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जब डायरेक्टर महेश भट्ट की म्यूजिकल फिल्म ‘आशिकी’ 1990 में रिलीज हुई, तो इसने बॉलीवुड में सफलता के सारे पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए. इस फिल्म से रातोंरात सुपरस्टार बने एक्टर राहुल रॉय इतने पॉपुलर हो गए कि पूरा देश उनके हेयरस्टाइल से लेकर उनके हाव-भाव तक सब कुछ कॉपी करने लगा. उनकी बॉक्स ऑफिस डिमांड इतनी जबरदस्त थी कि थिएटर के बाहर लाइनें खत्म होने लगती थीं और वे पॉपुलैरिटी में जानेमाने खान्स (शाहरुख, सलमान और आमिर) को भी चैलेंज करने लगे थे. लेकिन, किस्मत का पहिया ऐसा घूमा कि एक ‘बुरे’ और बहुत ज्यादा बड़े प्रोजेक्ट (जो कभी पूरी तरह रिलीज नहीं हुआ) ने इस तेजी से उभरते स्टार का पूरा करियर हमेशा के लिए बर्बाद कर दिया. तो आइए, राहुल रॉय की जादुई तरक्की और फिर उनकी शान से गिरावट की दुखद कहानी को जानते हैं.

नई दिल्ली. बॉलीवुड में ऐसे कई सितारे आए जो अपनी चमक से दुनिया को चौंका दिया और फिर अचानक गायब हो गए. लेकिन, 90 के दशक की शुरुआत में राहुल रॉय को जो क्रेज मिला, वो बॉलीवुड के इतिहास में बहुत कम एक्टर्स ने देखा होगा. जब 1990 में टी-सीरीज के मालिक गुलशन कुमार और डायरेक्टर महेश भट्ट ने मिलकर ‘आशिकी’ बनाई, तो उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि लंबे बालों वाला एक सीधा-सादा लड़का देश का सबसे बड़ा रोमांटिक आइकॉन बन जाएगा. ‘आशिकी’ के गाने और राहुल रॉय की मासूमियत ने उस जमाने के युवाओं के दिलों में ऐसा असर डाला कि बड़े-बड़े एक्टर्स के सिंहासन हिलने लगे थे. लेकिन, सिनेमा की चमक-दमक आपको जितनी तेजी से आसमान पर पहुंचा सकती है, उतनी ही बेरहमी से आपको जमीन पर भी गिरा सकती है.

90 के दशक की शुरुआत का वो जमाना याद है, जब हर गली, हर नुक्कड़ और हर ऑटो-रिक्शा कुमार सानू और अनुराधा पौडवाल की आवाजों से गूंजता था- ‘सांसों की जरूरत है जैसे…’. इस फिल्म की सफलता ने राहुल रॉय को उस ऊंचाई पर पहुंचा दिया, जहां तक पहुंचने के लिए एक्टर सालों तक स्ट्रगल करते हैं. फिल्म में उनका सिग्नेचर हेयरस्टाइल, लंबे बाल पीछे की ओर… उस जमाने का सबसे बड़ा फैशन स्टेटमेंट बन गया. हर नाई की दुकान के बाहर राहुल रॉय का पोस्टर लगा रहता था और हर लड़का उनके जैसा दिखना चाहता था. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उस समय डिस्ट्रीब्यूटर और प्रोड्यूसर मानते थे कि अगर इस लड़के के चेहरे वाला पोस्टर छप जाए, तो फिल्म हिट हो जाएगी. राहुल रॉय के पास फिल्मों की बाढ़ आ गई और यहीं उनसे सबसे बड़ी भूल हो गई. कहा जाता है कि उन्होंने सिर्फ 11 दिनों में 47 फिल्में साइन कर डाली थी. उन्होंने एक ही दिन में कई फिल्में साइन कर लीं.

1990 के आस पास, तीन नए लोग बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे- आमिर खान (‘कयामत से कयामत तक’ के बाद), सलमान खान (‘मैंने प्यार किया’ के बाद) और शाहरुख खान (जो अभी इंडस्ट्री में आने की तैयारी कर रहे थे). राहुल रॉय इन तीनों खान के बीच एक मजबूत रुकावट बनकर खड़े थे और पॉपुलैरिटी में उनसे कहीं आगे निकल गए. उस जमाने के ट्रेड एक्सपर्ट कहते हैं कि ‘आशिकी’ की सफलता के बाद, राहुल रॉय की मार्केट वैल्यू आसमान छू गई. कहा जाता है कि प्रोड्यूसर उन्हें कोई भी रकम देने को तैयार थे. उस समय राहुल रॉय की जबरदस्त पॉपुलैरिटी से सलमान और आमिर जैसे स्टार्स भी हैरान थे. राहुल रॉय के पास एक कल्ट सुपरस्टार बनने के लिए जरूरी सब कुछ था- शानदार लुक्स, बेहतरीन म्यूजिकल सेंस और महेश भट्ट जैसे गॉडफादर का सपोर्ट.
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इस दौरान, उन्होंने कई ऐसी फिल्मों पर भी काम किया जो इतनी खराब बनीं कि थिएटर तक पहुंचने से पहले ही फ्लॉप हो गईं. एक मशहूर घटना यह है कि राहुल रॉय ने अपना पूरा ध्यान ‘दिलवाले कभी ना हारे’ और ‘गजब तमाशा’ जैसी फिल्मों पर लगाया, जबकि उनके पैरेलल प्रोजेक्ट्स ठंडे बस्ते में चले गए. उस एक बड़ी फिल्म के कानूनी पचड़ों में फंसने और कभी रिलीज न होने की वजह से, वह उस कीमती समय को कभी वापस नहीं पा सके जो राहुल रॉय ने खोया था. बॉलीवुड में कहा जाता है कि अगर आप दो साल तक स्क्रीन से दूर रहते हैं या आपकी फिल्में रुक जाती हैं, तो दर्शक आपको भूल जाते हैं और आगे बढ़ जाते हैं. राहुल रॉय के साथ ठीक यही हुआ; उस रुके हुए प्रोजेक्ट ने उनके करियर के पीक पर उनका प्राइम टाइम छीन लिया.

रुके हुए प्रोजेक्ट्स के सदमे से उबरने के लिए, राहुल रॉय ने जो भी फिल्में मिलतीं, उन्हें साइन करना शुरू कर दिया. यह उनके करियर की दूसरी सबसे बड़ी गलती साबित हुई. उन्होंने ‘स्टंटमैन’, ‘गुमराह’, ‘जुनून’ और ‘फिर तेरी कहानी याद आई’ जैसी फिल्मों में काम किया. हालांकि ‘जुनून’ (जिसमें उन्होंने एक शापित शेर का रोल किया) और ‘गुमराह’ (संजय दत्त और श्रीदेवी के साथ) को कुछ पब्लिसिटी मिली, लेकिन वे उन्हें वह खास स्टारडम वापस नहीं दिला पाईं जिसकी उन्हें बहुत जरूरत थी. इसके बाद ‘हंसते जख्म’, ‘मेघा’ और ‘धर्म कर्मा’ जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गईं.

लगातार फेल होने की वजह से, प्रोड्यूसर्स ने उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी. डिस्ट्रीब्यूटर्स, जो कभी उनके दरवाजे के बाहर लाइन में खड़े रहते थे, उन्होंने उनके कॉल्स का जवाब देना बंद कर दिया. 90s के आखिर तक, राहुल रॉय मेनस्ट्रीम सिनेमा से पूरी तरह गायब हो गए थे. एक्टर, जिन्हें कभी खान्स का रिप्लेसमेंट माना जाता था, वो इंडस्ट्री से पूरी तरह दूर ह चुके थे.

सालों बाद, 2006 में जब टीवी का सबसे बड़ा रियलिटी शो ‘बिग बॉस’ शुरू हुआ, तो राहुल रॉय ने एक कंटेस्टेंट के तौर पर हिस्सा लिया. दर्शकों ने उनकी पहले की सादगी और विनम्र स्वभाव को देखकर उन्हें खूब प्यार दिया और वे शो के पहले विनर बने. ‘बिग बॉस’ जीतने से लगा कि उनका करियर फिर से चल पड़ेगा, लेकिन तब तक बॉलीवुड का माहौल पूरी तरह बदल चुका था. उन्हें कुछ छोटे प्रोजेक्ट्स मिले, लेकिन वे मेनस्ट्रीम ए-लिस्ट सिनेमा में वापसी करने में पूरी तरह नाकाम रहे.
