May 27, 2026
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ON THIS DAY: क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे गेंदबाज हुए हैं, जिन्होंने अपनी रफ्तार या फिर टर्न से बल्लेबाजों को परेशान किया. हालांकि कुछ गेंदबाज ऐसे भी रहे, जिन्होंने अपनी जबरदस्त लाइन-लेंथ और अनुशासन से बल्लेबाजों की सांसें रोक दीं. भारतीय क्रिकेट के ऐसे ही एक नाम थे बापू नाडकर्णी. आज ही के दिन, 1964 में उन्होंने टेस्ट क्रिकेट का ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसे आज भी दुनिया का सबसे कंजूस गेंदबाजी स्पेल माना जाता है.

इंग्लैंड के खिलाफ चला था बापू का जादू

1964 में इंग्लैंड की टीम भारत दौरे पर टेस्ट सीरीज खेल रही थी. चेन्नई में खेले गए टेस्ट मैच के तीसरे दिन इंग्लैंड की पहली पारी के दौरान बापू नाडकर्णी ने गेंदबाजी से इतिहास रच दिया. बाएं हाथ के स्पिनर नाडकर्णी ने लगातार 21 मेडन ओवर डालकर बल्लेबाजों को पूरी तरह जकड़ लिया. उनके खिलाफ 131 गेंदों तक एक भी रन नहीं बना.

इस पारी में उन्होंने कुल 32 ओवर डाले, जिसमें से 27 ओवर मेडन रहे. पूरे स्पेल में उन्होंने सिर्फ 5 रन खर्चा किए और कोई विकेट नहीं हासिल किया. हालांकि उनका असर विकेट से कहीं ज्यादा खतरनाक था. उनकी इकॉनमी रेट सिर्फ 0.15 रही, जो आज भी टेस्ट क्रिकेट में एक पारी का सबसे किफायती प्रदर्शन है.

मैच का हाल और दूसरी पारी का योगदान

इस टेस्ट मैच की पहली पारी में भारत ने 457 रन बोर्ड पर लगाए. जबकि इंग्लैंड की टीम 317 रन पर सिमट गई. दूसरी पारी में भारत ने 152 रन बनाकर पारी घोषित की.  जवाब में इंग्लैंड ने 5 विकेट पर 241 रन बनाए और जिसके चलते मैच ड्रॉ पर खत्म हुआ.

दूसरी पारी में भी बापू नाडकर्णी असरदार रहे. उन्होंने 6 ओवर में 6 रन देकर 2 बल्लेबाजों को पवेलियन चलता किया. इस मैच में भारत ने एक पारी में 10 गेंदबाजों का इस्तेमाल किया, जो उस समय एक रिकॉर्ड था.

भारत के सबसे किफायती गेंदबाजों में शुमार

बापू नाडकर्णी ने भारत के लिए 1955 से 1968 तक 41 टेस्ट मैच खेले और उनके नाम 88 विकेट दर्ज हैं. इस दौरान उनकी टेस्ट करियर इकॉनमी सिर्फ 1.67 की रही. 25 से ज्यादा टेस्ट खेलने वाले गेंदबाजों में उनसे बेहतर इकॉनमी सिर्फ दक्षिण अफ्रीका के ट्रेवर गोडार्ड की रही है.

बल्ले से भी था दम

नाडकर्णी सिर्फ गेंदबाज ही नहीं, बल्कि उपयोगी बल्लेबाज भी थे. उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में एक शतक और 7 अर्धशतक लगाए. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनके नाम 500 से ज्यादा विकेट और करीब 9 हजार रन दर्ज हैं.  17 जनवरी 2020 को उन्होंने मुंबई में अंतिम सांस ली, लेकिन उनकी कंजूस गेंदबाजी का यह ऐतिहासिक कारनामा आज भी क्रिकेट प्रेमियों को हैरान करता है. 



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