April 9, 2026
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47 thoughts on “Bihar Election Result: Nitish Kumar क्यों जीते, Tejashwi Yadav के हार की वजह | Raghopur | Rajdhani

  1. तनिक याद कीजिये, आपने राजद के चुनाव प्रचार में अबकी कितनी बार कर्पूरी ठाकुर, राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण आदि समाजवादी प्रतीकों की चर्चा सुनी? ध्यान से देखेंगे तो दिखेगा, इस बार राजद के प्रवक्ताओं ने इनसे अधिक फूले, पेरियार और बाबा साहब अंबेडकर की चर्चा की है। यह कैसे हुआ और क्यों हुआ, क्या कोई सोच रहा है?
    ऐसा यूँ ही नहीं हुआ है। कम्युनिस्ट पार्टियों के साथ गठबंधन और जेएनयू छाप प्रवक्ताओं ने कब पार्टी के टोन को समाजवाद से दलितवाद पर शिप्ट कर दिया, यह किसी को पता भी नहीं चला।
    जिन लोगों ने लालू प्रसाद यादव के समय के राजद को देखा है, उन्होंने देखा होगा कि धर्मनिरपेक्षता के दावे के बाद भी पार्टी ने धार्मिक और सामाजिक परम्पराओं का विरोध नहीं किया था। छठ के समय मुख्यमंत्री अपने माथे पर डाला लेकर निकलते और यह अखबारों के पहले पन्ने पर छपता था। मुख्यमंत्री रहते समय राबड़ी देवी की ठेकुआ खजूर बनाते हुए तस्वीर छपती थी। पटना में मकर संक्रांति का भोज हो या होली मिलन का आयोजन, लालू प्रसाद यादव छाए रहते थे। कुल मिला कर बात यह कि उनका ऊँची जातियों से भले विरोध रहा हो, पर पार्टी का टोन धर्म विरोध का नहीं था।
    अबकी क्या हुआ? राजद के प्रवक्ता लोग कहीं मनुस्मृति फाड़ रहे थे, कहीं ब्राह्मणवाद को गाली दे रहे थे, कहीं ब्राह्मणों को भिखमंगा बता रहे थे। स्पष्ट कहें तो वे उस शब्दावली के साथ उतरे थे, जो उनकी नहीं बल्कि पुरानी बसपा या आज की भीम आर्मी की है।
    अब प्रश्न है कि क्या इस शब्दावली की स्वीकार्यता पिछड़ा वर्ग में है? दूसरे को छोड़िये, क्या सामान्य गृहस्थ यादव वर्ग ही इस भाषा को एक्सेप्ट करता है। ईमानदारी से सोचेंगे तो उत्तर नहीं में मिलेगा। अपने दैनिक जीवन में यादव वर्ग भी उतना ही धर्मिक है जितना अन्य हिन्दू समाज, बल्कि कहीं कहीं तो अन्य से अधिक स्पष्ट, अधिक समर्पित… चुनाव के समय को निकाल दीजिये तो यह वर्ग भी अपने सामान्य व्यवहार में तथाकथित ब्राह्मणवाद के साथ ही खड़ा मिलता है।
    राजद के नए प्रवक्ताओं ने इस बार जो अपना टोन रखा, उसकी स्वीकार्यता बिहार में अब भी दो ढाई प्रतिशत लोगों में ही होगी। आप छठपूजा के विरुद्ध दिए गए बयान का समर्थन करेंगे, आप राममंदिर के विरुद्ध बोलेंगे तो आपका अपना वोटबैंक भी नाराज होगा। और रही फायदे की बात, तो उसे इस बात से समझ लीजिये कि बिहार में बसपा की एक सीट निकली है, और अधिकांश जगहों पर उसके प्रत्याशी को जनसुराज से अधिक वोट मिले हैं। मतलब जिस वोटबैंक को रिझाने के लिए आप लड़े थे, वह भाजपा के साथ नहीं है तो आपके साथ भी नहीं है।
    तो दोस्त! एक खेल तो यहाँ भी हुआ ही है। राजद के नुकसान में इसकी भी कोई कम भूमिका नहीं है। अब उसके समर्थक दिमाग लगाएं कि यह हुआ तो हुआ कैसे? बाकी तो जो है सो है ही… है कि नहीं?

