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आज से करीब तीन दशक पहले, 1995 में बॉलीवुड के इतिहास में एक ऐसा गाना आया, जिसने न सिर्फ एक पूरी फिल्म को यादगार बना दिया बल्कि माधुरी दीक्षित के करियर को भी एक नई ऊंचाई दी. बात कर रहे हैं फिल्म ‘याराना’ के गाने ‘मेरा पिया घर आया’ की, जो संगीत के जादूगर उस्ताद नुसरत फतेह अली खान की मशहूर कव्वाली से प्रेरित था. एक सूफी कव्वाली, जो आध्यात्मिक मिलन और दिव्य प्रेम की अभिव्यक्ति थी, बॉलीवुड की चकाचौंध भरी दुनिया में आइटम नंबर बनकर रातोंरात माधुरी को सुपरस्टार बना गया.

नई दिल्ली. 90 के दशक में बॉलीवुड में ऐसे कई गाने आए, जिन्होंने फिल्मों से ज्यादा लोकप्रियता हासिल की. लेकिन कुछ गाने ऐसे भी रहे, जिन्होंने कलाकारों की पूरी किस्मत बदल दी. फिल्म याराना का गाना ‘मेरा पिया घर आया’ उन्हीं में से एक है. यह सिर्फ एक सुपरहिट डांस नंबर नहीं था, बल्कि वही गाना था जिसने माधुरी दीक्षित को फ्लॉप फिल्मों की कतार से निकालकर बॉलीवुड की सबसे बड़ी स्टार बना दिया. दिलचस्प बात यह है कि इस गाने की जड़ें सीधे उस्ताद नुसरत फतेह अली खान की मशहूर कव्वाली ‘मेरा पिया घर आया ओ लाल नी’ से जुड़ी थीं.

गाने की मूल रचना सूफी संत बाबा बुल्ले शाह ने 18वीं सदी में लिखी थी. यह एक पंजाबी सूफी कविता है, जिसे बाबा बुल्ले शाह ने अपने गुरु शाह इनायत कादरी के लौटने पर लिखा था. 1991 में उस्ताद नुसरत फतेह अली खान ने इस पर अपनी आवाज और संगीत की जादूगरी भरी और इसे एक अमर कव्वाली का रूप दे दिया, जो आज भी उनकी सबसे मशहूर रचनाओं में गिनी जाती है.

नुसरत फतेह अली खान की कव्वाली में ‘पिया’ का मतलब आध्यात्मिक गुरु या ईश्वर से है. ये मानवीय आत्मा की उस दिव्य प्रेमी से मिलन की खुशी है, जहां दर्द, इंतजार और वियोग के बाद आनंद की बरसात होती है. नुसरत साहब की आवाज में ये गाना ऊर्जा, आध्यात्मिक उन्माद और भावुकता से भरा होता था. ‘आओ नी सैयों रल देयो नी वधाई, मैं वार पाया सोहणा माही… मेरा पिया घर आया ओ लाल नी’ ये पंक्तियां श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती थीं.
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डेविड धवन की फिल्म ‘याराना’में जब इस धुन और भाव को इस्तेमाल करने का विचार आया, तब इसे पूरी तरह फिल्मी अंदाज में ढाल दिया गया. ‘याराना’ के लिए संगीतकार अनु मलिक ने इसे तेज बीट्स, ढोल और बॉलीवुड स्टाइल ऑर्केस्ट्रा के साथ तैयार किया. गाने की आत्मा सूफियाना रही, लेकिन प्रस्तुति पूरी तरह मसालेदार और ग्लैमरस बना दी गई. अनु मलिक ने भारतीय सिनेमा के परदे पर इस धुन का इस्तेमाल किया. हालांकि, अक्सर इसे मूल कव्वाली की ‘नकल’ करार दिया जाता है.

