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अपनी मखमली आवाज से सीधे रूह को छू लेने वाले मशहूर सिंगर ने संगीत की दुनिया पर राज किया. दिल्ली के एक मलयाली परिवार में जन्मे इस फनकार ने 6 से अधिक भाषाओं में 700 से ज्यादा गानों को अपनी आवाज दी. करियर की शुरुआत में 3500 जिंगल्स गाने के बाद साल 1999 में रिलीज हुए एक सैड सॉन्ग ने उनकी किस्मत हमेशा के लिए बदल दी और इन्हें रातोंरात सुपरस्टार बना दिया था.

नई दिल्ली. सुरों के बेताज बादशाह केके की आवाज में वो कशिश थी जो हर टूटते दिल का सहारा बनी और हर आशिक की धड़कन. जब वो गाते थे तो लगता था कि जैसे वो हर सुनने वाले की अपनी कहानी बयां कर रहे हों. बिना किसी तामझाम या शोर-शराबे के, उनकी सादगी भरी गायकी सीधे रूह में उतर जाती थी. साल 2022 में जब कोलकाता के एक लाइव कॉन्सर्ट के बाद अचानक उनके निधन की खबर आई, तो पूरा देश सन्न रह गया. उस दिन संगीत की दुनिया का एक सुरीला सितारा हमेशा के लिए खामोश हो गया, लेकिन अपनी विरासत के जरिए वह आज भी हमारे बीच जिंदा हैं.

केके का असली नाम कृष्णकुमार कुन्नथ था. उनका जन्म 23 अगस्त 1968 को दिल्ली के एक मलयाली परिवार में हुआ था. पिता सीएस नायर और मां कनकवल्ली केके की पहली प्रेरणा थे. दिल्ली में पले-बढ़े केके बचपन में डॉक्टर बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था.

माउंट सेंट मैरी स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही उनकी गायकी की झलक दिखने लगी थी. दूसरी कक्षा में उन्होंने पहली बार मंच पर प्रस्तुति दी. किशोर कुमार और आरडी बर्मन उनके आदर्श थे. शायद यही वजह थी कि उनकी आवाज में पुरानी मिठास और नए दौर की ताजगी दोनों महसूस होती थी.
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दिल्ली विश्वविद्यालय से कॉमर्स में स्नातक करने के बाद केके ने कुछ समय होटल इंडस्ट्री में मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव की नौकरी की. लेकिन उनका मन संगीत में ही बसता था. 1994 में वह मुंबई पहुंचे और संघर्ष शुरू हुआ.

मुंबई में उन्हें फिल्मों से पहले विज्ञापनों में गाने का मौका मिला. देखते ही देखते उन्होंने 3500 से ज्यादा जिंगल्स रिकॉर्ड कर लिए. यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी. कई बड़े ब्रांड्स के विज्ञापनों में भी उनकी आवाज सुनाई देने लगी. इसी दौरान संगीतकार लेस्ली लुईस उनके मार्गदर्शक बने और उन्होंने केके की प्रतिभा को पहचानने में बड़ी भूमिका निभाई.

फिल्मी दुनिया में केके को पहला बड़ा मौका संगीतकार और निर्देशक विशाल भारद्वाज ने दिया. फिल्म ‘माचिस’ के गीत ‘छोड़ आए हम’ से उनकी शुरुआत हुई, लेकिन असली पहचान मिली 1999 में आई फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ के गीत ‘तड़प तड़प के’ से. इस गीत में दर्द, प्रेम और बिछड़ने की जो भावना थी, उसे केके ने अपनी आवाज से अमर बना दिया. गाना सुपरहिट हुआ और रातोंरात केके बॉलीवुड के मशहूर गायकों में शामिल हो गए.

साल 1999 में सोनी म्यूजिक ने केके का पहला सोलो एल्बम ‘पल’ रिलीज किया. इस एल्बम के दो गाने ‘पल’ और ‘यारों’ आज भी हर फेयरवेल और दोस्तों की महफिल का हिस्सा हैं. केके उन चुनिंदा गायकों में थे जिनकी आवाज हर तरह के गीतों में फिट बैठती थी. रोमांस हो, दर्द हो, दोस्ती हो या जिंदगी का उत्साह, हर भावना को उन्होंने बखूबी आवाज दी. ‘आंखों में तेरी’, ‘खुदा जाने’, ‘जरा सा’, ‘अलविदा’, ‘तू ही मेरी शब है’, ‘बीते लम्हें’, ‘दिल इबादत’, ‘दस बहाने’ जैसे न जाने कितने गाने आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में शामिल हैं.

उन्होंने सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, मराठी और बंगाली भाषाओं में भी गाया. उन्होंने अपने करियर में 700 से अधिक गाने गाए थे. 31 मई 2022 को कोलकाता के नजरुल मंच में एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान केके ने प्रस्तुति दी. शो खत्म होने के कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई. उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. महज 53 साल की उम्र में संगीत की यह जादुई आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई.
