नई दिल्ली. ओटीटी रक रियलिटी शो ‘द 50’ में इन दिनों ड्रामा अपने चरम पर है. हालिया एपिसोड में कंटेस्टेंट भव्या सिंह ने एक्ट्रेस दिव्या अग्रवाल की पर्सनल लाइफ को लेकर कुछ ऐसे दावे कर दिए, जिसने दर्शकों को चौंका दिया. भव्या ने यहां तक कह दिया कि दिव्या अपने पति अपुर्वा पाडगांवकर के साथ नहीं रहतीं. यही नहीं, भव्या ने दिव्या को गोल्ड डिगर तक कह दिया. इन आरोपों के बाद अब दिव्या की टीम ने सोशल मीडिया पर आधिकारिक बयान जारी कर तीखी प्रतिक्रिया दी है.
इंस्टाग्राम पर जारी नोट में टीम ने लिखा कि शो में कही गई बातें ‘बेहद आपत्तिजनक और अनैतिक’ थीं. बार-बार ‘मैं कुछ नहीं कहूंगी’ बोलकर निजी और बेबुनियाद कहानियां गढ़ना किसी की नीयत को दिखाता है, सच्चाई को नहीं. टीम ने याद दिलाया कि यह शो दिमाग, रणनीति और ताकत की परीक्षा है, किसी की निजी जिंदगी का अखाड़ा नहीं.
दिव्या को लेकर क्या बोली थीं भव्या सिंह?
दरअसल, शो में हाल ही में एक ‘बैल और बुद्धि’ नाम का टास्क हुआ, जहां दिव्या ने अर्चना को लेकर कह दिया कि उनके पास दिमाग नहीं है. भव्या को ये बात अच्छी नहीं लगी, क्योंकि उनकी अर्चना से अच्छी दोस्ती है. इसके बाद उन्होंने सपना चौधरी से बात करते हुए दवा किया कि दिव्या अपने पति अपुर्वा पाडगांवकर के साथ नहीं रहतीं. भव्या ने दावा किया कि दिवाली पर दोनों के बीच खूब झगड़ा हुआ था. एपिसोड में भव्य ने दिव्या को ‘फेक’ और ‘गोल्ड डिगर’ तक कहा. उन्होंने दावा किया कि दिव्या ने कभी रियलिटी शो में दोबारा न आने की बात कही थी, फिर भी वह लौटीं.
दिव्या अग्रवाल ने ये सोशल मीडिया पर शेयर किया है.
भन्नाईं दिव्या अग्रवाल, जारी किया स्टेटमेंट
दिव्या अग्रवाल की टीम ने स्टेटमेंट जारी करते हुए लिखा- ‘जो भी कहा और किया गया, वो पूरी तरह से अनुचित था. बार-बार ये कहना कि ‘मैं कुछ नहीं कहूंगी’ और फिर बिना किसी आधार के पर्सनल बातों को फैलाते जाना, सच नहीं बल्कि आपकी नीयत को दिखाता है. ये गेम कभी भी किसी की पर्सनल लाइफ को निशाना बनाने के बारे में नहीं था. ये ऐसा खेल है, जो ताकत, रणनीति और मानसिक क्षमता को दिखाने के लिए बनाया गया है. किसी की पर्सनल लाइफ को शो में घसीटना, उसके बारे में ज्यादा बताता है जो ऐसी बातें कर रहा है, न कि उसके बारे में जिसके बारे में कहा जा रहा है.’
‘आप बिना फैक्ट के बोलते हैं’
दिव्या अग्रवाल की टीम ने आगे कहा- ‘लोगों को अपने पास बुलाने की उनकी आदत, उनके अपमान और खुले दिल वाले स्वभाव को दिखाती है. उन्हें लोगों से जुड़ना, उन्हें घर जैसा महसूस कराना पसंद है. वो ऐसी ही हैं. इसे भावनात्मक डिपेंडेंसी या अकेलेपन के रूप में दिखाना बिलकुल गलत है, लोगों को लेकर ऐसी सोच रखना और इसे दूसरों को बोलना, दिव्या से ज्यादा उस सोच को दिखाती है, जो ऐसी बातें कर रहा है. उनकी नीयत को गलत तरीके से पेश करके उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश, उनकी ताकत, शालीनता और आत्मसम्मान को परिभाषित नहीं कर सकती. जब आप बिना फैक्ट के बोलते हैं तो उन्हें नहीं खुद को नीचा दिखाते हैं.’
