March 21, 2026
eid-8-2026-03-61ad575906edd6901956b72c846f3d2a-1200x630.jpg
Spread the love


Eid Ul Fitr 2026 Today: देशभर में आज खुशी और भाईचारे का पर्व ईद-उल-फितर बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. एक महीने के रोज़ों के बाद इस दिन लोग मस्जिदों में नमाज अदा करते हैं, गले मिलते हैं और एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हैं. मस्जिदों और ईदागाह में पहले ही ईद की नमाज का समय तय किया जा चुका है. ईद के दिन की शुरुआत विशेष नमाज से होती है, जिसे ‘ईद की नमाज’ कहते हैं. इसे खुली जगहों पर या मस्जिदों में अदा किया जाता है. नमाज के बाद लोग एक-दूसरे से गले मिलते हैं और ईद मुबारक कहते हैं. इस दिन नए कपड़े पहनने का रिवाज होता है और हर घर में विशेष पकवान बनाए जाते हैं. इस दिन जकात और फितरा देने का भी विशेष महत्व है. आइए जानते हैं दोनों के बीच क्या है अंतर…

आज देशभर में खुशियों का दिन
ईद का दिन मुस्लिम समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. ईद का त्योहार रमजान के पवित्र महीने के अंत में मनाया जाता है, जिसमें पूरे महीने रोजे रखे जाते हैं. यह दिन खुशी और भाईचारे का प्रतीक होता है, जब लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियां बांटते हैं. ईद का दिन गरीबों और जरुरतमंदों के प्रति दया और सहायता का भी संदेश देता है. इस दिन जकात और फितरा देना एक मुख्य धार्मिक कर्तव्य माना जाता है. इनका उद्देश्य समाज के गरीब और जरुरतमंद लोगों की मदद करना है ताकि वे भी ईद की खुशियों में शामिल हो सकें. इस दिन की खुशियां सिर्फ अपने परिवार तक सीमित नहीं होती बल्कि समाज के हर व्यक्ति को इसमें शामिल किया जाता है.

क्या है जकात?
इस्लाम में जकात को फर्ज यानी अनिवार्य दान माना गया है. यह हर उस मुस्लिम पर लागू होता है जिसके पास एक निश्चित सीमा (निसाब) से अधिक संपत्ति होती है. आमतौर पर जकात अपनी कुल बचत का 2.5 प्रतिशत दिया जाता है. यह दान साल में एक बार दिया जाता है और इसका उद्देश्य गरीबों, जरूरतमंदों और समाज के कमजोर वर्ग की मदद करना है.

क्या है फितरा?
फितरा, जिसे सदका-ए-फित्र भी कहा जाता है, हर मुस्लिम के लिए अनिवार्य है, चाहे वह अमीर हो या गरीब (अगर वह अपनी जरूरतों से थोड़ा भी अधिक रखता है). फितरा ईद की नमाज से पहले दिया जाता है ताकि जरूरतमंद लोग भी इस त्योहार की खुशियों में शामिल हो सकें. इसकी राशि आमतौर पर एक व्यक्ति के एक दिन के भोजन के बराबर मानी जाती है, जो भारत में लगभग 70 से 150 रुपये या उससे अधिक हो सकती है, स्थानीय स्थिति के अनुसार.

जकात और फितरा में अंतर
जकात और फितरा के बीच सबसे बड़ा अंतर इनके उद्देश्य और समय में है. जकात साल में एक बार दी जाती है और यह आर्थिक संतुलन बनाने का एक माध्यम है, जबकि फितरा खास तौर पर ईद-उल-फितर से पहले दिया जाता है ताकि कोई भी व्यक्ति त्योहार के दिन भूखा ना रहे.

जकात और फितरा का महत्व
जकात और फितरा दोनों ही समाज में समानता, भाईचारे और सहानुभूति को बढ़ावा देते हैं. यह इस्लाम की उस भावना को दर्शाते हैं, जिसमें हर व्यक्ति को दूसरों की मदद करने के लिए प्रेरित किया जाता है. देश के विभिन्न हिस्सों जैसे दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद और मुंबई में मस्जिदों के बाहर जरूरतमंदों को जकात और फितरा बांटने का सिलसिला सुबह से ही जारी है. जकात और फितरा के माध्यम से यह त्योहार जरूरतमंदों के चेहरों पर भी मुस्कान लाने का काम करता है.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Notifications OK No thanks