March 13, 2026
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हिंदू धर्म में ‘पंचकन्याएं’, साहस और संघर्ष ने बना दिया देवियों से बड़ा पूजनीय

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International Women Day 2026: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जा रहा है. हिंदू धर्म में हमेशा महिलाओं को सर्वोपरि माना गया है और उनकी ही वजह से संपूर्ण सृष्टि चल रही है. वैसे तो हिंदू धर्म में कई शक्तिशाली महिलाएं हैं लेकिन 5 ऐसी महिलाएं हैं, जो देवियां ना होने के बाद भी उनसे बड़ी पूजनीय बन गई हैं. उन्होंने अपना यह कीर्तमान साहस, धैर्य और संघर्ष से स्थापित किया जाता है.

International Women Day 2026: 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है. हिंदू धर्म में महिलाओं को शक्ति स्वरूप और जगत की जननी कहा गया है. माना जाता है कि नारी के बिना सृष्टि की निरंतरता संभव नहीं है, क्योंकि वही नई पीढ़ी को जन्म देकर जीवन की धारा को आगे बढ़ाती है. हमारी परंपरा में मां दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती को क्रमशः शक्ति, समृद्धि और ज्ञान की देवी के रूप में पूजा जाता है. यह भी माना जाता है कि इन देवियों के गुण प्रत्येक स्त्री में किसी ना किसी रूप में मौजूद होते हैं. हालांकि हमारे पुराणों में 5 ऐसी स्त्रियों का भी उल्लेख मिलता है, जिन्हें देवी नहीं माना गया, फिर भी उनके साहस, धैर्य और जीवन संघर्ष के कारण उन्हें अत्यंत पूजनीय स्थान प्राप्त है. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इन पांच आदर्श स्त्रियों के बारे में जानना प्रासंगिक है.

ब्रह्म पुराण में एक प्रसिद्ध श्लोक मिलता है- “अहिल्या द्रौपदी तारा कुंती मंदोदरी तथा. पंचकन्याः स्मरेन्नित्यं महापातकनाशनम्॥”
इस श्लोक में अहिल्या (गौतम ऋषि की पत्नी), द्रौपदी (यज्ञसेनी), तारा (बाली की पत्नी), कुंती (पांडवों की माता) और मंदोदरी (रावण की पत्नी) को पंचकन्या के रूप में स्मरण करने की बात कही गई है. माना जाता है कि इस श्लोक के सुबह उच्चारण से सारे पाप नाश हो जाते हैं. इन पांचों स्त्रियों का जीवन संघर्ष, धैर्य और नैतिक शक्ति का उदाहरण माना जाता है.किसी ने कठिन परिस्थितियों में राज्य की जिम्मेदारी संभाली, तो किसी ने अपने सम्मान और न्याय के लिए संघर्ष का मार्ग चुना.इसलिए कुछ धार्मिक अनुष्ठानों और व्रतों में भी पंचकन्याओं का स्मरण किया जाता है.

अगर इनके जीवन पर दृष्टि डालें तो अहिल्या, महर्षि गौतम की पत्नी थीं. पुराणों के अनुसार वे अत्यंत रूपवान और विदुषी थीं. देवराज इंद्र ने छल से उनका अपमान किया. देवराज इंद्र ने छल से अहिल्या के स्त्रीत्व को ठेस पहुंचाई, जिसके बाद महर्षि गौतम के श्राप से वे पत्थर बन गईं. बाद में भगवान राम के स्पर्श से उन्हें मुक्ति मिली.

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द्रौपदी, जिन्हें यज्ञसेनी भी कहा जाता है, उन्होंने पूरे जीवन अपने सम्मान की लड़ाई लड़ी. उन्होंने अपने साथ हुए दुर्व्यवहार को माफ नहीं किया, बल्कि आने वाले काल को संदेश देने के लिए युद्ध को चुना. उन्होंने चुना कि महिलाओं पर अगर कोई हाथ डालेगा तो केवल एक घर नहीं बल्कि पूरा संसार जलेगा.

तारा, वानरराज बाली की पत्नी थीं. बाली की मृत्यु के बाद उन्होंने राज्य की स्थिरता बनाए रखने के लिए सुग्रीव से विवाह किया और अपनी बुद्धिमत्ता व दूरदर्शिता से शासन व्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. रानी तारा ने अपनी प्रजा के लोगों की जान बचाई और उनको माता की तरह आशीर्वाद भी दिया.

कुंती को भी असाधारण धैर्य और त्याग का प्रतीक माना जाता है. उन्होंने कठिन परिस्थितियों में अपने पांचों पुत्रों का पालन-पोषण किया और उन्हें धर्म, साहस और कर्तव्य का मार्ग सिखाया. हर पल कोई ना कोई परेशानी उनके जीवन में रही लेकिन वह अडिग होकर परेशानियों का सामना किया और अपने पांचों पुत्रों को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बनाया.

पंचकन्याओं में अंतिम नाम मंदोदरी का आता है, जो रावण की पत्नी थीं. वे भगवान शिव की परम भक्त मानी जाती हैं और उनको नाग कन्या भी कहा जाता है. रामायण के अनुसार मंदोदरी ने कई बार रावण को सीता का हरण छोड़कर धर्म का मार्ग अपनाने की सलाह दी, लेकिन रावण ने अपने अहंकार के कारण उनकी बात नहीं मानी.

इन 5 महिलाओं का जीवन यह संदेश देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, साहस और नैतिकता का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए. यही कारण है कि भारतीय परंपरा में इन्हें आदर्श नारी के रूप में स्मरण किया जाता है.



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