साल 2025 एंटरटेनमेंट की दुनिया के लिए अच्छा साबित हुआ है. ‘छावा’, ‘सैय्यार’ और ‘कांतारा: चैप्टर 1’ जैसी फिल्मों ने इंडियन बॉक्स ऑफिस को काफी फायदा पहुंचाया है, और अब साल के आखिर में एक ऐसी बॉलीवुड फिल्म रिलीज हुई है जो सारे रिकॉर्ड तोड़ सकती है. हम बात कर रहे हैं ‘धुरंधर’ की, जिसमें रणवीर सिंह, संजय दत्त, अक्षय खन्ना, आर. माधवन और अर्जुन रामपाल जैसे बॉलीवुड के 5 धुरंधरों को एक साथ पर्दे पर आदित्य धर ने उतारा है. प्रोडक्शन कंपनी जियो स्टूडियोज और बी62 स्टूडियो की यह फिल्म आज यानी 5 दिसंबर 2025 को थिएटर में रिलीज हुई है. मेरे हिसाब से तो यह 2025 की सबसे बड़ी फिल्म साबित हो सकती है.
फिल्म की कहानी दमदार है. 214 मिनट लंबी होने के बावजूद यह फिल्म आपको कहीं से भी बोर नहीं होने देगी. यह रणवीर सिंह के करियर की पहली इतनी लंबी फिल्म है, जिसमें उनकी भूमिका की जितनी भी तारीफ की जाए वो कम होगी. इस फिल्म का सबसे बड़ा विस्फोट है रणवीर सिंह का किरदार जो दर्द से गुजरा है, टूटन से बना है और देश के लिए खतरे में कूदने का साहस रखता है. गुस्से से भरे एक नौजवान से लेकर दुश्मन के दिल में घुस जाने वाले अंडरकवर हथियार तक का सफर रणवीर इतनी तीव्रता से निभाते हैं कि दर्शक उनसे नजर हटाना भूल जाता है. दूसरे हाफ में उनका हर सीन ऐसा लगता है जैसे स्क्रीन पर बिजली गिर रही हो, यह परफॉर्मेंस थिएटर में तालियां, सीटी और खामोशी तीनों एक साथ खींच लेता है.
वहीं, फिल्म का अंडरवर्ल्ड खंड उतना ही खतरनाक है जितना वास्तविक. अक्षय खन्ना का रेहमान डकैत, एक शांत, लेकिन बेहद जहरीला दिमाग, आंखों में बसे डर के साथ अभिनय का पाठ पढ़ाता है. संजय दत्त का ‘द जिन्न’ अवतार एसपी चौधरी असलम के रूप में और अर्जुन रामपाल का मेजर इकबाल का करिदार भी आपका सभी का दिल जीत लेगा, और सारा अर्जुन की मासूम मजबूती भी तारीफ के काबिल है. ये सारे किरदार मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाते हैं जो दर्शक को भीतर तक खींच लेता है. वो कहते हैं न कुछ फिल्में सिर्फ देखी नहीं जातीं, महसूस की जाती हैं और धुरंधर उन्हीं में से एक है. यह फिल्म भारतीय खुफिया इतिहास, आतंक की सच्चाई और उन अनसुने योद्धाओं की दुनिया खोलती है जिनकी लड़ाई में न शोर है, न पहचान… सिर्फ कर्तव्य है. शुरुआत से ही यह स्पष्ट हो जाता है कि धुरंधर किसी आम थ्रिलर की तरह नहीं बनी, यह एक मिशन भावना से जन्मी फिल्म है, जो दर्शक को पर्दे के पीछे चलने वाली उस जंग में ले जाती है जहां हर सांस, हर कदम और हर फैसला देश से बड़ा नहीं होता.
निर्देशक आदित्य धर यहां अपनी सबसे परिपक्व, सबसे साहसी और सबसे तीखी फिल्म लेकर आए हैं. उनकी पकड़ गति, टेक्निक और भावनाओं पर बराबर रहती है. 196 मिनट का लंबा समय भी कभी बोझ नहीं बनता- हर दृश्य एक उद्देश्य लेकर आता है, हर मोड़ कहानी को और गहरा कर देता है. इंटरवल पर आने वाला ट्विस्ट शरीर में बिजली सी दौड़ा देता है, जबकि दूसरा हाफ रणनीति, धोखा, राजनीति और जालसाजी का ऐसा संग्राम बन जाता है कि दर्शक के पास पलक झपकने का भी समय नहीं बचता. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर पूरा अनुभव और भी ऊंचा कर देता है. यहां बीएमजी सिर्फ संगीत नहीं, एक युद्ध का नाद है- हर धमाका, हर खुलासा और हर जोखिम संगीत के साथ ऐसा टकराता है कि सिनेमा हॉल की हवा तक कांपती है. इसे आसानी से दशक की सर्वश्रेष्ठ बैकग्राउंड स्कोर में गिना जा सकता है.
हिंसा सीमित है, पर फिल्म की भावनात्मक मार बेहद भारी है. यह कहानी सिर्फ एजेंटों की लड़ाई नहीं, उनकी कुर्बानियों, उनके डर और देश के लिए किए गए त्याग की कहानी है. निर्माताओं (आदित्य धर, लोकेश धर और ज्योति देशपांडे) ने मिलकर एक ऐसा विशाल, प्रामाणिक और तकनीकी रूप से प्रभावशाली ब्रह्मांड खड़ा किया है, जो भारतीय सिनेमा को नई दिशा देता है. बड़े सेट, कच्चा एक्शन, साहसी लेखन और दमदार कास्ट- हर फ्रेम में उनका विश्वास साफ झलकता है. कुल मिलाकर देखा जाए तो धुरंधर सिर्फ एक फिल्म नहीं, यह भारत के छिपे हुए योद्धाओं का सलाम है, एक संवेदनशील दर्पण है और एक ऐसा सिनेमाई अनुभव जिसे एक बार नहीं, दो बार देखना बनता है. बता दें, ‘धुरंधर’ की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि इसका दूसरा पार्ट मार्च 2026 में रिलीज किया जाएगा. मेरी ओर से इस फिल्म को 5 में से 4 स्टार.
