (1975) जैसी फिल्मों के सेट डिजाइन किए.

ईमान-धर्म की असफलता ने सलीम-जावेद को अंदर तक झकझोर डाला. दोनों का करियर दांव पर लग गया. दोनों ने मुश्किल वक्त में हिम्मत से काम लिया. अगले ही साल 1978 में धमाकेदार वापसी की. सलीम-जावेद की जादुई स्क्रिप्ट पर बनीं फिल्में ‘डॉन’ और ‘त्रिशूल’ रिलीज हुईं. इन दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया. अमिताभ बच्चन के स्टारडम को नया आयाम दिया. इनकी गिनती आज कल्ट फिल्मों में होती है. सलीम जावेद ने इसके बाद काला पत्थर, दोस्ताना, शान और शक्ति जैसी फिल्मों की भी स्क्रिप्ट लिखी. अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया लेकिन ऋषि कपूर से सलीम-जावेद के रिश्ते हमेशा के लिए खराब हो गए.
