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पीएम मोदी काशी दौरे पर हैं और आज वह काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे. साथ ही बंगाल चुनाव के आखिरी चरण के लिए वोट भी डाले जाएंगे. पीएम मोदी काशी पूजन में बंगाल में जीत की कामना भी करेंगे. पीएम मोदी आज बेहद खास विधि से पूजा अर्चना करने वाले हैं. यह पूजा स्पेशल मौकों पर ही की जाती है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 अप्रैल अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे थे और आज वह विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव की षोडशोपचार विधि से विशेष पूजा-अर्चना करेंगे. करीब 13 महीने बाद पीएम मोदी आज सुबह काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंच विशेष पूजा अर्चना करेंगे. माना जा रहा है पीएम मोदी करीब 30 मिनट तक काशी विश्वनाथ मंदिर में मौजूद रहेंगे. साथ ही इसी दिन बंगाल चुनाव के आखिरी चरण के लिए वोट भी डाले जाएंगे और पूजन करके बंगाल के सुरक्षित भविष्य की कामना करेंगे. आज पीएम मोदी काशी विश्वनाथ में षोडशोपचार विधि से पूजन करने जा रहे हैं. आइए जानते हैं इस विधि से पूजा करना क्यों माना जाता है खास…
पीएम मोदी का काशी दौरा
पीएम मोदी 28 अप्रैल को शाम करीब 4 बजे वाराणसी के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचे थे. फिर एयरपोर्ट से सेना के हैलकॉप्टर से बीएलडब्ल्यू मैदान के लिए रवाना हो गए. इसके बाद शाम करीब 6 बजे बीएलडब्ल्यू के इंटर कॉलेज मैदान में महिला आक्रोश रैली को संबोधित किया. इस रैली में 50 हजार से अधिक महिलाएं शामिल हुई थीं. रैली के बाद पीएम मोदी वाराणसी के निर्माणाधीन परियोजनाओं का निरीक्षण किया. पीएम मोदी ने बीएलडब्ल्यू के गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम किया और यहीं से फिर आज काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए रवाना हो गए. मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद करीब 9.30 पर वाराणसी से हरदोई के लिए रवाना हो जाएंगे.
क्या है षोडशोपचार विधि?
षोडशोपचार पूजा हिंदू धर्म की एक अत्यंत विस्तृत और शास्त्रीय पूजा पद्धति है. षोडश का अर्थ होता है 16, और उपचार” का अर्थ सेवा या पूजन विधि. यानी इस पूजा में भगवान शिव की 16 प्रकार से सेवा और आराधना की जाती है. इन 16 चरणों में प्रमुख रूप से, आवाहन (भगवान को बुलाना), आसन, पाद्य (पांव धोना), अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल, आरती और विसर्जन शामिल होते हैं. यह विधि भगवान को अतिथि मानकर पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ उनकी सेवा करने का प्रतीक मानी जाती है.
क्यों खास है यह पूजा?
धर्म शास्त्रों के अनुसार, षोडशोपचार विधि को सबसे पूर्ण और प्रभावशाली पूजा माना जाता है. इसमें केवल मंत्रोच्चारण ही नहीं, बल्कि हर क्रिया के पीछे एक गहरा आध्यात्मिक अर्थ होता है. धर्म विशेषज्ञों का मानना है कि इस विधि से पूजा करने पर व्यक्ति का मन, वचन और कर्म तीनों शुद्ध होते हैं. यह पूजा भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण और आदर को दर्शाती है. काशी विश्वनाथ मंदिर को भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है. यहां की गई पूजा को अत्यंत फलदायी माना जाता है. प्रधानमंत्री द्वारा इस पवित्र स्थान पर षोडशोपचार विधि से पूजा करना ना केवल धार्मिक आस्था को दर्शाता है, बल्कि काशी की सांस्कृतिक विरासत को भी वैश्विक स्तर पर उजागर करता है.
अन्य पूजाओं से अलग क्यों?
सामान्य पूजा में जहां कुछ सीमित चरणों के साथ भगवान की आराधना की जाती है, वहीं षोडशोपचार विधि में पूरी प्रक्रिया अत्यंत व्यवस्थित और विस्तृत होती है. इसमें हर चरण का अपना विशेष मंत्र और नियम होता है. पूजा के दौरान शुद्धता और विधि-विधान का विशेष ध्यान रखा जाता है. यह पूजा अधिक समय और एकाग्रता की मांग करती है. इसी कारण इसे विशेष अवसरों और बड़े धार्मिक अनुष्ठानों में ही प्रमुखता से किया जाता है. पीएम मोदी इस दौरे के दौरान काशी विश्वनाथ का आशीर्वाद भी लेंगे और उनसे बंगाल में जीत की कामना भी करेंगे.
षोडशोपचार विधि से पूजा सांस्कृतिक घटना
धर्माचार्यों के अनुसार, षोडशोपचार पूजा केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के बीच गहरे संबंध को स्थापित करने का माध्यम है. यह व्यक्ति को अनुशासन, श्रद्धा और समर्पण का पाठ सिखाती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वाराणसी दौरा और काशी विश्वनाथ मंदिर में षोडशोपचार विधि से पूजा करना एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक घटना है. यह ना केवल परंपराओं के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि लोगों को शास्त्रीय पूजा विधियों के प्रति जागरूक भी करता है.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें
