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ये कहानी उस एक्टर की है, जो भारतीय सिनेमा, टेलीविजन और थिएटर के उन दिग्गज एक्टर्स में से एक हैं, जिन्होंने कभी ग्लैमर की चकाचौंध नहीं, बल्कि अपनी गहराई भरी चरित्र अभिनय से दर्शकों का दिल जीता. इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर अभिनय के जुनून को अपनाने वाले इस एक्टर न सिर्फ समांतर सिनेमा और मेनस्ट्रीम फिल्मों के बीच पुल का काम किया, बल्कि टेलीविजन पर भी आम आदमी की आवाज बने. जानते हैं ये कौन हैं?

नई दिल्ली. न चेहरे पर सुपरस्टार वाला ग्लैमर, न एंट्री पर सीटियां बजवाने वाला अंदाज… फिर भी इस अभिनेता ने अपनी एक्टिंग से ऐसा जादू चलाया कि हर किरदार अमर हो गया. कभी इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाला यह लड़का अभिनय के जुनून में सबकुछ छोड़ थिएटर की दुनिया में उतर गया. किरदारों को असली बनाने की दीवानगी ऐसी थी कि एक बार भिखारी के रोल की तैयारी के लिए बस में सचमुच भीख मांगने लगा और लोग उसे असली भिखारी समझ बैठे. टीवी पर आम आदमी बनकर घर-घर में पहचान बनाई तो फिल्मों में विलेन, पिता और गंभीर किरदारों से अभिनय का नया स्तर तय कर दिया. निजी जिंदगी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही. दो शादियां, संघर्ष और शानदार अभिनय… यही वजह है कि आज भी उन्हें एक्टिंग का उस्ताद कहा जाता है.

भारतीय सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जो कभी पारंपरिक हीरो नहीं कहलाते, लेकिन अपनी अदाकारी से बड़े-बड़े सितारों पर भारी पड़ जाते हैं. ऐसा ही एक नाम है पंकज कपूर का. अपनी गहरी आवाज, दमदार संवाद अदायगी और किरदार में पूरी तरह ढल जाने की कला ने उन्हें भारतीय सिनेमा का सबसे बेहतरीन कैरेक्टर एक्टर बना दिया. 29 मई 1954 को जन्मे पंकज कपूर आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं. उनका फिल्मी सफर संघर्ष, जुनून और अभिनय के प्रति दीवानगी की मिसाल माना जाता है. फोटो साभार-@officialpankajkapur/Instagram

पंकज कपूर का जन्म एक साधारण हिंदू खत्री परिवार में हुआ. उनके पिता दर्जी का काम करते थे. स्कूल-कॉलेज के दिनों में ही थिएटर का शौक जागा. इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन अभिनय का जुनून इतना बढ़ा कि उन्होंने पिता को मनाकर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में दाखिला ले लिया. एफटीआईआई ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया था क्योंकि उनकी शक्ल पसंद नहीं आई, लेकिन NSD ने उन्हें एक बेहतरीन एक्टर बनाने में अहम भूमिका निभाई. फोटो साभार-@officialpankajkapur/Instagram
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पंकज कपूर की मेहनत और डेडिकेशन की मिसाल उनके भिखारी रोल की तैयारी से मिलती है. एक बार भिखारी की भूमिका के लिए ऑडिशन देते समय उन्होंने खुद को पूरी तरह ढालने के लिए बस में सवार होकर भीख मांगनी शुरू कर दी. लोग उन्हें असली भिखारी समझकर पैसे देने लगे. वे कहते हैं कि रोल तैयार करने के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं. फोटो साभार-@officialpankajkapur/Instagram

थिएटर से शुरुआत करने वाले पंकज कपूर ने टीवी और फिल्मों दोनों में अपनी अलग पहचान बनाई. 1982 में श्याम बेनेगल की फिल्म ‘आरोहन’ से फिल्मी डेब्यू किया. इसके बाद रिचर्ड एटनबरो की ‘गांधी’ में महात्मा गांधी के सेक्रेटरी प्यारेलाल का रोल किया और गांधी जी की आवाज भी डब की. शुरुआती दिनों में संघर्ष बहुत था. परिवार को संभालने के लिए पैसे की जरूरत थी, इसलिए ‘करमचंद’ जैसे टीवी सीरियल किए, जो उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना गए. फोटो साभार-@officialpankajkapur/Instagram

1980 और 90 के दशक में वह छोटे पर्दे का बेहद लोकप्रिय चेहरा बन गए. खासकर टीवी शो ‘ऑफिस ऑफिस’ में आम आदमी ‘मुसद्दीलाल’ का किरदार आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है. सरकारी दफ्तरों की भ्रष्ट व्यवस्था पर आधारित इस व्यंग्यात्मक शो में पंकज कपूर ने जिस अंदाज में एक परेशान लेकिन जुझारू आम आदमी को निभाया, उसने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया. फोटो साभार-@officialpankajkapur/Instagram

फिल्मों में उनका जलवा अलग ही रहा. 1989 में ‘राख’ के लिए इंस्पेक्टर पी.के. का रोल कर पहला नेशनल अवॉर्ड जीता. 1991 में ‘एक डॉक्टर की मौत’ में डॉ. दीपांकर रॉय का रोल सराहा गया. लेकिन असली कमाल 2003-04 में विशाल भारद्वाज की ‘मकबूल’ में आया. शेक्सपीयर के ‘मैकबेथ’ पर आधारित इस फिल्म में उन्होंने जहांगीर खान (अब्बाजी) का रोल किया, जो दर्शकों के जेहन में आज भी ताजा है. इस रोल के लिए उन्हें दूसरा नेशनल अवॉर्ड मिला. कुल तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स और एक फिल्मफेयर अवॉर्ड उनके नाम हैं. फोटो साभार-@officialpankajkapur/Instagram

पंकज कपूर का निजी जीवन भी उतना ही दिलचस्प रहा. 1979 में एक्ट्रेस और डांसर नीलिमा आजीम से पहली शादी हुई. इस रिश्ते से उनका बेटा शाहिद कपूर का जन्म हुआ. लेकिन साल 1984 में दोनों अलग हो गए. 1988 में उन्होंने सुप्रिया पाठक से दूसरी शादी की. सुप्रिया दिग्गज एक्ट्रेस दीना पाठक की बेटी हैं. इस शादी से उनकी बेटी सनाह कपूर और बेटा रुहान कपूर हुआ. फोटो साभार-@officialpankajkapur/Instagram

आज पंकज कपूर सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि अभिनय की एक संस्था माने जाते हैं. उन्होंने अपने करियर से यह साबित किया कि अगर प्रतिभा और समर्पण सच्चा हो तो बिना पारंपरिक हीरो बने भी सिनेमा पर राज किया जा सकता है. फोटो साभार-@officialpankajkapur/Instagram
