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Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती का पर्व आज देशभर में मनाया जा रहा है. इस दिन व्रत रखकर विधि विधान के साथ हनुमानजी की पूजा अर्चना करते हैं. लेकिन हनुमान जयंती का पर्व साल में दो बार क्यों मनाया जाता है. बताया जाता है कि एक तिथि को हनुमान जन्मोत्सव और दूसरी तिथि को विजय अभिनंदन महोत्सव के रूप में मनाया जाता है. आइए जानते हैं साल में 2 बार क्यों मनाया जाता है हनुमान जन्मोत्सव.

Hanuman Jayanti 2026: देशभर में आज हनुमान जयंती का पर्व बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. हनुमान जयंती को लेकर भक्तों में खास उत्साह देखने को मिल रहा है, जगह-जगह भंडारे और भजन कीर्तन चल रहे हैं. हनुमान जयंती हर साल में 2 बार मनाई जाती है. वाल्मीकि रामायण के अनुसार, पहली हनुमान जयंती कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अर्थात नरक चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है, जिसे हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. जबकि दूसरी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को, जिसे हनुमान जयंती कहते हैं. लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल भी उठता है कि आखिर हनुमान जयंती साल में दो बार क्यों मनाई जाती है? आइए जानते हैं इसके पीछे धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं…
एक हनुमान जयंती और दूसरी तिथि विजय अभिनंदन महोत्सव
हनुमान जयंती साल में दो बार क्यों मनाया जाता है, इसके पीछे कई मान्यताएं हैं. दरअसल एक तिथि हनुमानजी के जन्मोत्सव के तौर पर मनाई जाती है और दूसरी तिथि को विजय अभिनंदन महोत्सव के रूप में मनाया जाता है. बाल्मिकी रचित रामायण के अनुसार, हनुमानजी का जन्म कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि, दिन मंगलवार, स्वाति नक्षत्र और मेष लग्न में हुआ था. वहीं दूसरी तिथि यानी चैत्र पूर्णिमा से जुड़ी कथा के अनुसार, एक बार हनुमानजी सूर्य को फल समझकर खाने के लिए आगे बढ़ रहे थे. तभी देवराज इंद्र ने हनुमानजी को रोकने के लिए प्रहार किया, जिससे वे मूर्छित हो गए. हनुमानजी को पवनपुत्र भी कहा जाता है, इससे पवनदेव काफी क्रोधित हो गए और उन्होंने संपूर्ण सृष्टि की हवा रोक दी, जिससे चारों तरह हाहाकार मच गया, लोगों को सांस लेने में समस्या होने लगी. देवताओं की प्रार्थना पर ब्रह्माजी ने हनुमानजी को दूसरा जीवन दिया और देवताओं ने उनको अपनी शक्तियां दी. जिस दिन हनुमानजी को दूसरा जीवन मिला, उस तिथि को चैत्र पूर्णिमा तिथि. इसलिए इस दिन को हनुमान जयंती के रूप में मनाई जाती है.
माता सीता ने भी दिया था वरदान
वहीं दूसरी पौराणिक कथा अनुसार, माता सीता ने हनुमानजी की भक्ती और समर्पण भाव को देखकर अष्ट सिद्धि नव निधि के साथ अमरता का वरदान दिया था. इसलिए कार्तिक माह में हनुमान जयंती का पर्व मनाया जाता है. वहीं कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में यह पर्व अलग-अलग तिथियों पर भी मनाया जाता है, जो स्थानीय परंपराओं पर आधारित होता है.
क्षेत्रीय मान्यताओं पर आधारित
धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की सांस्कृतिक विविधता के कारण कई त्योहार अलग-अलग तिथियों पर मनाए जाते हैं, और हनुमान जयंती भी उसी का एक उदाहरण है. अलग-अलग क्षेत्रों में मान्यताओं और धार्मिक गणनाओं के आधार पर त्योहारों की तिथियों में बदलाव देखा जाता है. हनुमान जयंती के दिन भक्त उपवास रखते हैं और भगवान हनुमान से शक्ति, साहस और संकटों से मुक्ति की कामना करते हैं. इस दिन मंदिरों में लंबी कतारें लगती हैं और भक्त जय बजरंगबली के जयकारों के साथ पूजा करते हैं. इस प्रकार, हनुमान जयंती का साल में दो बार मनाया जाना किसी विरोधाभास का नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध धार्मिक परंपराओं और विविध मान्यताओं का प्रतीक है.
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पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें
