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अनुराग कश्यप की फिल्मों का रिलीज से पहले चर्चाओं में आना आम बात है. बेबाक सोच और अलग तरह की कहानी कहने के चलते उन्हें कई बार रुकावटों का सामना करना पड़ा. इन्हीं मुश्किलों के बीच उन्होंने एक ऐसी फिल्म बनाई थी, जिसे पूरा होने में आठ साल लग गए थे. रिलीज के वक्त भले ही वह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल नहीं दिखा सकी. लेकिन फिर भी कल्ट साबित हुई.

नई दिल्ली. अनुराग कश्यप की फिल्मों की कहानी लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया करती हैं. साल 2009 में तो उनकी एक ऐसी फिल्म ने सिनेमाघरों में दस्तक दी थी, जिसे बनने में 8 साल लग गए थे.फिर भी रिलीज के बाद फिल्म कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी. लेकिन वक्त के साथ उसने कल्ट क्लासिक का दर्जा हासिल कर लिया.

अनुराग कश्यप उन चुनिंदा फिल्ममेकर में से एक रहे हैं जो, सेफ खेलना पसंद नहीं करते. उनकी फिल्मों में दिखाई गई कहानी बड़ी आसानी से सिनेमाघरों तक नहीं पहुंचती. कई बार तो उनकी फिल्में देख दर्शक सोचने पर मजबूर हो जाते हैं.

अनुराग की फिल्में सिस्टम को भी असहज कर देती है. यही वजह है कि अक्सर सेंसर बोर्ड के साथ उनका विवाद बना रहता है. उनकी फिल्मों को अक्सर सिनेमाघरों में दस्तक देने से पहले आपत्तियों का सामना करना पड़ता है.
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अनुराग कश्यप अपनी जिद और जुनून के आगे कभी पीछे भी हीं हटते. उनकी इसी के चलते मिसाल भी दी जाती है, फिल्म गुलाल भी उन्हीं में से एक है. हमबात कर रहे हैं, अनुराग कश्यप की फिल्म गुलाल की. जिसे बनने में आठ साल लगे थे. फिल्म काफी विवादों के बाद रिलीज भी हुई तो कुछ खास कमाल नहीं दिख सकी थी.

फिल्ममेकर की फिल्म गुलाल को आज भी कल्ट फिल्मों में गिना जाता है. फिल्म में राज सिंह चौधरी, केके मेनन, अभिमन्यु सिंह और आदित्य श्रीवास्तव जैसे एक्टर्स ने अपने किरदारों में जान फूंक दी थी. फिल्म की शूटिंग साल 2001 में शुरू हुई थी, लेकिन फिल्म को बनते बनते आठ साल लग गए और 2009 में रिलीज हुई.

इससे पहले अनुराग कश्यप की फिल्म पांच आईं, लेकिन फिल्मों को उनके कंटेंट की वजह से सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिला था. इस उसी तनाव ने गुलाल बनाने का आइडिया मिला था.इस दौरान कश्यप , राजा चौधरी से मिले, राजा एक पार्ट टाइम मॉडल थे. जिनके साथ मिलकर वह जयपुर गए और वहां तीनों ने कई शाही परिवारों से मिलकर राजनीति को लेकर उनकी नाराजगी को करीब से समझा.

फिल्म गुलाल के म्यूजिक ने भी फिल्म को खास बनाया है. ये फिल्म गुरु दत्त की फिल्म प्यासा के गानों से काफी प्रभावित थे. स्क्रिप्ट के दौरान पियूष ने अपने गीत उन्हें सुनाए थे,वह इतना इंप्रेस हुए थे कि फिल्म का संगीत उन्हें ही सौंप दिया गया था.फिल्म की शूटिंग से 20 दिन पहले ही आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ा था. इसलिए अनुराग ने हनुमान और देव.डी जैसी फिल्में लेकर आए. इसके बाद किसी तरह गुलाल का काम कंप्लीट हुआ था.

बता दें कि साल 2009 में सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली फिल्म गुलाल, रिलीज होने के बाद बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई थी. लेकिन धीरे धीरे इसने अपनी अलग पहचान बनाई और IMDb पर फिल्म की रेटिंग 8 दी गई है. देखते ही देखते ये फिल्म कल्ट साबित हुई.
