May 31, 2026
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मुंबई. हिंदी फिल्मों की दुनिया में कुछ अभिनेत्रियां ऐसी हैं, जिनकी यादें हमेशा दर्शकों के दिल में बस जाती हैं. उनका चेहरा जैसे ही स्क्रीन पर आता है तो सबकी नजरें उन पर टिक जाती हैं. उनमें से एक नाम है नंदा. नंदा बेहद खूबसूरत और टैलेंटेड अभिनेत्री थीं. उन्होंने फिल्मों में जो छवि बनाई, उसे लोग कभी नहीं भूल सकते. दर्शक उन्हें हमेशा ‘छोटी बहन’ वाली भूमिका में देखने के आदी हो गए थे. उन्होंने अपने किरदार को इतने भावपूर्ण तरीके से निभाया कि उनके साथ स्क्रीन पर जो कलाकार होते थे, दर्शक उन्हें असली भाई या बहन समझ बैठते थे.

नंदा का जन्म 8 जनवरी 1939 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर शहर में हुआ था. उनका पूरा नाम नंदिनी कर्नाटकी था. उनका परिवार फिल्मी जगत से जुड़ा हुआ था. उनके पिता विनायक दामोदर एक जाने-माने मराठी अभिनेता और निर्देशक थे. उनके भाई भी फिल्म से जुड़े थे, और उनके चाचा प्रसिद्ध निर्देशक वी. शांताराम थे. नंदा की जिंदगी तब बदल गई जब उनके पिता का देहांत हो गया. उस वक्त नंदा सिर्फ सात साल की थीं. उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी उठाई और चाइल्ड आर्टिस्ट बनकर फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया.

नंदा ने अपनी पहली फिल्म ‘मंदिर’ (1948) से बॉलीवुड में कदम रखा. पहले वह केवल बाल किरदार निभाती थीं, लेकिन धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा और भावनाओं को लोग पहचानने लगे. 1956 में उनकी फिल्म ‘तूफान और दीया’ आई, जिसमें उन्होंने लीड रोल निभाया. इस फिल्म ने उनके लिए बड़ी फिल्मों के लिए दरवाजे खोल दिए. इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में भाई की देखभाल करती बहन की भूमिका निभाई, जैसे ‘छोटी बहन’ (1959) और ‘भाभी’ (1957). उनका अभिनय इतना सजीव और भावपूर्ण था कि दर्शक उन्हें असली बहन मान बैठते थे.

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मनोज कुमार के साथ नंदा.

नंदा फिल्मों में केवल छोटी बहन की भूमिका तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने ‘कानून’ (1960) और ‘हम दोनों’ (1961) जैसी फिल्मों में अपनी एक्टिंग से सबका मन मोह लिया. उनकी जोड़ी बॉलीवुड के बड़े सितारों के साथ हिट साबित हुई. शशि कपूर, राजेश खन्ना, देव आनंद और मनोज कुमार जैसे अभिनेताओं के साथ उन्होंने कई सुपरहिट फिल्में दीं, लेकिन फिर भी, उनकी ‘छोटी बहन’ वाली मासूम और प्यारी छवि दर्शकों की यादों में सबसे ज्यादा बसी रही.

नंदा ने ‘आंचल’ के लिए जीता फिल्मफेयर अवॉर्ड

नंदा को उनके करियर के दौरान कई सम्मान भी मिले. उन्हें फिल्म ‘आंचल’ के लिए 1960 में फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस मिला. इसके अलावा, उन्होंने ‘भाभी’, ‘इत्तेफाक’, ‘आहिस्ता आहिस्ता’, और ‘प्रेमरोग’ के लिए नॉमिनेशन भी हासिल किए.

नंदा ने 80 के दशक में निभाए मां के किरदार

नंदा ने अपने करियर में कई हिट फिल्में दीं. उनकी आखिरी हिट फिल्म ‘शोर’ (1972) थी, जिसमें उन्होंने मनोज कुमार की पत्नी की भूमिका निभाई. इसके बाद उन्होंने 1980 के दशक में कुछ फिल्मों में मां की भूमिका निभाई, जैसे ‘आहिस्ता आहिस्ता’ (1981), ‘प्रेमरोग’ (1982), और ‘मजदूर’ (1983). 25 मार्च 2014 को नंदा का निधन हो गया. 75 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली.



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