June 14, 2026
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21 thoughts on “Mumbai Fast: मुंबई की 25 बड़ी खबरें | Top 25 News | Mumbai Today News | 7 July 2025 | Mumbai

  1. बि एम सी, चुनाव, वर्ग 3 से उपर के लोंगो की क्या जरुरत है, मतलब यह सब वर्ग 4 और उनके सहयोगी के लोग,मतलब सब पिले कार्डधारक मिलीभगत से,सबकुछ चल रहा है,Hospitals, Banks, all Deptt, बाकी के लोंगो की जरुरत नहीं है, और इनका सबको मशवरा रहता है काम धाम तो इसका काम उसका, अन्य जगह काम करना,नहीं तो काम का तरीका,सबका हिपनौटिसम, गुंडागर्दी, बत्तमीजी, और दूसरों के कामकाज मे दखलअंदाजी,ना कानून, ना प्रशासन, ना नेतुत्व,क्यों की इनकी फॅमिली सेक्युर,वर्ग 4, सहयोगी का कामकाज मिलीभगत होने से,उनका कामकाज कभी भी नहीं करते, मतलब दूसरा काम,अन्य कामकाज, इसीलिए वो भी बिना कामकाज करे बिना, और सबको मशवरा से यह लोंगो ने इतने साल से सरकार को आर्थिक नुकसान,अन्य, .
    बिना कामकाज, मगरूरी,मिलीभगत से निकाले है, और इनकी कामकाज की कमाल सालों से, बाकी के लोग इनको कोई मायने नहीं है,मुम्बई, महाराष्ट्र मे ऐसा होने के कारण, यह जो सब प्रकार के परप्रांतीय आने का कारण यही है,मतलब मुम्बई,महाराष्ट्र मे आते है,यहाँ के लोग कैसे है इसीलिए,मतलब लाखों,करोड़ मे जनसंख्या,बाकी किधर आने जाने की जरुरत नहीं है,परप्रांतीय आने कितने चाहिए अभी तक 20 लाख वो भी ज्यादा से ज्यादा,पर आके गये और इधर कम से कम सौ करोड़ यह फासला है, इसीलिए इधर बेवजह भीड़ ही भीड़ है,और उनको कुछ जरुरत नहीं है,मतलब सौ कमाने वाला, और दस लाख कमाने वाला यही है वो भी सुकून से,और इनको वह भी सौ, भी खर्च नहीं होते, क्यों की रेल की सुविधाएं फ्री मे, हर दस जगह पिने का पाणी, kfc,हर तरह की बिरयानी, और कुछ खाने की चीजें, अन्य सुविधाएं,
    टेंडर तो सब चीजें के निकलते है मतलब, ऐसे जरुरी चीजों तो के नहीं,कुछ है वो भी ठीक नहीं है,ऐसी सुविधाएं जनक सबके लिए रहनी चाहिए,पैसेंजर तो बहुत है,जरूरतमंद भी,कोई लेने वाले है, कोई नहीं लेने वाले है, पर ऐसा रहना चाहिए,पर ऐसा किधर तो है क्या, ऐसा कहाँ तो हो सकता है, पर ऐसा नहीं है.
    रेल बजट तो करोड़ मे खर्चा होता है सालों साल,
    पर ऐसी जरुरी सुविधाएं के लिए कभी भी नहीं,
    सुविधाएं तो है पर यहाँ नहीं है यह महेत्वपूर्ण है.
    इसीलिए यह हादसा, बड़ा हादसा होते रहते है, क्यों की अभी जो लोग सफर करते है, उसमे से सिर्फ 2 प्रतिशत ही पैसेंजर सफर कर सकते है,
    सिर्फ बेकार का चाय, इनलीगल कंपनी के वॉटर बॉटल्स,और बेकार खाना सबकुछ,आस पास गन्दगी,किधर भी,और कुत्तों जैसी भीड़ बिनावजह ज्यादा तो फॅमिली को गुमराह करने के लिए,ऐसा सालों से,सिर्फ कहने का बड्डपन,पर असल मे खोखला.
    क्यों की यह जो 'दिन' है जो की बालदिन और दिन दयाल उपाध्याय से लिया गया है इसीलिए,यह भी सिर्फ इक दिन के लिए इसीलिए इस दिन का इक तारीख है,बस यही बड्डपन, बाकी के सालों साल खोखला,मतलब बाकी के सालों साल वर्ग 4 और सहयोगी के,मतलब सबके रिलेटिव,रिश्तेदार मतलब हर इक के कम से कम पांचसो, इसीलिए इनके प्रति महिला के तौर के कामकाज मे, मिरा महिला का नाम होने से मिरा रोड जैसे,अन्य कोई भी लड़की,महिला के बारे मे मतलब मुम्बई,महाराष्ट्र मे ही सब परप्रांतीय लोंगो की सिर्फ यहाँपे मिलीभगत रहती है, विदेशी तस्करी सामुग्री होने से,किसी को भी डराने, धमकाने और तरीके के कारण,इनके प्रति, यहाँ के प्रति, कुछ छोडके,यही ही मामला अन्य जगह होता है तो ऐसा नहीं होता किधर भी,मतलब यह लोग जितनी आसानी से आते जाते, रहते है, यहाँ के लोंगो के प्रति ऐसा नहीं है,वो चाहे कोई भी हो,ऐसा जरुरी नहीं है पर,यहाँ के लोंगो के प्रति फरक है, इसीलिए,मिरा रोड जैसे छोटे से भी मारपीट के मामले की वजह से, लाखों मे भीड़ होती है,यह लोग सिर्फ ऐसे मामले मे ही बहुत जागरूक रहते है,अन्य मामले मे नहीं.

  2. बि एम सी, चुनाव, वर्ग 3 से उपर के लोंगो की क्या जरुरत है, मतलब यह सब वर्ग 4 और उनके सहयोगी के लोग,मतलब सब पिले कार्डधारक मिलीभगत से,सबकुछ चल रहा है,Hospitals, Banks, all Deptt, बाकी के लोंगो की जरुरत नहीं है, और इनका सबको मशवरा रहता है काम धाम तो इसका काम उसका, नहीं तो काम का तरीका,सबका हिपनौटिसम, गुंडागर्दी, बत्तमीजी, और दूसरों के कामकाज मे दखलअंदाजी,ना कानून, ना प्रशासन, ना नेतुत्व,क्यों की इनकी फॅमिली सेक्युर,वर्ग 4, सहयोगी का कामकाज मिलीभगत होने से,उनका कामकाज कभी भी नहीं करते, मतलब दूसरा काम,अन्य कामकाज, इसीलिए वो भी बिना कामकाज करे बिना, और सबको मशवरा से यह लोंगो ने इतने साल से सरकार को आर्थिक नुकसान,अन्य,बिना कामकाज, मगरूरी,मिलीभगत से निकले है, और इनकी कामकाज की कमाल सालों से, बाकी के लोग इनको कोई मायने नहीं है,मुम्बई, महाराष्ट्र मे ऐसा होने के कारण, यह जो सब प्रकार के परप्रांतीय आने का कारण यही है,मतलब मुम्बई,महाराष्ट्र मे आते है,यहाँ के लोग कैसे है इसीलिए,मतलब लाखों,करोड़ मे जनसंख्या,बाकी किधर आने जाने की जरुरत नहीं है,परप्रांतीय आने कितने चाहिए अभी तक 20 लाख वो भी ज्यादा से ज्यादा,पर आके गये और इधर कम से कम सौ करोड़ यह फासला है, इसीलिए इधर बेवजह भीड़ ही भीड़ है, और उनको कुछ जरुरत नहीं है,मतलब सौ कमाने वाला, और दस लाख कमाने वाला यही है वो भी सुकून से, क्यों की यह जो 'दिन' है जो की बालदिन और दिन दयाल उपाध्याय से लिया गया है इसीलिए,यह भी सिर्फ इक दिन के लिए इसीलिए इस दिन का इक तारीख है, बाकी के सालों साल वर्ग 4 और सहयोगी के, मतलब सबके रिलेटिव,रिश्तेदार,इसीलिए इनके प्रति महिला के तौर के कामकाज मे,मिरा महिला का नाम होने से मिरा रोड जैसे,छोटे से भी मामले के वजह से लाखों मे भीड़ होती है,इसीलिए यह लोग बहुत जागरूक रहते है,अन्य मामले मे नहीं.

