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मशहूर कोरियोग्राफर ने हाल ही में अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे एक वक्त पर उन्हें सांवले रंग की वजह से रिजेक्शन झेलना पड़ा था. उन दिनों वो एक बैकग्राउंड डांसर के रूप में काम करते थे और उन्हें दिन के महज 750 मिलते थे, जबकि उनकी पत्नी एक मॉडल थीं और उनकी कमाई कहीं ज्यादा थी. फिल्म के सेट पर ही दोनों की मुलाकात हुई और प्यार परवान चढ़ा. भारी रिस्क और अटूट लगन के दम पर उन्होंने फर्श से अर्श तक का यह सफर तय किया है.

नई दिल्ली. रेमो डिसूजा और लिजेल डिसूजा बॉलीवुड के पॉपुलर कपल्स में से एक हैं. आज शोहरत और कामयाबी के जिस मुकाम पर दोनों खड़े हैं, वहां तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं था. एक वक्त था जब दोनों भी इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे थे. तब रेमो एक बैकग्राउंड डांसर हुआ करते थे और उन्हें दिन के सिर्फ 750 रुपये मिलते थे, जबकि लिजेल एक मॉडल थीं और उनकी कमाई रेमो के मुकाबले काफी ज्यादा थी.

हाल ही में एक बातचीत में रेमो और लिजेल ने अपनी पहली मुलाकात, शुरुआती संघर्षों को लेकर खुलकर बात की. कर्ली टेल्स के साथ हुई एक खास बातचीत में लिजेल ने बताया कि उनकी और रेमो की पहली मुलाकात फिल्मों के गानों की शूटिंग के दौरान हुई थी. रेमो उस समय अहमद खान की टीम में एक डांसर थे, वहीं लिजेल म्यूजिक वीडियो में बतौर मॉडल काम कर रही थीं.

लिजेल ने उन दिनों को याद करते हुए बताया, ‘मैं उस समय काफी फैशन शोज किया करती थी. एक दौर था जब अहमद खान अपनी टीम में मॉडल्स के साथ काम करते थे और इसी तरह मैं भी उनके ग्रुप का हिस्सा बनी. यह लगभग 6 से 8 महीने का समय था और इसी दौरान मेरी मुलाकात रेमो से हुई’.
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रेमो ने कहा, ‘मैं तब एक बैकग्राउंड डांसर था और लिजेल एक मॉडल थीं, जिन्हें गानों में ब्यूटी शॉट्स के लिए बुलाया जाता था. हम तपती धूप में डांस करते थे और हमें दिन के सिर्फ 750 रुपये मिलते थे, जबकि मॉडल्स को 4500 रुपये दिए जाते थे. उनके लिए अलग से टेंट, पंखे और अच्छे खाने का इंतजाम होता था. यहां तक कि आउटडोर शूट के लिए हम बस से धक्के खाते हुए जाते थे, जबकि वो लोग फ्लाइट से सफर करते थे’.

रेमो ने इंडस्ट्री में अपनी शुरुआती पहचान बनाने के संघर्षों को लेकर फिल्म रंगीला के दौरान हुए एक ऑडिशन का किस्सा शेयर किया. उन्होंने बताया कि उन दिनों उनका सुपर ब्रैट्स नाम का पांच लड़कों का एक ग्रुप था. जब अहमद खान को रंगीला मिली, तो उन्होंने पहली बार यह तय किया कि उन्हें बॉलीवुड के पुराने डांसर्स नहीं, बल्कि नया टैलेंट चाहिए.

रेमो ने बताया, ‘हम पांचों दोस्त ऑडिशन देने पहुंचे. अहमद ने सबको देखा और मैं सबसे आखिरी में खड़ा था. उन्होंने कुछ लड़कों को चुना और बाकी सबको बाहर जाने को कह दिया, रिजेक्ट होने वालों में मैं भी शामिल था. रेमो ने आगे कहा, ‘मैं उस समय जामनगर से नया-नया आया था और मेरा रंग काफी डार्क था. मुझे लगता है कि मेरे रंग की वजह से ही मुझे रिजेक्ट किया गया था.’

