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Bollywood Timeless Classic Movie : किसी इंसान ने किस घर में जन्म लिया है, इससे वह बुरा बनता है या संगत में आकर, या फिर हालात की वजह से बुरा बनता है, इस बात को आधार बनाकार बॉलीवुड में कई फिल्में बनाई गई हैं. राइटर ख्वाजा अहमद अब्बास और बीपी साठे ने फिल्म की स्टोरी तैयार की. दोनों अपनी कहानी लेकर महबूब खान के पास पहुंचे. महबूब खान दिलीप कुमार और अशोक कुमार के साथ यह फिल्म बनाना चाहते थे. ख्वाजा अहमद अब्बास को यह आइडिया पसंद नहीं आया. उन्होंने राज कपूर से संपर्क किया. राज कपूर बरसात फिल्म की सफलता के बाद एक और अच्छी कहानी की तलाश में थे. जब केए अब्बास ने उन्हें अपनी कहानी सुनाई तो राज कपूर फिल्म बनाने के लिए तैयार हो गए. राज कपूर ने फिल्म के डायरेक्शन और प्रोडक्शन का भी जिम्मा उठाने का वादा किया.

Raj Kapoor Nargis Best Movies : आवारा फिल्म में पृथ्वी राज कपूर अधूरे मन से काम करने के लिए तैयार हुए थे. वो चाहते थे फिल्म को राज कपूर डायरेक्ट ना करें. दिलचस्प बात यह है कि आवारा फिल्म में राज कपूर के दादा बश्वेसरनाथ नाथ कपूर ने भी काम किया था. उन्होंने एक जज का रोल निभाया था. लीड हीरोइन के तौर पर राज कपूर ने नरगिस को फाइनल किया था. इसके अलावा फिल्म में लीला चिटनिस, केएन सिंह भी नजर आए थे. फिल्म में शशि कपूर ने राज कपूर के बचपन का रोल निभाया था. इस फिल्म में पहली बार राज कपूर ने चार्ली चैपलिन के लिटिल ट्रैंप का लुक अपनाया था. आगे चलकर श्री 420 में भी राज कपूर इसी लुक में नजर आए थे.

आवारा फिल्म आरके बैनर के तले 14 दिसंबर 1951 को रिलीज हुई थी. लीला चिटनिस राज कपूर के मां के रोल में थीं. लीला मिश्रा उनकी भाभी बनी थीं. कुक्कू बार डांसर के रोल में थी. केएन सिंह ने डाकू जग्गा की भूमिका निभाई थी. आवारा फिल्म में म्यूजिक शंकर-जयकिशन का था. गीतकार हसरत जयपुरी ने 4 गाने जबकि शैलेंद्र ने 8 सॉन्ग लिखे थे. गीतकार शैलेंद्र रेलवे में नौकरी करते थे. शायरी के शौकीन थे.

गीतकार शैलेंद्र के राज कपूर से जुड़ने का किस्सा और भी दिलचस्प है. 1946 में एक कवि सम्मेलन में राज कपूर ने उन्हें पहली बार उन्हें देखा था. शैलेंद्र ने शुरुआत में फिल्मों में गीत लिखने से इनकार कर दिया था. निजी जीवन में परेशानी आई तो वो राज कपूर के पास पहुंचे. राज कपूर ने 500 रुपये देकर दो गाने बरसात फिल्म के लिए लिखवाए थे.
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अवारा फिल्म में गीत लिखवाने के लिए जब राज कपूर उनसे मिले थे तो शैलेंद्र ने एक बार फिर से अपना कवि मिजाज दिखाया और फिल्म के लिए गीत लिखने से इनकार कर दिया. राज कपूर किसी तरह से उन्हें मनाकर अपने साथ राइटर ख्वाजा अब्बास अहमद के पास लेकर पहुंचे. यहीं पर पहली बार शैलेंद्र ने कहानी सुनकर कहा था : आवारा था लेकिन आसमान का तारा था. ख्वाजा अहमद अब्बस खुशी से उछल पड़े. दो घंटे की कहानी सिर्फ एक लाइन में आ गई थी. इस तरह से शैलेंद्र का फिल्मी करियर शुरू हुआ. शंकर-जयकिशन और शैलेंद्र की तिकड़ी ने आगे चलकर इतिहास रच दिया.

शंकर-जयकिशन की जोड़ी बरसात फिल्म से फेमस हो चुकी थी. आवारा फिल्म में एक बार फिर से यह जोड़ी राज कपूर के साथ थी. आवारा फिल्म की स्क्रीनप्ले-डायलॉग ख्वाजा अहमद अब्बास ने लिखे थे. फिल्म के आर्ट डायरेक्टर एम.आर अचरेकर थे. आवारा फिल्म में हिंदी फिल्म के इतिहास का पहला ड्रीम सीक्वेंस सॉन्ग था. फिल्म में राज कपूर सपना देख रहे हैं और गाना शुरू होता है. इस सीन के सेट को बनाने में तीन माह का समय लगा था. यह गाना 9 मिनट लंबा था. तीन भाग में था. इसके दो भाग लता मंगेशकर ने गाए थे.

दिलचस्प बात यह है कि आवारा फिल्म का एक गाना ‘घर आया मेरा परदेसी…’ गाने की धुन 1935 के एक अरबी सॉन्ग से इंस्पायर्ड थी. गाने क बोल थे : अला बला दे ए महबूद (Ala Balady Al Mahboub) जिसे ओइम कलथुम (Oum Kalthoum) ने गाया था. इसकी धुन पर ही शंकर-जयकिशन ने ‘घर आया मेरा परदेसी’ गाना रिकॉर्ड किया था.

बरसात फिल्म की कामयाबी के बाद जितने पैसे राज कपूर ने कमाए थे, वो उन्होंने आरके स्टूडियो बनाने में लगा दिए थे. आवारा फिल्म में एक गाना शमशाद बेगम ने भी गाया था, जिसके बोल थे : एक दो तीन, आजा है मौसम है रंगीन. यह गाना शैलेंद्र ने लिखा था. आगे चलकर ‘एक दो तीन…’ बोल पर गाना तेजाब फिल्म में भी सुनने के मिला था. टाइटल सॉन्ग ‘आवारा हूं…’ शैलेंद्र ने लिखा था.

आवारा फिल्म में एक गाना हसरत जयपुरी ने लिखा था जिसके बोल थे : ‘हम तुझसे मुहब्बत करके सनम…’ मुकेश ने इसे अपनी आवाज दी थी. इस गाने के दूसरे अंतरे में राज कपूर के निर्देशन में बनी तीन फिल्मों ‘आग, बरसात और आवारा’ के नाम थे.

आवारा 1951 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी. कहीं-कहीं पर दो करोड़ का कलेक्शन करने का आंकड़ा मिलता है. आवारा फिल्म हिंदी सिनेमा की कालजयी फिल्म में शुमार हैं. आज भी इस फिल्म के गाने सुने जाते हैं. आवारा उस समय तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी. आगे चलकर यह रिकॉर्ड 1952 में महबूब खान की दिलीप कुमार स्टारर फिल्म ‘आन’ ने तोड़ा था.
