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आशा भोसले सिर्फ एक गायिका नहीं, बल्कि भावनाओं को सुरों में पिरोने वाली वह आवाज थीं जिन्होंने हर गीत को अमर बना दिया. उनकी गायकी की सबसे बड़ी खासियत थी कि वह सिर्फ सुर नहीं लगाती थीं, बल्कि गीत को जीती थीं. इसका सबसे भावुक उदाहरण फिल्म ‘बंदिनी’ की रिकॉर्डिंग के दौरान देखने को मिला था. इस भावुक गाने को रिकॉर्ड करने के लिए सच्ची भावनाओं की जरूरत थी जिसकी वजह से एसडी बर्मन ने आशा भोसले को रिकॉर्डिंग के दौरान रुला दिया था.

आशा भोसले और लता मंगेशकर ने छोटी सी उम्र में करियर की शुरुआत कर दी थी.
नई दिल्ली. 12 अप्रैल, 2026 को आशा भोसले का संगीत का सफर थम गया. 10 साल की उम्र से गाने की शुरुआत करने वाली आशा ने अपनी पूरी जिंदगी संगीत के नाम की और ये साथ आखिरी दम तक बना रहा. आशा ताई ने संगीत को जितना प्यार दिया, संगीत ने भी खुली बाहों से गायिका को अपनाया. 7 दशक के लंबे करियर के दौरान आशा भोसले ने 20 से अधिक भाषाओं में 12000 से ज्यादा गाना गाकर कई रिकॉर्ड बनाए. उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी शामिल हुआ और वो ग्रैमी के लिए नॉमिनेट होने वाली पहली भारतीय सिंगर भी बनीं. आशा भोसले ने संगीत की दुनिया में उपलब्धियों के शिखर को छुआ, लेकिन इंडस्ट्री में उनका सफर इतना आसान नहीं था. करियर की शुरुआत में उन्हें कई बार रिजेक्शन और अपमान झेलना पड़ा था.
एसडी बर्मन ने आशा भोसले से पूछा था तीखा सवाल
1963 में आई बिमल रॉय की क्लासिक फिल्म ‘बंदिनी’ में एक ऐसा गीत था, जिसे संगीतकार सचिन देव बर्मन ने आशा भोसले के लिए चुना. वो चाहते थे कि आशा भोसले ही नूतन, धर्मेंद्र, अशोक की फिल्म बंदिनी के लिए गाना गाए. जब आशा ताई माइक्रोफोन के सामने आईं, सुर और तकनीक सब सही थे, लेकिन दादा बर्मन को महसूस हुआ कि गीत में वह भाव नहीं आ रहा जिसकी उन्हें तलाश थी.
आशा भोसले ने रोते-रोते रिकॉर्ड किया था गाना
तब उन्होंने आशा भोसले की आवाज में वो दर्द बाहर निकालने के लिए एक ऐसा सवाल पूछा जिससे गायिका का गला रुआसा सा हो गया. एसडी बर्मन ने आशा भोसले से पूछा था, ‘क्या बाल तुम्हारा भाई नहीं है? क्या तुम उसे राखी नहीं बांधती?’.यह सुनते ही आशा भोसले टूट गईं. उस समय उनका निजी जीवन मुश्किल दौर से गुजर रहा था.
आशा भोसले ने 16 साल की उम्र परिवार के खिलाफ जाकर 16 साल बड़े गणपतराव भोसले से पहली शादी की थी. इस शादी के बाद उनका परिवार और उनकी बहनें सब उनसे दूर हो गए थे. आशा भोसले के परिवार ने उनसे मुंह फेर लिया था और वो एक-दूसरे से कोई रिश्ता-नाता नहीं रखना चाहते थे. ऐसे में गायिका को उनके भाई हृदयनाथ मंगेशकर की याद भीतर से तोड़ रही थी.
अमर हो गया गीत
ऐसे में वह एसडी बर्मन का सवाल सुन रो पड़ीं. जैसे ही उनकी भावनाएं बाहर आईं, सचिन दा ने तुरंत रिकॉर्डिंग का इशारा किया और फिर वही जादू हुआ जिसकी आशा भोसले से उम्मीद थी. उन्होंने पहले ही टेक में शानदार गाना गाकर एसडी बर्मन का वाहवाही लूट ली. कहा जाता है कि उसी दर्द ने उस गीत को अमर बना दिया. यही आशा भोसले की असली ताकत थी. वह सिर्फ सुर नहीं लगाती थीं, वह अपनी आत्मा को गीतों में उतार देती थीं.
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प्रांजुल सिंह 3.5 साल से न्यूज18 हिंदी से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने Manorama School Of Communication (MASCOM) से जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा किया है. वो 2.5 साल से एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रही है…और पढ़ें