कविता कृष्णमूर्ति की आवाज में गाना अधिक उत्साहित, नाचने लायक और दर्शकों को आकर्षित करने वाला बना. माधुरी दीक्षित की कटाक्ष भरी नजरें, घूंघरू, रंग-बिरंगे कपड़े और एनर्जेटिक कोरियोग्राफी ने इसे प्योर एंटरटेनमेंट का पैकेज बना दिया. यही वजह थी कि दोनों गानों में एक समान भाव होने के बावजूद उनका असर अलग नजर आया. नुसरत साहब की कव्वाली जहां आध्यात्मिक और सूफी माहौल पैदा करती थी, वहीं ‘मेरा पिया घर आया’ बड़े पर्दे पर जश्न और ग्लैमर का प्रतीक बन गया.

क्या आप जानते हैं कि उस समय तक माधुरी दीक्षित के ऊपर बॉक्स ऑफिस पर ‘फ्लॉप एक्ट्रेस’ का ठप्पा लग चुका था. उनकी शुरुआती फिल्में ‘अबोध’, ‘मानव हत्या’, ‘हिफाजत’, ‘स्वाति’ और ‘उत्तर दक्षिण’ लगातार फ्लॉप रही थीं. कई स्टार्स के साथ उनकी फिल्में असफल होने के बाद उन्हें ‘मनहूस’ तक कहने लगे थे. फिर आया याराना का यह गाना… फिल्म में इसे लगभग एक आइटम नंबर की तरह इस्तेमाल किया गया था. उस दौर में ‘आइटम नंबर’ शब्द इतना प्रचलित नहीं था, लेकिन यह गाना उसी फॉर्मेट का माना गया.

माधुरी दीक्षित ने लाल रंग की चमकदार ड्रेस में जिस तरह स्क्रीन पर डांस किया, उसने दर्शकों को दीवाना बना दिया.उनके एक्सप्रेशंस, एनर्जी और डांस मूव्स इतने लोकप्रिय हुए कि गाना फिल्म से बड़ा बन गया. शादी-ब्याह से लेकर स्टेज शो तक हर जगह यही गाना बजने लगा. हालांकि ‘तेजाब’ (1988) जैसी फिल्मों ने उन्हें पहचान तो दी, लेकिन सुपरस्टार का दर्जा हासिल करने के लिए उन्हें एक ऐसे धमाकेदार गाने की जरूरत थी, जो दर्शकों का दिल जीत ले. इस गाने के बाद निर्माता-निर्देशक माधुरी को सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भीड़ खींचने वाली स्टार मानने लगे. यही वह दौर था जब उनके करियर ने तेज रफ्तार पकड़ ली.

फिल्म याराना की बात करें तो फिल्म का बजट लगभग 4.75 करोड़ रुपेय था. फिल्म ने वर्ल्डवाइड कलेक्शन करीब 9 से 10 करोड़ रुपये के बीच किया था. जिसमें इंडियन नेट करीब 8.68 करोड़ था. यानी फिल्म ने लागत निकाल ली, लेकिन इसे ब्लॉकबस्टर का दर्जा नहीं मिला. इसके बावजूद ‘मेरा पिया घर आया’ इतना बड़ा हिट साबित हुआ कि आज भी लोग फिल्म को सबसे ज्यादा इसी गाने की वजह से याद करते हैं. फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में कविता कृष्णमूर्ति को बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड मिला और माधुरी को बेस्ट एक्ट्रेस के लिए नॉमिनेशन हासिल किया था.

करीब तीन दशक बाद भी ‘मेरा पिया घर आया’ का क्रेज कम नहीं हुआ है. रियलिटी शोज, शादियों और सोशल मीडिया रील्स में यह गाना आज भी सुनाई देता है. नई पीढ़ी शायद यह न जानती हो कि इसकी प्रेरणा नुसरत फतेह अली खान की कव्वाली से आई थी, लेकिन दोनों गानों का अपना अलग इतिहास और महत्व है. एक तरफ नुसरत साहब की आवाज ने सूफी संगीत को दुनिया भर में नई पहचान दी, तो दूसरी तरफ उसी भाव पर बने बॉलीवुड गाने ने माधुरी दीक्षित को रातोंरात सुपरस्टार बना दिया. यही वजह है कि ‘मेरा पिया घर आया’ सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि बॉलीवुड के इतिहास का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जाता है.
