April 9, 2026
ENTERTAINMENT-NEWS-2026-02-f1c054be9aeb80dd69372401f2ee1001-16x9.jpg
Spread the love


Last Updated:

मशहूर एक्ट्रेस और डायरेक्टर कविता चौधरी को दुनिया ‘ललिता जी’ और ‘कल्याणी सिंह’ के नाम से जानती है. भारतीय टेलीविजन की एक दमदार पहचान थीं. उन्होंने ‘उड़ान’ सीरियल के जरिए अपनी बहन (देश की दूसरी महिला IPS) की कहानी पेश करके लाखों लड़कियों को सिविल सेवा के लिए प्रेरित किया. वहीं, उन्होंने सर्फ के विज्ञापन में ‘ललिता जी’ बनकर एक समझदार महिला के रूप में खुद को स्थापित किया. एनएसडी से शिक्षित कविता ने कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद 2024 में दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनका काम आज भी महिलाओं के लिए हौसले की मिसाल है.

'उड़ान' की कल्याणी सिंह, देश की बेटियों को IPS बनने के लिए किया प्रेरितZoom

टीवी की मशहूर एक्ट्रेस. (फोटो साभार: IANS)

नई दिल्ली: 80 के दशक का वो दौर याद कीजिए, जब टीवी पर एक साधारण सी साड़ी पहने महिला सब्जी वाले से मोलभाव करते हुए बड़े कॉन्फिडेंस के साथ कहती थी— ‘भाई साहब, सस्ती चीज और अच्छी चीज में फर्क होता है.’ वो आवाज थी कविता चौधरी की, जिन्हें दुनिया ‘ललिता जी’ के नाम से जानती थी. ललिता जी सिर्फ एक विज्ञापन का किरदार नहीं थीं, बल्कि उन्होंने हर भारतीय घर की उस समझदार महिला को पर्दे पर उतारा था जो पाई-पाई का हिसाब रखती है. कविता की शुरुआत दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से हुई थी, जहां अनुपम खेर और सतीश कौशिक जैसे दिग्गज उनके क्लासमेट थे. बाद में उन्होंने न सिर्फ एक्टिंग की, बल्कि उस दौर में निर्देशन की कमान भी संभाली जब महिलाओं के लिए यह रास्ता बहुत कठिन था.

कविता चौधरी का सबसे बड़ा धमाका था टीवी सीरियल ‘उड़ान’. यह शो कोरी कल्पना नहीं था, बल्कि उनकी अपनी बहन कंचन चौधरी भट्टाचार्य की कहानी थी, जो देश की दूसरी महिला आईपीएस ऑफिसर बनी थीं. सीरियल में ‘कल्याणी सिंह’ का वो किरदार घर-घर में प्रेरणा बन गया. उस दौर में जब समाज मानता था कि बेटा ही ‘कुल का दीपक’ होता है, ‘उड़ान’ ने दिखाया कि एक बेटी भी सिस्टम का हिस्सा बनकर उसे बदल सकती है. इस शो का असर इतना जबरदस्त था कि इसे देखने के बाद सिविल सर्विस की परीक्षाओं में बैठने वाली लड़कियों की संख्या में भारी उछाल आया. कविता ने अपनी कलम और विजन से साबित कर दिया कि पर्दे पर औरत को ‘अबला’ दिखाने के बजाय अगर ‘सबल’ दिखाया जाए, तो भी लोग उसे उतना ही प्यार देते हैं.

करोड़ों महिलाओं को दिया हौसला
अगर ‘उड़ान’ ने कविता चौधरी सम्मान दिया, तो ‘ललिता जी’ के विज्ञापन ने उन्हें घर-घर का हिस्सा बना दिया. उन्होंने सिखाया कि थोड़ा ज्यादा खर्च करना फिजूलखर्ची नहीं, बल्कि एक सही ‘निवेश’ होता है. यह शायद भारतीय एडवर्टाइजिंग की पहली ऐसी कैंपेन थी जिसने एक हाउसवाइफ को ‘इंटेलिजेंट डिसीजन मेकर’ के रूप में पेश किया. जिंदगी के आखिरी सालों में कविता ने कैंसर जैसी बीमारी से बड़ी खामोशी और गरिमा के साथ जंग लड़ी. उनके जाने के बाद भी उनकी वो चमक और कल्याणी सिंह वाली हिम्मत आज भी याद की जाती है. वे भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन ‘ललिता जी’ की समझदारी और ‘कल्याणी सिंह’ की उड़ान आज भी करोड़ों महिलाओं को हौसला देती है.

About the Author

authorimg

Abhishek Nagar

अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Notifications OK No thanks