April 15, 2026
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नई दिल्ली. रामानंद सागर की ‘रामायण’ ने दर्शकों के दिलों में जो जगह बनाई, उसे आज तक कोई दूसरा शो छू भी नहीं सका. रामायण पर आधारित इस धारावाहिक ने भगवान राम की कथा को घर-घर पहुंचाया. आज, 29 दिसंबर को इस महान कृति के रचयिता रामानंद सागर की जयंती है, जिन्होंने भारतीय संस्कृति को पर्दे पर जीवंत कर दिया.

रामायण शो का क्रेज ऐसा था कि प्रसारण के वक्त सड़कें सूनी हो जाती थीं और लोग टीवी के आगे हाथ जोड़कर बैठते थे. जहां अरुण गोविल, दीपिका चिखलिया और सुनील लहरी जैसे कलाकारों को लोगों ने सच में भगवान मान लिया, वहीं, शो के निर्माण से जुड़े कई दिलचस्प किस्से भी मशहूर हैं. ऐसा ही एक यादगार किस्सा रामानंद सागर और लव-कुश का किरदार निभाने वाले नन्हे कलाकारों के बीच हुआ था, जो आज भी फैंस के चेहरे पर मुस्कान ले आता है.

लव और कुश की मासूमियत ने जीता दिल

‘रामायण’ के उत्तर कांड में लव और कुश के किरदार बेहद महत्वपूर्ण थे. इन भूमिकाओं के लिए रामानंद सागर ने सबसे पहले अभिनेता-राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा के जुड़वां बेटों (लव और कुश सिन्हा) को कास्ट करने की सोची थी. लेकिन, कुछ कारणों से यह संभव नहीं हो सका. इसके बाद सागर ने बाल कलाकारों की तलाश शुरू की और उनकी नजर महाराष्ट्र के दो युवा लड़कों पर पड़ी, स्वप्निल जोशी (कुश का किरदार) और मयूरेश क्षेत्रमाडे (लव का किरदार). दोनों ने अपने मासूम चेहरे और शानदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया.

शूटिंग करने से मना करते थे चाइल्ड आर्टिस्ट्स

एक इंटरव्यू में रामानंद सागर ने इन बाल कलाकारों के साथ सेट पर हुई मजेदार घटनाओं का जिक्र किया था. सागर ने बताया था, ‘दिल्ली के कुछ कलाकारों ने मुझे काफी तंग किया. हुआ यह कि कानपुर जाते समय एक टैक्सी पर ‘लव कुश’ लिखा देखकर मैंने कौतुहलवश टैक्सी वाले से पूछा तो उसने बताया कि यह हमारे मालिक के बच्चों का नाम है. उन लड़कों को टेस्ट के लिए बुलाया. दोनों की उम्र ठीक लव-कुश के किरदार के बराबर थी. टेस्ट में पास होने के बाद सागर को लगा कि ये दोनों बहुत शरारती हैं और शैतान हैं तो अच्छे एक्टर भी होंगे. लेकिन शूटिंग शुरू होते ही मुश्किलें बढ़ गईं. सेट पर आने के बाद दोनों तैयार होकर बैठ तो जाते थे, लेकिन कैमरा ऑन होते ही कहते- हम काम नहीं करेंगे.’

रामानंद सागर ने लगाया जुगाड़

रामानंद सागर ने आगे बताया था, ‘पहले दो दिन ऐसे ही निकल गए. मैं तो वैसे भी गुस्सा नहीं करता तो सोचा कि कुछ और दिमाग लगाना पड़ेगा. फिर मैंने सेट पर एक नाटक रचा- दिखावे के लिए सेट पर दो आदमियों को डंडे से पीटा और एक टेबल भी तोड़ डाली. इससे लड़कों को लगा कि काम नहीं किया तो हमें भी मार पड़ेगी. उस दिन थोड़ा काम हुआ. मगर हैरत की बात है कि अगले दिन दोनों फिर आए, लेकिन हाथ में डंडे लेकर! बोले – हमारे पास भी डंडे हैं, कुछ किया तो…’.

सांप के जरिए दोनों बच्चों को किया कंट्रोल

उन्होंने बताया था कि उस समय शूटिंग के लिए सांप लाए गए थे. टोकरी का मुंह खुला रह गया और सांप बाहर निकल आया. यह देखकर दोनों लड़के डर गए. मैंने इसका फायदा उठाया- जहां वे शरारत शुरू करते, मैं सांप की टोकरी का ढक्कन खोल देता. लड़के तुरंत मान जाते और डायलॉग बोलने लगते. मैं उनसे कहता कि वर्जिश करो, तो वे तुरंत शुरू हो जाते. इस सांप ट्रिक से दोनों को कंट्रोल कर लिया और शूटिंग सुचारु रूप से पूरी हुई.



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