जांच रिपोर्ट की मुख्य बातें:
- शराब का अत्यधिक सेवन: पुलिस की मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे के वक्त जुबिन गर्ग के शरीर में शराब की मात्रा बहुत ज्यादा थी.
- सुरक्षा नियमों की अनदेखी: गवाहों के बयानों और वीडियो सबूतों से पता चला है कि जुबिन गर्ग ने अपनी लाइफ जैकेट यह कहकर उतार दी थी कि वह उन्हें ‘बड़ी’ हो रही थी. जैकेट उतारने के बाद ही उन्होंने समुद्र में छलांग लगा दी थी.
- दोस्तों की भूमिका पर सवाल: रिपोर्ट में एक चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि यॉट पर मौजूद 14 लोगों ने जुबिन को घेरकर काफी शराब पिलाई थी. जब उन्होंने अपनी सुरक्षा जैकेट उतारी और पानी में गए, तो वहां मौजूद उनके किसी भी दोस्त ने उन्हें जैकेट वापस पहनने के लिए मजबूर नहीं किया.
- हादसे का विवरण: सिंगापुर के अखबार ‘द स्ट्रेट्स टाइम्स’ के अनुसार, पुलिस ने घटनास्थल की गहन जांच के बाद अदालत को बताया कि यह पूरी तरह एक दुर्घटना थी.
बिहू के खास मौके पर हुई जुबिन की इस अचानक मौत ने उनके चाहने वालों को झकझोर कर रख दिया था. पुलिस ने अदालत में उन गवाहों के वीडियो भी दिखाए जो उस वक्त यॉट पर मौजूद थे, ताकि स्थिति पूरी तरह साफ हो सके. बता दें, जुबिन गर्ग के अचानक निधन की खबर ने न केवल असम, बल्कि पूरे देश के संगीत प्रेमियों को स्तब्ध कर दिया था. जुबिन सिर्फ एक गायक नहीं, बल्कि उत्तर-पूर्व भारत की सांस्कृतिक पहचान और लाखों युवाओं की आवाज थे. बिहू जैसे पावन अवसर पर, जब पूरा असम जश्न में डूबा था, तब उनके जाने की खबर ने खुशियों को मातम में बदल दिया.
जुबिन गर्ग का व्यक्तित्व उनकी आवाज की तरह ही बेबाक और ऊर्जा से भरपूर था. उन्होंने ‘या अली’ जैसे गानों से बॉलीवुड में जो मुकाम हासिल किया, वह आज भी संगीत प्रेमियों के जेहन में ताजा है. उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि लोग उन्हें केवल एक कलाकार नहीं, बल्कि अपना ‘जुबिन दा’ मानते थे. उनके निधन की खबर जैसे ही सोशल मीडिया और समाचारों में फैली, प्रशंसकों के लिए इस पर यकीन करना मुश्किल हो गया था.
सिंगापुर के लाजरस आइलैंड से आई उनकी मौत की खबर जितनी दुखद थी, उतनी ही चौंकाने वाली भी. जब यह बात सामने आई कि एक छोटे से हादसे और सुरक्षा नियमों की अनदेखी ने एक महान कलाकार को हमसे छीन लिया, तो हर कोई मायूस हो गया. उनके प्रशंसकों के लिए यह स्वीकार करना कठिन था कि जिस इंसान ने अपनी आवाज से करोड़ों दिलों को सुकून दिया, उसका अंत इतना अकेला और दर्दनाक होगा.
असम के हर घर में मातम छा गया था. गुवाहाटी से लेकर सुदूर गांवों तक, लोग सड़कों पर उतर आए थे. जुबिन केवल मंच पर गाना गाने वाले कलाकार नहीं थे, बल्कि वे समाज के मुद्दों पर खुलकर बोलने वाले एक क्रांतिकारी भी थे. उनके जाने से असमिया संगीत उद्योग में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसे शायद ही कभी भरा जा सके. जुबिन गर्ग भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच न हों, लेकिन उनके गीत और उनकी यादें हमेशा प्रशंसकों के दिलों में धड़कती रहेंगी.
