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बॉबी देओल ने सिनेमा में जब अपनी दूसरी पारी की शुरुआत की, तब सीरीज ‘आश्रम’ का उनका करियर चमकाने में बड़ा रोल था. उन्होंने क्राइम थ्रिलर ‘क्लास ऑफ 83’ से पहले ही अपनी क्लास दिखा दी थी. मगर उन्हें उम्मीद नहीं थी कि प्रकाश झा उन्हें बाबा निराला का जटिल किरदार ऑफर कर देंगे. वे सोच रहे थे कि उन्हें पुलिसवाले का रोल मिलेगा. बॉबी देओल ने ‘न्यूज 18 इंडिया’ से खास बातचीत में अपने उस किरदार के बारे में खुलकर बात की, जिसने उनका करियर चमका दिया था.

नई दिल्ली: बॉबी देओल ने अपने करियर की शुरुआत हीरो के तौर पर की थी, मगर दूसरी पारी में उन्हें दर्शकों ने विलेन के रोल में ज्यादा पसंद किया. सीरीज ‘आश्रम’ में निभाया बाबा निराला का रोल भला कौन भूल सकता है. वे अब फिल्म ‘बंदर’ में नजर आएंगे, जो 5 जून को रिलीज होगी. वे 15-17 साल बाद सोलो लीड रोल में नजर आएंगे. उन्होंने न्यूज18 इंडिया से खास बातचीत में अपने कमबैक और बाबा निराला के किरदार पर बात की.

बॉबी देओल ने अपने करियर पर ध्यान दिलाते हुए कहा, ‘मुझे इंडस्ट्री में 30 साल हो गए हैं, पर फैंस का प्यार कभी कम नहीं हुआ. लोग पूछते थे कि फिल्म कब आएगी? मेरे पास कोई जवाब नहीं था. फिल्में जो मिल रही थीं, वो दिलचस्प नहीं थीं. बीच में फिल्में कीं, क्योंकि घर चलाना पड़ता है. मैंने निर्णय किया कि ऐसे रोल निभाऊं, जो मेरे कम्फर्ट जोन से बाहर हों, जिसमें आप सोचेंगे नहीं कि बॉबी देओल को लेना है. मगर भगवान ने मुझ पर रहम किया.’

बॉबी देओल के करियर पर ओटीटी प्रोजेक्ट ने गहरा असर डाला. उन्होंने याद करते हुए कहा, ‘क्लास ऑफ 83 में मैंने बुजुर्ग का रोल निभाया, जिसका बेटा है. वह ग्रांड फादर बन जाता है. वह मुश्किल रोल था. लोगों ने मुझे कभी ऐसे रोल में इमेजिन नहीं किया था. पहले आप नर्वस होते हैं कि कर पाऊंगा या नहीं. वह हीरो का वाला रोल था.
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बॉबी देओल के विलेन बनने की शुरुआत सीरीज ‘आश्रम’ से हुई. वे बोले, ‘फिर ‘आश्रम’ ऑफर हुई. मैं हैरान था. मुझे लगा कि पुलिसवाले का रोल मिलेगा, मगर प्रकाश झा ने कहा कि तू बाबा निराला का रोल निभाएगा. थोड़ी देर के लिए मैं वहां रुक गया. सोचा कि मैंने सही सुना है उनसे.’

बॉबी ने ‘बाबा निराला’ का किरदार करने की बात घर पर नहीं बताई थी. उन्होंने इस किरदार पर कहा, ‘यह बड़ा चैलेंज था. ऐसा किरदार, जिसके बारे में मैंने सोचा नहीं था. उसके तौर-तरीके कैसे होंगे? मगर यही तो एक्टर होने की खास बात है. आप अलग-अलग किरदार प्ले कर सकते हैं, उन्हें जी सकते हैं.’

बॉबी देओल ने फिर कहा, ‘मैंने बहुत ईमानदारी से वह किरदार निभाया. बहुत मेहनत करनी पड़ी, क्योंकि उसकी लैंग्वेज बहुत मुश्किल थी. दो महीने डिक्शन पर काम किया. मैंने बहुत मेहनत की, इसलिए लोगों ने जब मुझे आश्रम में देखा, तो हैरान रह गए.’

बॉबी देओल ने इस बात की परवाह नहीं की कि उनका किरदार निगेटिव है या पॉजिटिव. वह सिर्फ ऐसे रोल निभाना चाहते हैं, जो दिलचस्प हों. वे बोले, ‘आगे हीरो का किरदार मिलेगा तो करेंगे. मगर हीरो का किरदार लिखना मुश्किल होता है, क्योंकि इसमें ज्यादा शेड्स नहीं होते. मुझे ऐसे हीरो चाहिए, जो असल जिंदगी में होते हैं. हर कोई हर तरीके से अच्छा नहीं हो सकता. सबमें कमियां होती हैं.’

सीरीज ‘आश्रम’ के जरिये बताया गया कि कैसे एक कुटिल धर्मगुरु पर्दे के पीछे नशीली दवाओं, वोट बैंक की राजनीति जैसे आपराधिक और बुरे कामों को बढ़ावा देते हैं. सीरीज में दिखाया गया है कि कानून और कुछ कार्यकर्ता बाबा निराला को सजा दिलाने के लिए कैसी कोशिशें करते हैं.
