क्रिकेट मैच कई कारणों से रद्द हो सकता है. बारिश आ जाए, तूफान या फिर रोष में आकर फैंस मैदान में घुस आएं या फिर मैदान की लाइट ही चली जाए. ऐसे कई कारणों से मैच रद्द घोषित किया जा सकता है. मगर हम कहें कि एक मुकाबले में पिच इतनी खतरनाक थी कि डर में आकर मैच ही रद्द कर दिया गया, तो क्या आप विश्वास कर पाएंगे.
खतरनाक पिच, तो मैच रद्द
जी हां, ये बात साल 1997 की है, जब खतरनाक पिच होने के कारण मैच रद्द कर दिया गया था. उस साल 25 दिसंबर के दिन इंदौर में भारत और श्रीलंका का मैच खेला जा रहा था. मैच में श्रीलंका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी थी. नई पिच में दरारें साफ देखी जा सकती थीं, जिसमें असामान्य उछाल के कारण बल्लेबाजी कर पाना बहुत मुश्किल हो गया था.
केवल 3 ओवर का खेल हो पाया था, जिसके बाद पिच की जांच हुई, तो दोनों टीमों और अंपायरों ने मिलकर मैच रद्द किए जाने पर सहमति जताई. मैच रद्द होने पर दर्शक इस तरह भड़के कि इंदौर कोर्ट में दोनों टीमों के कप्तान सचिन तेंदुलकर और अर्जुन राणातुंगा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया था. इसमें दलील रखी गई कि खिलाड़ियों ने मिलकर दर्शकों के साथ धोखाधड़ी की.
पिच पर हुआ था बवाल
भारतीय टीम सीरीज का पहला वनडे मैच 7 विकेट से जीत चुकी थी. दूसरे ODI के लिए भारतीय टीम ने घास से ढकी बाउंस वाली पिच की मांग की थी. इसका उद्देश्य श्रीलंकाई बल्लेबाजों को स्ट्रोक लगाने से रोकना था. मगर पिच क्यूरेटर रहे नरेंद्र मेनन ने इसके उलट ऐसी पिच तैयार की, जिसपर बड़े-बड़े क्रैक दूर से ही देखे जा सकते थे. मेनन का दावा था कि यह पिच तेज और स्पिन गेंदबाजी, दोनों के लिए मददगार रहेगी.
इसके बाद भारतीय टीम मैनेजमेंट ने दूसरी पिच तैयार करने की मांग की. टीम मैनेजमेंट और पिच क्यूरेटर, नरेंद्र मेनन के बीच खूब बहस हुई, जिसके बाद दूसरी पिच को तैयार करने के लिए उसपर पानी डाला गया. अभी दूसरी पिच तैयार करने की प्रक्रिया ज्यादा आगे नहीं बढ़ी थी, तभी श्रीलंकाई टीम मैदान में आ गई. पिच बदलने को लेकर श्रीलंका टीम ने कड़ी आपत्ति जताई और शिकायत के बाद मैच रेफरी रहे अहमद इब्राहिम ने पहली वाली पिच पर मैच खेले जाने का आदेश दिया था, जिसपर बड़े-बड़े क्रैक दिख रहे थे.
बाद में मैच के दौरान मैदान पर जो हुआ, वो सबके सामने था. नतीजन खतरनाक पिच को कारण बताकर भारत बनाम श्रीलंका वनडे मैच को रद्द कर दिया गया था.
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