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Female oriented Hindi movies on Netflix : नेटफ्लिक्स पर मौजूद महिलाओं पर बनी 5 फिल्में समाज में महिलाओं के स्ट्रगल, साहस और उनकी बदलती पहचान को बखूबी दर्शाती हैं. ‘लापता लेडीज’ और ‘मिमी’ जैसी फिल्में जहां महिला शक्ति और सरोगेसी जैसे विषयों को इमोशनल टच के साथ पेश करती हैं, वहीं ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ और ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ असल जिंदगी की उन लड़ाइयों को दिखाती हैं जो एक महिला समाज और सिस्टम के खिलाफ लड़ती है.
फिल्मों में एक्ट्रेस का दिखा जलवा.
नई दिल्ली: आजकल नेटफ्लिक्स पर ऐसी कई बेहतरीन हिंदी फिल्में मौजूद हैं जो मजबूत महिला किरदारों के लिए पॉपुलर हैं. ‘लापता लेडीज’, ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’, और ‘मिमी’ जैसी फिल्में न केवल हमें मनोरंजन करती हैं, बल्कि समाज की कई कड़वी सच्चाइयों से भी रूबरू कराती हैं. इन कहानियों में महिलाओं के संघर्ष और हर मुश्किल से लड़कर बाहर निकलने के जज्बे को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है. चाहे वो छोटे शहर की दुल्हन हो या अपनी पहचान के लिए लड़ती एक माफिया क्वीन, हर किरदार दर्शकों के दिल में एक खास जगह बनाने में कामयाब रहा है.
किरण राव की ‘लापता लेडीज’ ने अपनी सादगी और कॉमेडी से सबका ध्यान खींचा. फिल्म की कहानी दो नई दुल्हनों की है जो ट्रेन के सफर में गलती से बदल जाती हैं. यहीं से शुरू होता है उनका अपनी पहचान ढूंढने का एक अनोखा सफर. दूसरी तरफ, आलिया भट्ट की ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ एक बेहद ताकतवर कहानी है, जो दिखाती है कि कैसे वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेली गई एक लड़की अपनी हिम्मत के दम पर कमाठीपुरा की आवाज बन जाती है. यह फिल्म समाज के दोहरे मापदंडों पर करारा प्रहार करती है और वर्कर्स के अधिकारों के लिए खड़ी होती है.
‘मिमी’ का इमोशनल ड्रामा
इमोशनल ड्रामा और थ्रिलर के शौकीनों के लिए ‘मिमी’, ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ और ‘दो पत्ती’ बेहतरीन विकल्प हैं. कृति सेनन की ‘मिमी’ सरोगेसी जैसे गंभीर मुद्दे को बड़े ही हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करती है, जो मां बनने के सही मायने समझाती है. वहीं रानी मुखर्जी की ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ एक मां की उस सच्ची और दर्दनाक लड़ाई की कहानी है, जो अपने बच्चों को वापस पाने के लिए पूरे देश के कानूनी सिस्टम से भिड़ जाती है. ‘दो पत्ती’ एक सस्पेंस थ्रिलर है, जो घरेलू हिंसा और बचपन के ट्रॉमा जैसे विषयों को बड़ी ही गहराई से छूती है.
‘उलझ’ की धाकड़ कहानी
जाह्नवी कपूर की ‘उलझ’ भी इसी कड़ी की एक खास फिल्म है, जिसमें एक युवा आईएफएस अधिकारी को राजनीति के खतरनाक जाल में फंसा दिखाया गया है. यह फिल्में साबित करती हैं कि आज का सिनेमा सिर्फ हीरो के पीछे चलने वाली हिरोइनों का नहीं, बल्कि खुद अपनी कहानी लिखने वाली महिलाओं का है. अगर आप ऐसी फिल्में देखना पसंद करते हैं जहां महिलाएं सिर्फ एक सहारा नहीं बल्कि पूरी फिल्म की जान होती हैं, तो नेटफ्लिक्स की ये लिस्ट आपके लिए एकदम परफेक्ट है. इन फिल्मों को देखकर आपको अहसास होगा कि हर महिला के अंदर एक अनकही ताकत छिपी होती है.
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अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें
