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आज के दौर में बॉलीवुड हीरो की एंट्री के साथ ही शर्टलेस होकर सिक्स-पैक एब्स दिखाना आम बात हो गई है. सलमान खान, ऋतिक रोशन या जॉन अब्राहम को इस ट्रेंड का अगुआ माना जाता है, लेकिन असलियत में यह क्रेडिट किसी और को जाता है. ये वो एक्टर हैं, जो 80 के दशक से जलवा दिखा रहे हैं और आज भी उनकी एक्टिंग को देख लोग दांतों तले अंगुलि दबे लेते हैं.

नई दिल्ली. आज के दौर में जब भी बॉलीवुड में सिक्स-पैक एब्स की बात होती है तो सबसे पहले सलमान खान, ऋतिक रोशन या जॉन अब्राहम जैसे सितारों का नाम लिया जाता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि हिंदी सिनेमा में सिक्स-पैक का ट्रेंड इन सितारों से कई दशक पहले ही शुरू हो चुका था. दरअसल 1980 के दशक में एक नेशनल अवॉर्ड जीत चुके एक्टर ने अपनी फिल्म में पहली बार सिक्स-पैक एब्स दिखाकर दर्शकों को चौंका दिया था.

ये उस दौर की बात है, जब न तो आधुनिक जिम थे और न ही पर्सनल ट्रेनर, फिर भी उन्होंने अनुशासन और सादी डाइट से यह फिटनेस हासिल की थी. आज भले ही नए स्टार्स फिटनेस आइकन बन चुके हों, लेकिन इस ट्रेंड की असली शुरुआत उसी दिग्गज एक्टर से मानी जाती है, क्या आप जानते हैं वो एक्टर कौन हैं.

दरअसल, हिंदी सिनेमा में सिक्स-पैक एब्स दिखाने का श्रेय दिग्गज एक्टर नसीरुद्दीन शाह को जाता है.उन्होंने 1987 में आई फिल्म ‘जलवा’ में अपने सिक्स-पैक एब्स दिखाकर दर्शकों को चौंका दिया था. उस दौर में बॉलीवुड में इस तरह की फिटनेस और बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन बहुत कम देखने को मिलती थी.
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फिल्म ‘जलवा’ में नसीरुद्दीन शाह ने एक सीआईडी अधिकारी का किरदार निभाया था. इस फिल्म का निर्देशन पंकज पाराशर ने किया था. फिल्म में उनके एब्स साफ नजर आते थे, जो उस समय के दर्शकों और फिल्म निर्माताओं के लिए काफी हैरान करने वाला था.

इस फिल्म के लिए उन्होंने जो फिजिक बनाई, वह उस जमाने के हिसाब से क्रांतिकारी थी. नसीरुद्दीन शाह से पहले दारा सिंह और धर्मेंद्र जैसे अभिनेता अपनी मजबूत कद-काठी के लिए जाने जाते थे, लेकिन सिक्स-पैक एब्स सिर्फ बॉडी बिल्डिंग कॉम्पिटिशन तक सीमित थे.

सबसे दिलचस्प बात यह है कि नसीरुद्दीन शाह ने यह फिजिक बिना किसी पर्सनल ट्रेनर या हाई-टेक जिम के बनाई थी। उनके पास न तो आज के जैसे ट्रेनर थे और न ही व्हे प्रोटीन जैसे सप्लीमेंट्स. डायरेक्टर संजय गुप्ता ने एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘जलवा’ की शूटिंग के दौरान वह अक्सर नसीर के कमरे में जाते थे.वहां उन्होंने देखा कि नसीर लंच में सिर्फ तीन बड़े तंदूरी पॉम्फ्रेट (मछली), दो रोटी और सब्जी खाते थे. उनकी यह डाइट प्रोटीन, कार्ब्स और फाइबर का परफेक्ट कॉम्बिनेशन थी.

सिक्स-पैक ट्रेंड शुरू करने के बावजूद, नसीरुद्दीन शाह हमेशा से कहते आए हैं कि स्टार्स को फिजिक से ज्यादा परफॉर्मेंस पर ध्यान देना चाहिए. उनका मानना है कि मजबूत शरीर को कभी भी मजबूत अभिनय पर हावी नहीं होने देना चाहिए.

हालांकि 90 के दशक में मिलिंद सोमन और राहुल देव जैसे मॉडल्स ने इस ट्रेंड को आगे बढ़ाया, लेकिन सलमान खान ने साल 1998 ‘प्यार किया तो डरना क्या’ और ऋतिक रोशन ने साल 2000 अपनी डेब्यू फिल्म ‘कहो ना प्यार है’ से इसे मेनस्ट्रीम बना दिया.