    मोतीझील वाले बाबा।

  2. अनंत सिंह जीत गया भाई जी,,आपकी गार्ड में मिर्ची तो बहुत लगी होगी।

  3. दल्ला रिपोर्टर है ये…. चुनाव आयोग 10000 बाँटने का परमिशन कैसे दिया, ये सवाल नहीं किया एक बार भी…

  4. जो चाराचोर छठ पूजा को फालतू कहे एव फालतू नकली भूत पिशाच बनकर हेलोवीन मनावे उस परिवार को कौन समर्थन करेगा ?

  5. Is chunav se ek baat pata chali ki opposition mein 3 leader jisme Akhilesh, Tejasvi, Rahul Gandhi hain.
    In sab me se Akhilesh Yadav ke pass hi vision, planning and well connected to rural areas hai.
    Wo hi lop hona chahiye tabhi INDIA alliance kuch karega 😊😊😊😊

  6. जय भीम, जय भारत!

    "जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी" —>

    कोटा केवल बाबा साहेब के अनुसार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए होना चाहिए था। ओबीसी कोटा गलत है।

    आज SC और OBC कोटे का लाभ ज़्यादातर संपन्न वर्गों तक सीमित हो गया है और वंचित समुदायों जैसे मुसहरों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा — यह कई सामाजिक और प्रशासनिक स्तरों पर चिंता का विषय है।

    मुसहर समुदाय को अनुसूचित जाति (SC) कोटे का कोई लाभ क्यों नहीं मिला?

    Reservation बढ़ाना क्यों कुछ OBC में जाती निकाल कर general कैटोगरी में डालो ….75 साल में कोई पिछड़ा आगरा क्यों नहीं बन पाया …सभी जाती को पिछड़ा ही क्यों बनना है ….. गजब देश है भाई सबको पिछड़ा ही बनना है …50% आरक्षण लेकर और 75 साल तक लेकर जो समाज आगे नहीं बढ़ सका वह समाज कभी भी आगे नहीं बढ़ सकेगा चाहे उसे आप 100% आरक्षण दे दो .आरक्षण ठीक है और बिलकुल होना चाहिए परंतु, हर कोटे के सिर्फ और सिर्फ वांचितो को जिसने आरक्षण के बाल पर अपनी आर्थिक स्थिति को सुधार लिया है उसे जनरल में कर देना चाहिए, तभी सभी को न्याय मिल पाएगा..कोटा फिक्स रहेगा तो कोई किसी का हक भी कोई दूसरा नहीं खा पाएगा..माजुदा सिस्टम असल में आरक्षण का हक अपनी ही जाति के समृद्ध लोग अपने ही जाति के दरिद्र लोगों का हक खा रहा है..

    मई तो कहता को ही इस हिसाब से तो मुस्लिम तबका इसी अनुपात में अब विधानसभा या मंत्रिमंडल में सीटों की मांग करेगा और मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री मुसलमान होना चाहिए , उनको आबादी २०% है पुरे देश में। .. मुसलमानो भाइयो को माग करना चाहिए अब और इंकलाब भी। .. मुस्लिम जाति की आबादी यादव से अधिक है तो मुस्लिम और मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री मुसलमान होना चाहिए पुरे देश में .

    जाती आबादी के हिसाब से तो Akil less को CM नहीं , दलित और मुसलमान को होना चाहिए। . और जो अहीर या कोई ज्यादा बिद्यायक है वो इस्तीफा दे

    गैर यादव जाति अर्थात कुर्मी कोइरी राजभर चौहान पाल प्रजापति गौड़ खटीक निषाद केवट मल्लाह धोबी समाज के पैसे वाले लोगों के बच्चों को अब राजनीति ख्वाहिश पूरी करने की चूल होती हैं और फिर यह रास्ता यादों गैंग के जाल में ले कर जाता है ❤❤

    बस यही से दुर्भाग्य की घड़ी शुरू हो जाती है 🤔 बिहार के लोगों में जाति का जहर घोल दिया। क्या मुलायम सिंह यादव और लालू यादव के बच्चे ही मुख्यमंत्री बनेंगे ? गरीब घर के बच्चे कहां जाएंगे ? गरीबों की बात करते हैं तो गरीबों को मौका भी मिलना चाहिए।

  7. नीतिश कुमार ठीक आदमी है, रेल मंत्री रहते दुर्घटना होने पर जिम्मेदारी के नाते इस्तीफा दे दिया था

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