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Bollywood Biggest Music Controversy: बॉलीवुड में संगीत चोरी यानी प्लेजरिज्म कोई नई बात नहीं है. लेकिन जब एक ही विदेशी गाने की नकल दो बार बन जाए और दोनों बार चोरी करने वाले कंपोजर्स आपस में ही ‘अनएथिकल’ होने का ठप्पा लगाएं तो मामला काफी दिलचस्प हो जाता है. 1990 के दशक की शुरुआत में ऐसा ही हुआ था, जब गिनी के सुपरस्टार मोरी कांटे के गाने को बप्पी लाहिरी और लक्ष्मी-प्यारेलाल की जोड़ी ने दो अलग-अलग फिल्मों में इस्तेमाल किया. यह है कहानी ‘जुम्मा चुम्मा’ और ‘तम्मा तम्मा’ की.

नई दिल्ली. भारतीय सिनेमा की पहचान सिर्फ फिल्मों से नहीं, बल्कि उसके गानों से भी रही है. दशकों तक बॉलीवुड संगीत ने लोगों के दिलों पर राज किया. शादी हो, पार्टी हो या त्योहार, हिंदी फिल्मी गानों के बिना सब अधूरा लगता था. लेकिन इसी चमकदार दुनिया का एक ऐसा सच भी है, जिसने कई बार बॉलीवुड संगीत की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए. यह वह दौर था जब विदेशी धुनों को उठाकर हिंदी गानों में ढाल देना आम बात मानी जाती थी.

बॉलीवुड संगीत की दुनिया में चोरी और प्रेरणा का फर्क अकसर धुंधला रहा है. 1980-90 के दशक में जब इंटरनेट नहीं था और वैश्विक संगीत तक आम आदमी की पहुंच सीमित थी, तब म्यूजिक डायरेक्टर्स विदेशी धुनों को आसानी से हिंदी फिल्मों में ढाल लेते थे. लेकिन जब बप्पी लाहिरी और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने एक ही गिनी (अफ्रीकी) के गायक मोरी कांटे के गाने से प्रेरणा ली तो दोनों ने न सिर्फ क्रेडिट के लिए लड़ाई की बल्कि एक-दूसरे पर अनैतिकता के आरोप लगा डाले थे.

1980 के दशक के अंत में गिनी के सिंगर-सॉन्गराइटर मोरी कांटे ने अपना एल्बम ‘अकवाबा बीच’ (Akwaba Beach) रिलीज किया. इस एल्बम के गाने ‘तमा’ (Tama) और ‘ये के ये के’ (Yé ké yé ké) दुनियाभर में हिट हुए. भारत में जब ये धुनें पहुंचीं, तो दो दिग्गज संगीतकारों की नजर इन पर जम गई.
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1990 में आई फिल्म ‘थानेदार’ में बप्पी लाहिरी ने ‘तम्मा तम्मा’ गाना बनाया. इसे माधुरी दीक्षित और संजय दत्त पर फिल्माया गया. गीतकार थे इंदीवर और कोरियोग्राफर सरोज खान थीं .

1991 में आई फिल्म ‘हम’ में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने ‘जुम्मा चुम्मा’ गाना बनाया. यह गाना अमिताभ बच्चन और किमी कटकर पर फिल्माया गया. आनंद बख्शी इसके गीतकार थे और चिन्नी प्रकाश ने गाने की कोरियोग्राफी को संभाला था. दोनों गाने सुनने में एक जैसे थे, क्योंकि दोनों ने मोरी कांटे के गानों के कुछ हिस्से बिल्कुल वैसे के वैसे उठा लिए थे.

जब बॉलीवुड के भीतर यह बात फैली कि दोनों गाने एक ही सोर्स से ‘इंस्पायर्ड’ हैं, तो विवाद शुरू हो गया. सबसे बड़ा सवाल यह था कि ‘किसने पहले रिकॉर्ड किया’? लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का दावा था कि उन्होंने ‘जुम्मा चुम्मा’ को बप्पी लहरी से पहले रिकॉर्ड कर लिया था. लेहरन रेट्रो को दिए एक इंटरव्यू में लक्ष्मीकांत ने कहा, ‘हम उस गाने के पहले 8 बार्स (संगीत के 8 अंश) से प्रेरित हुए.’ यानी उन्होंने खुद माना कि उन्होंने कॉपी किया है.

वहीं बप्पी लाहिरी ने पहले तो कहा, ‘मुझे समझ नहीं आता इस विवाद का मतलब क्या है, क्योंकि यह गाना न उनका है, न मेरा.’ लेकिन फिर तुरंत बाद वे उलट गए. उन्होंने दावा किया, ‘बिल्कुल मेरा गाना ओरिजिनल है. मैंने मोरी कांटे के गाने से सिर्फ 8 बार्स लिए हैं.’ आज के दौर में इसे सीधे तौर पर प्लेजरिज्म यानी चोरी माना जाता, लेकिन उस समय बॉलीवुड में इसे ‘इंस्पिरेशन’ कहकर टाल दिया जाता था.

विवादों के बावजूद दोनों गाने जबरदस्त हिट साबित हुए. आज भी शादी-पार्टियों में ‘तम्मा तम्मा’ और ‘जुम्मा चुम्मा’ बजते ही लोग डांस फ्लोर पर पहुंच जाते हैं. 2017 में बद्रीनाथ की दुल्हनिया में ‘तम्मा तम्मा अगेन’ के जरिए इस गाने को दोबारा पेश किया गया. नई पीढ़ी ने भी इसे उतना ही पसंद किया.

बॉलीवुड में यह मामला अकेला नहीं है. बप्पी लाहिरी ने खुद स्वीकार किया कि कॉपी करना एक परंपरा है. सलील चौधरी से लेकर आरडी बर्मन तक की कई रचनाएं विदेशी धुनों से प्रेरित बताई जाती हैं. 90s में ग्लोबलाइजेशन से पहले यह आसान था क्योंकि जानकारी सीमित थी. मोरी कांटे ने बाद में इन कॉपीज पर नाराजगी जताई थी. आज के युग में सोशल मीडिया और कॉपीराइट लॉ के कारण ऐसा करना लगभग असंभव है.

इन गानों की लोकप्रियता यह सवाल जरूर खड़ा करती है कि असली क्रेडिट किसे मिलना चाहिए था. बॉलीवुड संगीतकारों को या उस अफ्रीकी कलाकार को, जिसकी धुनों ने इन सुपरहिट गानों को जन्म दिया? शायद यही बॉलीवुड संगीत के उस दौर की सबसे बड़ी सच्चाई थी, जहां ‘इंस्पिरेशन’ और ‘कॉपी’ के बीच की रेखा अक्सर धुंधली हो जाती थी.
