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बॉलीवुड की एक ऐसी प्रेम कहानी, जिसकी शुरुआत तो किसी हसीन फिल्म जैसी थी, लेकिन अंत बेहद खौफनाक रहा. जब उस दौर के एक उभरता हुए एक्टर को अपनी को-एक्ट्रेस से इश्क हुआ, तो किसी ने नहीं सोचा था कि धर्म की दीवार उनके बीच पहाड़ बनकर खड़ी हो जाएगी. एक्ट्रेस के रूढ़िवादी परिवार ने इस रिश्ते का ऐसा विरोध किया कि एक्टर को जान से मारने की धमकी तक दी. मजहब की दीवार ने इस मासूम मोहब्बत को बेदर्दी से कुचल दिया.

नई दिल्ली. देव आनंद और सुरैया की मोहब्बत की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. फिल्म विद्या की शूटिंग के दौरान एक हादसे की वजह से दोनों के दिल मिल गए और साथ जीने-मरने की कसमें खाईं, लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद उनका प्यार अधूरा ही रह गया. उस दौर में सुरैया इंडस्ट्री की सुपरस्टार थीं, जबकि देव आनंद अभी अपनी पहचान बनाने की जद्दोजहद में जुटे थे.

देव आनंद और सुरैया की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री सुपरहिट थी और वे साथ में घर बसाना चाहते थे. लेकिन हिंदू-मुस्लिम दीवार और सुरैया के रूढ़िवादी परिवार की जिद ने इस प्रेम कहानी में विलेन का काम किया. हालात यहां तक पहुंच गए थे कि दोनों ने भागकर शादी करने तक का मन बना लिया था.

देव आनंद ने हीरे की अंगूठी खरीदी और सुरैया प्रपोज भी किया. मगर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. सुरैया ने बाद में बताया था कि उनकी नानी और मामा ने देव आनंद को जान से मारने की धमकी दी थी और उन पर रिश्ता तोड़ने का भारी दबाव बनाया था. अंत मे यह अधूरी दास्तान बॉलीवुड के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गई.
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देव आनंद और सुरैया की प्रेम कहानी की शुरुआत साल 1948 में फिल्म विद्या के सेट पर हुई थी. गाने की शूटिंग के दौरान नाव पलट गई और सुरैया गहरे पानी में डूबने लगी थीं. उस वक्त देव आनंद ने अपनी परवाह किए बिना पानी में छलांग लगा दी और सुरैया की जान बचाई. इसी बहादुरी ने सुरैया का दिल जीत लिया और दोनों के बीच प्यार का सिलसिला शुरू हो गया.

उस दौर में सुरैया हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी सुपरस्टार थीं, जबकि देव आनंद फिल्म जगत में अभी अपने कदम जमा ही रहे थे. हैरानी की बात तो यह है कि सुरैया की लोकप्रियता और रसूख इतना था कि वह उस जमाने के कई नामी एक्टर्स से भी ज्यादा फीस लेती थीं. यहां तक कि खुद देव आनंद की कमाई भी सुरैया के मुकाबले उस समय काफी कम हुआ करती थी.

देव आनंद और सुरैया ने साथ में सात फिल्में कीं, लेकिन परदे के पीछे का इनका इश्क कांटों भरा था. सुरैया की नानी की सख्त पहरेदारी के कारण दोनों सीधे बात तक नहीं कर पाते थे, इसलिए वे अपने को-एक्टर्स के जरिए छुप-छुपकर एक-दूसरे को प्रेम पत्र भेजा करते थे. साल 1949 में फिल्म जीत की शूटिंग के दौरान तो दोनों ने भागकर शादी करने का पूरा प्लान बना लिया था, लेकिन आखिरी वक्त पर नानी को इसकी भनक लग गई और उन्होंने इस शादी को रुकवा दिया.

सुरैया को मनाने के लिए देव आनंद ने अपनी तरफ से पूरी जान लगा दी थी. उन्होंने दोस्तों से उधार लेकर 3000 रुपये की हीरे की अंगूठी खरीदी, जो उस जमाने में एक बहुत बड़ी रकम थी और फिर सुरैया को शादी के लिए प्रपोज किया. मगर धर्म की दीवार और परिवार की जिद के आगे ये रिश्ता हार गया. सुरैया ने बाद में खुद बताया था कि उनकी नानी और मामा ने देव आनंद को जान से मारने की धमकी दी थी और उन पर रिश्ता खत्म करने का इतना दबाव बनाया था.

देव आनंद और सुरैया की प्रेम कहानी का अंत वाकई बेहद दर्दनाक रहा. कहा जाता है कि सुरैया की नानी ने एंगेजमेंट रिंग गुस्से में आकर समंदर में फिंकवा दिया था. इस तरह दोनों का रिश्ता हमेशा के लिए खत्म हो गया. देव आनंद से जुदा होने का गम सुरैया कभी भुला नहीं पाईं और उन्होंने ताउम्र कुंवारी रहने का फैसला किया.
