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हिंदी सिनेमा के दिग्गज निर्देशक सुभाष घई का फिल्मी सफर अभिनय से शुरू हुआ था. साल 1967 में फिल्म ‘तकदीर’ में एक छोटे से रोल से उनके करियर की शुरुआत हुई, जिसकी पुरानी तस्वीर उन्होंने हाल में ,सोशल मीडिया पर शेयर की है. हालांकि अभिनय में उन्हें वह सफलता नहीं मिली, जिसकी उन्होंने उम्मीद की थी, लेकिन बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म ‘कालीचरण’ ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया. वे ‘शोमैन’ के नाम से मशहूर हुए.

डायरेक्टर को ‘शोमैन’ का टैग मिला है. (फोटो साभार: IANS)
नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा में ‘शोमैन’ के नाम से मशहूर सुभाष घई आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ‘ताल’ और ‘परदेश’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले इस दिग्गज निर्देशक की शुरुआत एक मामूली एक्टर के तौर पर हुई थी? सुभाष घई को खुद नहीं पता था कि उनकी किस्मत उन्हें कैमरे के पीछे ले जाकर एक बड़ा मुकाम दिलाएगी. साल 1967 में आई फिल्म ‘तकदीर’ ने उनकी जिंदगी का रुख मोड़ दिया. इस फिल्म में उन्होंने जलाल आगा के साथ एक छोटा सा रोल निभाया था. भले ही वह रोल बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन राजश्री प्रोडक्शंस की इस फिल्म ने उनके लिए बॉलीवुड के दरवाजे खोल दिए. इसके बाद, वे ‘आराधना’ और ‘उमंग’ जैसी फिल्मों में भी नजर आए, पर नियति ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था.
सुभाष घई ने हाल में सोशल मीडिया पर अपनी उसी पहली फिल्म ‘तकदीर’ की एक पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट फोटो शेयर की है. इस तस्वीर में दो जवान लड़के नजर आ रहे हैं, जिन्हें पहचान पाना आज के दौर में काफी मुश्किल है. उन्होंने अपनी यादें ताजा करते हुए फैंस से पूछा कि क्या वे इस फोटो में उन्हें पहचान सकते हैं? उन्होंने भावुक होकर लिखा कि पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट से निकलने के बाद उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि उनकी ‘तकदीर’ उन्हें कहां ले जाएगी. आज जब वे पीछे मुड़कर देखते हैं, तो खुद को बहुत खुशनसीब मानते हैं. यह पोस्ट उन स्ट्रगल के दिनों की याद दिलाता है जब एक युवा सुभाष घई एक्टर बनने का सपना लेकर इंडस्ट्री में आए थे.
फिल्म डायरेक्टर सुभाष घई ने कई युवा कलाकारों को मौका दिया है.
निर्देशन में दिखाया कमाल
दिलचस्प बात यह है कि सुभाष घई का सिक्का एक्टिंग में तो नहीं चला, लेकिन जब उन्होंने निर्देशन की कमान संभाली, तो इतिहास रच दिया. उनकी पहली निर्देशित फिल्म ‘कालीचरण’ ने बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और वह साल की सबसे बड़ी हिट साबित हुई. इसी फिल्म ने विलेन अजीत खान को ‘लॉयन’ का मशहूर खिताब दिया और सुभाष घई को रातों-रात स्टार डायरेक्टर बना दिया. अभिनय से शुरू हुआ उनका सफर भले ही अधूरा रहा, लेकिन निर्देशन की दुनिया में उन्होंने जो मुकाम हासिल किया, वह आज भी नए फिल्ममेकर्स के लिए एक मिसाल है. उनकी कहानी हमें सिखाती है कि कभी-कभी जो हम चाहते हैं वह नहीं मिलता, क्योंकि तकदीर ने हमारे लिए उससे भी कुछ बड़ा सोच रखा होता है.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
