May 26, 2026
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अनामिका या अंगूठा? जानें किस उंगली से सिंदूर लगाने पर चमकती है पति की किस्मत

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Astrological Significance Of Sindoor: शादीशुदा महिलाओं के लिए सिंदूर सिर्फ सजने-संवरने का हिस्सा नहीं, बल्कि सुहाग और शुभता का प्रतीक माना जाता है. लेकिन क्या आप जानती हैं कि किस उंगली से सिंदूर लगाना चाहिए और किससे नहीं? ज्योतिष के मुताबिक अलग-अलग उंगलियों से सिंदूर लगाने के अलग-अलग फल बताए गए हैं. कहीं आप भी गलत उंगली से सिंदूर लगाकर अपने ही सुहाग पर अशुभ प्रभाव तो नहीं डाल रहीं?

सिंदूर

Astrological Significance Of Sindoor: भारतीय परंपरा में सिंदूर सिर्फ शादी का प्रतीक ही नहीं है, बल्कि इसका संबंध शिव-शक्ति से भी जुड़ा हुआ है. जब एक औरत अपनी मांग में सिंदूर लगाती है तो वह एक दैविय ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है. भारतीय संस्कृति में शादी के बाद मांग में सिंदूर लगाने की प्रथा चली आ रही है और हर दिन हिंदू महिलाएं अपनी मांग में सिंदूर भी लगाती हैं. लेकिन बहुत कम लोगों को इस बारे में जानकारी होती है कि किस उंगली से सिंदूर लगाना चाहिए. बहुत से महिलाएं सही जानकारी ना होने की वजह से किसी भी उंगली से सिंदूर लगा लेती हैं लेकिन ऐसा करना पति और परिवार के लिए नुकसान दायक हो सकता है. आइए जानते हैं किस उंगली से सिंदूर लगाने का क्या ज्योतिष अर्थ होता है…

पारंपरिक ज्योतिष के अनुसार, अनामिका उंगली यानी छोटी उंगली के पास वाली उंगली को सिंदूर लगाने के लिए सबसे शुभ माना गया है. यह उंगली ग्रहों के राजा सूर्यदेव से जुड़ी हुई है, जो आत्मविश्वास, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है. माना जाता है कि अनामिका से सिंदूर लगाने से वैवाहिक जीवन में सामंजस्य, सम्मान और स्थिरता आती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होती है.

ज्योतिष में तर्जनी उंगली यानी अंगूठे के पास वाली उंगली का संबंध देवगुरु बृहस्पति से है, जो ज्ञान, आध्यात्मिकता और मार्गदर्शन का प्रतिनिधित्व करते हैं. कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि इस उंगली से सिंदूर लगाने से सोच में स्पष्टता आती है और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है. हालांकि, कई परंपराओं में तर्जनी का इस्तेमाल कम किया जाता है क्योंकि इसे अधिकार और अहंकार से भी जोड़ा जाता है. शत्रु नाश या विशेष कार्यों में सफलता के लिए तिलक लगाते समय इसका प्रयोग होता है, लेकिन सामान्य सिंदूर के लिए इस उंगली का प्रयोग ना ही करें तो बेहतर है.

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मध्यमा उंगली यानी बीच वाली उंगली का संबंध शनि ग्रह से माना जाता है, जो अनुशासन, कर्म और जिम्मेदारियों का प्रतीक है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मध्यमा उंगली का इस्तेमाल सिंदूर लगाने में अच्छा नहीं माना जाता है. मान्यता है कि मध्यमा उंगली से सिंदूर लगाने पर गंभीर या सीमित करने वाली ऊर्जा बढ़ सकती है. शनि एक धीमा और कर्म प्रधान ग्रह हैं, इसलिए शुभ कार्यों में आमतौर पर मध्यमा का इस्तेमाल नहीं किया जाता.

छोटी उंगली का संबंध ग्रहों के राजकुमार बुध ग्रह से है, जो संवाद और बुद्धिमत्ता का प्रतीक हैं. कुछ आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी उंगली से सिंदूर लगाने से भावनाओं की अभिव्यक्ति और मन की शांति में मदद मिलती है. लेकिन पारंपरिक सिंदूर लगाने की विधि में इसका इस्तेमाल कम ही होता है.

अंगूठा शुक्र ग्रह और व्यक्तिगत इच्छाशक्ति का प्रतीक है. आमतौर पर सिंदूर लगाने के लिए अंगूठे का इस्तेमाल नहीं किया जाता, लेकिन कुछ तांत्रिक और आध्यात्मिक परंपराओं में इसे जीवन ऊर्जा और आकर्षण के लिए प्रयोग किया जाता है.

ज्योतिषियों का यह भी मानना है कि माथे पर, खासकर आज्ञा चक्र या तीसरी आंख के पास सिंदूर लगाने से एकाग्रता और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ती है. हिंदू परंपरा में विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं. ये मान्यताएं विज्ञान पर आधारित नहीं हैं बल्कि ज्योतिष और सांस्कृतिक विश्वासों पर आधारित हैं, लेकिन आज भी भारत में कई लोग इन्हें अपनी रोजमर्रा की आध्यात्मिक साधना और परंपराओं में अपनाते हैं.

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