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एक ऐसा गाना जिसे गाने से किशोर कुमार कई कोशिशों के बावजूद नहीं गा पाए. फिर उन्होंने खुद अपने कदम पीछे खींच लिए. यह मशहूर किस्सा उस दौर का है जब राजेश खन्ना ने खुलेआम ऐलान कर दिया था कि मेरी हर फिल्म में गाने तो सिर्फ किशोर दा ही गाएंगे. राजेश खन्ना सुपर स्टार थे और किशोर कुमार उनकी आवाज. आखिर उस दिन रिकॉर्डिंग रूम में ऐसा क्या हुआ था कि दिग्गज संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के भी पसीने छूट गए थे. फिर किशोर कुमार के ही कहने पर रफी साहब को बुलाया गया. उन्होंने इस गाने को अपनी दर्दभरी मखमली आवाज से अमर कर दिया.

साल था 1971. फिल्म बन रही थी ‘हाथी मेरे साथी’. राजेश खन्ना का स्टारडम उन दिनों सातवें आसमान पर था. साउथ इंडिया के प्रोड्यूसर चिनप्पा थेवर ने राजेश खन्ना को मुंहमांगी फीस दी थी. संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को भी चांदी की प्लेट में रखकर 1-1 लाख रुपये दिए. पैसे तो सबने ले लिए लेकिन इस फिल्म को पूरा करने में पसीने छूट गए. हम 1971 में रिलीज हो रही ‘हाथी मेरे साथी’ फिल्म की बात कर रहे हैं. इस फिल्म के लिए तय था सभी गाने किशोर दा ही गाएंगे लेकिन एक सॉन्ग ऐसा था जिसकी ट्यून बहुत ही अलग थी. एक ऐसा गाना जिसमें इंसान के टूटते हुए दिल का दर्द, पीड़ा और खामोश रुलाई चाहिए थी.

किशोर दा माइक के सामने खड़े हुए और टे पर टेक देते रहे. लगातार कई कोशिशों के बाद भी गाना मुकम्मल नहीं हुआ. किशोर दा दिल के दर्द को गाने में नहीं उतार पाए. किशोर दा को खुद महसूस हुआ कि कुछ तो है जो खाली छूट रहा है.

किशोर कुमार की आवाज में वो गहराई, वो दर्द उभरकर नहीं आ रहा था. इधर लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल परेशान थे, उधर किशोर कुमार के मन में तनाव बढ़ता जा रहा था. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल तो निराश हो गए कि उन्होंने इस गाने को फिल्म से ही बाहर निकालने के बारे में सोचना शुरू कर दिया. प्रोड्यूसर चिनप्पा इसके लिए तैयार नहीं हुए. उन्होंने साफ कह दिया कि यह गाना फिल्म की रूह है. थिएटर में बैठे लोगों को झकझोर देगा. इसे किसी भी कीमत पर हटाया नहीं जा सकेगा.
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काफी देर तक मंथन चलता रहा. इसके बाद किशोर कुमार ने कुछ ऐसा किया, जिसकी उम्मीद वहां पर मौजूद किसी शख्स को नहीं थी. उन्होंने अपने अहंकार और स्टारडम को किनारे रखा. थोड़ी देर शांत रहे और फिर बोले कि मैं इस गाने के साथ न्याय नहीं कर पा रहा हूं. आप इस गाने को रफी साहब से गवा लीजिए. सिर्फ वही इस गाने को उस दर्द के साथ गा सकते हैं.

किशोर कुमार ने जो कहा, वो म्यूजिक इंडस्ट्री में बहुत बड़ी बात थी. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल भी यही चाहते थे लेकिन वो इस बात को राजेश खन्ना और प्रोड्यूसर के दबाव में कह नहीं पा रहे थे. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल रफी साहब को बहुत प्यार करते थे. हर फिल्म में एक गाना उनसे गवाया करते थे. किशोर दा के अनुरोध पर वो रफी साहब के पास गए. रफी साहब ने रिकॉर्डिंग रूम में पहुंचे. माइक पकड़ा और आंखें बंद करके वो गाना गा दिया.

रफी साहब ने जो गाना गाया, उसकी लाइनें थीं. : नफरत की दुनिया को छोड़के, प्यार की दुनिया में, खुश रहना मेरे यार….’ रफी साहब ने जिस दर्द के साथ जब इस गाने को गाया तो स्टूडियो में मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं. उस दिन रफी साहब ने अपने दोस्त किशोर कुमार की लाज भी रख ली. 55 साल बाद भी जब यह गाना बजता है तो सुनते ही दिल भारी हो जाता है.

‘हाथी मेरे साथी’ 14 मई 1971 को रिलीज हुई थी. इसका डायरेक्शन एमए थिरुमुगम ने किया था. पहली बार इस फिल्म के लिए सलीम-जावेद साथ आए और मिलकर स्क्रीनप्ले लिखा. फिल्म 1967 की तमिल फिल्म का रीमेक थी.डायलॉग इंदर राज आनंद ने लिखे थे. राजेश खन्ना और तनूजा लीड रोल में थे. फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट था. सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिल्म का टाइटल पहले ‘प्यार की दुनिया’ था जिसे बदलकर ‘हाथी मेरे साथी’ किया गया.

इस फिल्म से जुड़ा सबसे मशहूर किस्सा यह है कि राजेश खन्ना मुंबई के कार्टर रोड पर समुद्र किनारे बंगला लेना चाहते थे. उनकी नजर राजेंद्र कुमार के बंगले पर थी. राजेश खन्ना उस दौर के सुपरस्टार थे. उन्होंने 9 लाख रुपये में चिन्नप्पा की फिल्म ‘हाथी मेरे साथी’ साइन की. पैसे दो किश्तों में दिए गए. 2.5 लाख का साइनिंग अमाउंट दिया गया. राजेश खन्ना ने पैसे तो ले लिए लेकिन जब स्क्रिप्ट देखी तो होश उड़ गए. वो समझ गए कि स्क्रिप्ट में दम नहीं है. ऐसे में उन्होंने स्क्रिप्ट राइटर जोड़ी सलीम-जावेद से मदद की गुहार लगाई. सलीम-जावेद ने हीरो और चार हाथी को छोड़कर पूरी स्क्रिप्ट बदल दी. राजेश खन्ना ने बंगला खरीद लिया. नाम आशीर्वाद रखा. आगे चलकर अमिताभ बच्चन ने यह बंगला खरीद लिया. फिल्म सुपरहिट साबित हुई लेकिन सलीम-जावेद को क्रेडिट नहीं मिला. पैसे भी सिर्फ 10 हजार मिले. राजेश खन्ना अपना वादा पूरा नहीं कर पाए. आगे चलकर सलीम-जावेद ने राजेश खन्ना का स्टारडम डुबा दिया. अमिताभ बच्चन को रातोंरात सुपर स्टार बनवा दिया.
