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बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले अजय तिवारी का कुत्तों के प्रति प्यार लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. पिछले 42 वर्षों से वे अलग-अलग विदेशी नस्ल के डॉग्स पाल रहे हैं और आज उनके घर में जर्मन शेफर्ड, साइबेरियन हस्की, अमेरिकन बुली और गोल्डेन रिट्रीवर जैसे कई महंगे डॉगी मौजूद हैं. खास बात यह है कि उन्होंने अपने घर का एक पूरा फ्लैट सिर्फ कुत्तों की देखभाल और रहने के लिए तैयार कर रखा है. सरकारी नौकरी के साथ-साथ अजय अपने डॉग्स की देखभाल पूरी जिम्मेदारी और प्यार से करते हैं, जिन्हें वे परिवार का हिस्सा मानते हैं.

बिहार के मुजफ्फरपुर के सहजानंद कॉलोनी निवासी अजय तिवारी का कुत्तों के प्रति ऐसा लगाव है कि उन्होंने अपने घर को ही मिनी डॉग हाउस बना दिया है. पिछले 42 वर्षों से वह अलग-अलग नस्ल के कुत्तों का पालन कर रहे हैं.

वर्तमान में उनके पास करीब 10 विदेशी नस्ल के डॉगी हैं, जिनकी कीमत बाजार में एक लाख रुपये से अधिक बताई जाती है. अजय तिवारी बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही कुत्तों का काफी शौक रहा है. जब वह मात्र 8 वर्ष के थे तभी उन्होंने पहला कुत्ता पालना शुरू कर दिया था.

शुरुआती दिनों में परिवार के लोगों ने उन्हें काफी डांटा और समझाया, लेकिन उनका लगाव कम नहीं हुआ तो धीरे-धीरे यह शौक उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया. वर्तमान में अजय तिवारी पीडब्ल्यूडी विभाग में सरकारी नौकरी करते हैं.
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नौकरी के साथ-साथ वह अपने डॉग्स की देखभाल भी पूरी जिम्मेदारी से करते हैं. उन्होंने बताया कि उनके घर में मौजूद सभी कुत्ते विदेशी नस्ल के हैं, हालांकि उनकी ब्रीडिंग भारत में ही हुई है.

उनके पास जर्मन शेफर्ड, लेब्रा डोर रिट्रीवर, गोल्डेन रिट्रीवर, साइबेरियन हस्की, अमेरिकन बुली, तिब्बतियन मैस्टिफ, और पोमेरियन जैसे कई लोकप्रिय विदेशी नस्ल के डॉग्स मौजूद हैं. इन डॉग्स के लिए विशेष खानपान, साफ-सफाई और रहने की व्यवस्था घर में ही की गई है. घर का एक फ्लैट कुत्तों के लिए ही रखा गया है.

अजय बताते हैं कि उनके लिए ये डॉग्स सिर्फ जानवर नहीं बल्कि परिवार के सदस्य की तरह हैं. वह रोजाना उनके खानपान, स्वास्थ्य और एक्सरसाइज का विशेष ध्यान रखते हैं. कई लोग उनके इस अनोखे शौक को देखने भी आते हैं.

मुजफ्फरपुर में विदेशी नस्ल के कुत्तों को पालने का यह शौक लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. अजय तिवारी का कहना है कि अगर इंसान जानवरों से प्यार करे तो वे भी परिवार की तरह अपनापन देते हैं. जानवर अपने मालिक का सबसे ज्यादा वफादार होता है. ड्यूटी के बाद खाली समय इन्हीं लोगों के साथ बिताते हैं.