  3. मनसे काही दादागिरी नाही करत, आधी सर्वांना सुचवत, आधी सर्वांना सांगितले आहे,लोक उल्लंघन करता,माज करता,सामान्य मराठी माणसावर अन्याय करता ,मराठी ला डावलतात तेव्हाच मनसे येते नाही तर हुन कोणालाच त्रास देत नाहीत.
    मनसे मुळे मराठी गोष्टी टिकल्या आहे.उलटा मनसे सारखेच लोक पाहिजे, मनसे ला धन्यवाद करा .
    महाराष्ट्रात मराठी च पाहिजे, किती गुजराती झाले, मराठी पाहिजे. परप्रांतीय मांज करता, मराठी लोकांवर,मराठी लोकांना पुढे आणा, मराठी आलीच पाहिजे. राज साहेब सोबत आम्ही आहोत. धाक असला पाहिजे.

  4. ट्रैफिक वाले की मनमानी पर हम कैसे करें शिकायत यह टोल नंबर फ्री कब मिलेगा ट्रैफिक पुलिस वालों की अवैध वसूली होती है सरकार से निवेदन है कि वह भी टोल फ्री नंबर जारी करें जय हिंद जय महाराष्ट्र

  5. Patrakar sahab bullet train 2028, thoda study kar lijiye fir news chaliye. Bullet train ki jagah modi sarkar kya karne wali hai woh khabar bataye Please, Maine suna hai bullet train ke track par Vande Bharat ko modify kiya jayega? Kya yeh sach hai?

  6. मुंबई के राज ठाकरे और उदय ठाकरे को मराठी भाषा से कोई लेना देना नहीं है अगर लेना देना होता ना जो मेरी मराठी बहन के साथ हुआ ना तो उसके बारे में कुछ बोलते और उन्हें का अर्थ जो राज ठाकरे का नेता है उसका जो यह लड़का है उसको नंगा करके मुंबई में घूमते राज ठाकरे को सिर्फ अपनी सियासत की रोटी शेकनी है और लोगों का ध्यान उनकी तरफ आकर्षित करना है उनको तो अभी कोई देखता ही नहीं राज ठाकरे उद्धव ठाकरे को तो केमरे का फोकस उनकी तरफ कैसे आएगा
    इसलिए कुछ ना कुछ घटिया हरकतें करते रहते हैं मीडिया में बने रहने के लिए ऐसी घटिया हरकतें करते हैं
    आज अगर माननीय श्री बालासाहेब ठाकरे साहेब जिंदा होते तो वही इन दोनों का सबक सिखाते

  7. हिंदू और हिंदी मैं अंतर है।हिंद नदी में बसे लोगों को हिंदी बोलते है।इसमें सब हिन्दू,मुस्लिम, ईसाई सब आते हैं।यह सिर्फ सनातन का नहीं सभी का हैं।हिंदी है हम।सभी ने लड़ाआईया लड़ी हैं।

  8. मुस्लिम के बारे कुछ भी बक दो और अपना राजनीति चमकाओ। आगे नक्सलवाद कम करो ।दहेज परथा बंद करो। मुस्लिमों मैं लड़की की कमी नहीं है ।

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