इस रिजेक्शन के बावजूद रेमो की जिद ने सब कुछ बदल कर रख दिया. उन्होंने बताया, ‘मेरे चारों दोस्त मुझे वापस अहमद के पास ले गए और उनसे मुझे रखने की गुजारिश की, लेकिन उन्होंने कह दिया कि अगली बार देखेंगे. मैं बहुत उदास हो गया था. फिर मैं उनकी असिस्टेंट के पास गया और उनसे विनती की कि वो बस एक बार मेरा डांस देख लें. मैंने उनसे कहा कि आप बस एक बार मेरा काम देख लीजिए, उसके बाद भले ही आप मुझे रिजेक्ट कर देना.’

रेमो ने आगे बताया, ‘वह मुझे अंदर ले गईं और डांस करने को कहा. मुझे लगा कि यही मेरा इकलौता मौका है-अगर आज मैंने खुद को साबित नहीं किया, तो फिर कभी नहीं कर पाऊंगा. उन्होंने मेरा डांस देखा और फिर मुझे एक छोटे से ऑफिस में ले जाकर अहमद को बुलाया. उन्होंने अहमद से कहा कि तुम्हें 50 लड़के चाहिए, 49 तुम्हारे हैं, लेकिन एक मेरा है. इस तरह उन्होंने मेरी गारंटी ली और मुझे टीम में जगह मिल गई.’

रेमो ने खुलासा किया कि उस समय वह बतौर असिस्टेंट काफी अच्छी कमाई कर रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने एक बड़ा जोखिम उठाने का फैसला किया. उन्होंने बताया, ‘मैं अहमद खान को असिस्ट कर रहा था और उस वक्त काफी अच्छे पैसे कमा रहा था, दिन के 3000 रुपये यानी महीने के लगभग 1.5 लाख रुपये. हमारे पास काम की कोई कमी नहीं थी और अहमद उस दौर के सबसे बड़े कोरियोग्राफर के तौर पर कामयाबी की बुलंदियों पर थे.’ रेमो की जिंदगी में असली टर्निंग पॉइंट तब आया, जब उनकी मुलाकात फिल्ममेकर अनुभव सिन्हा से हुई.

रेमो ने उस मुलाकात का जिक्र करते हुए बताया, ‘मैं अहमद के साथ टी-सीरीज के ऑफिस में था, तभी हमारी मुलाकात अनुभव सिन्हा से हुई. उन्होंने मुझे देखते ही पूछा, तुम अहमद के असिस्टेंट हो न? मैंने हां में जवाब दिया. इसके बाद उन्होंने बिमल से मुझसे बात करने को कहा. बिमल मुझे साथ ले गए और पूछा कि क्या मैं कोरियोग्राफी करना चाहूंगा? उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि मैं पैसों की तो गारंटी नहीं दे सकता, लेकिन काम की गारंटी जरूर दे सकता हूं. तुम्हें काम बहुत मिलेगा, पर मैं भारी-भरकम फीस का वादा नहीं कर सकता. मैंने भी बिना सोचे कह दिया कि मुझे बस काम चाहिए.’

रेमो का यह फैसला उनके करियर का सबसे बड़ा दांव साबित हुआ. उन्होंने आगे कहा, ‘उस वक्त यह मेरे लिए सबसे बड़ा रिस्क था- एक ऐसा इंसान जो दिन के 3000 रुपये कमा रहा हो, उसके लिए ऐसा कदम उठाना छोटी बात नहीं थी. मेरा पहला गाना सोनू निगम की एल्बम दीवाना का था, जो सुपरहिट रहा. उसके बाद तो हम महीने में चार-चार गाने करने लगे. अनुभव सिन्हा ने ही म्यूजिक वीडियो में कोरियोग्राफर्स को क्रेडिट देना शुरू किया था, वरना उससे पहले कोरियोग्राफर्स का नाम नहीं दिया जाता था. इसके बाद उन्होंने मुझे फिल्म तुम बिन दी, जो बड़ी हिट रही और बस वहीं से मेरा फिल्मी सफर शुरू हो गया.’
