मुंबई. ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ बॉक्स ऑफिस पर 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा का कलेक्शन महज 8 दिनों में कर चुकी है. फिल्म अपने किरदार, डायलॉग्स और कहानी को लेकर लगतार चर्चा में बनी हुई है. ‘धुरंधर 2’ की जबरदस्त सफलता के बीच एक दिलचस्प बहस छिड़ गई है. एक्टर-डायरेक्टर दीपक तिजोरी ने ‘धुरंधरः द रिवेंज’ को दिल वाले इमोजी के साथ पोस्ट किया और बेहतरीन बताया है. इसके साथ ही उन्होंने फिल्मों के थिएटर रिलीज और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर दिखाए जाने के तरीके को लेकर आपत्ति जताई और सवाल उठाए हैं. उन्होंने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया और थिएटर वर्जन में गालियों को आधा-अधूरा म्यूट करने के लॉजिक पर सवाल उठाया.
दीपक तिजोरी ने कहा कि कुछ गालियां आधी म्यूट की जाती हैं, कुछ को वैसे ही छोड़ दिया जाता है और कुछ को पूरी तरह हटा दिया जाता है, आखिर ऐसा क्यों? उन्होंने लिखा, “शायद मेरे पास वो समझ नहीं है जो सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) या उसके बोर्ड मेंबर्स के पास है. क्योंकि मुझे सच में समझ नहीं आता– आधी गालियां म्यूट क्यों करते हैं और बाकी रहने देते हैं? कहीं कुछ रखते हैं, कहीं पूरी तरह म्यूट कर देते हैं?”
दीपक तिजोरी का इंस्टाग्राम पोस्ट.
दीपक तिजोरी ने आगे लिखा कि जब फिल्म को ‘A’ सर्टिफिकेट मिल चुका है, यानी ये सिर्फ एडल्ट्स के लिए है, तो फिर इस तरह की सेंसरशिप का क्या मतलब? उन्होंने लिखा, “खासकर जब फिल्म को 18 प्लस सर्टिफाइड किया गया है, तो साफ है कि ये बड़ों के लिए है. तो हम आखिर किसे और किससे बचा रहे हैं… आधे शब्द से?”
दीपक तिजोरी ने फिल्म के थिएटर और डिटिजल वर्जन पर जताई आपत्ति
दीपक तिजोरी को सबसे ज्यादा परेशानी थिएटर और डिजिटल वर्जन के फर्क से है. उन्होंने बताया कि बिना कटे और बिना सेंसर किए गए वर्जन आखिरकार ओटीटी पर आ ही जाते हैं, जिससे पहले की गई सेंसरशिप का कोई मतलब नहीं रह जाता. उन्होंने लिखा, “और फिर वो हिस्सा आता है जो मुझे सबसे ज्यादा कन्फ्यूज करता है – वही फिल्म, एक-दो महीने में ओटीटी पर आ जाती है… पूरी तरह अनम्यूटेड… जैसी बनाई गई थी वैसी ही.”
दीपक तिजोरी ने ओटीटी पर बच्चों के देखने पर भी उठाए सवाल
दीपक तिजोरी ने लिखा,”और वहीं बच्चे उसे घर पर, परिवार के साथ बैठकर, सबकुछ साफ-साफ सुनते हैं. तो मैं बस ये समझना चाहता हूं – क्या वाकई समझदारी है थिएटर में बड़ों के लिए कुछ आधा म्यूट करने की, जब वही चीज घर में पूरी आवाज के साथ चलती है? शायद इसमें कोई लॉजिक है जो मैं नहीं समझ पा रहा… या फिर, हो सकता है हम गलत चीजों पर ज्यादा सोच रहे हैं.”
‘धुरंधर 2’ में सीबीएफसी ने करवाए थे 21 बदलाव
सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के मुताबिक, ‘धुरंधर 2’ को रिलीज से पहले कई बदलावों से गुजरना पड़ा. 21 सुझाए गए बदलावों में से चार बड़े बदलावों में हिंसा के सीन कम करना शामिल था, जैसे आंख फोड़ना, सिर काटना और जोरदार हमले. इसके अलावा, सबटाइटल में नोटबंदी की तारीखें सही की गईं और “लाहौर” की जगह “दिल्ली” शब्द डाला गया. फिल्म को ‘A’ सर्टिफिकेट मिला है और भारत में इसकी फाइनल रनटाइम 3 घंटे 49 मिनट 36 सेकंड है. भारतीय दर्शकों के लिए पास की गई फिल्म, बोर्ड के कट्स के बाद, ओवरसीज वर्जन से छह मिनट से ज्यादा छोटी है.
