June 1, 2026
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चाणक्य नीति से जानें पति-पत्नी के उम्र का अंतर कितना अंतर रोक सकता है तलाक

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Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य ने पति-पत्नी की उम्र के बीच के अंतर को लेकर एक नीति बनाई है. नीति में कहा गया है कि दोनों के बीच का अंतर जितना कम या ज्यादा होगा, उसका प्रभाव वैवाहिक जीवन पर वैसा ही पड़ेगा. क्योंकि दोनों के बीच के रिश्ते भी उसी हिसाब से तय होंगे क्योंकि भारतीय समाज में विवाह एक पवित्र बंधन है, इसे सात जन्मों का बंधन माना जाता है. चाणक्य ने पति-पत्नी के बीच आयु अंतर के बारे में सलाह दी है, जो एक सुखी वैवाहिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण है…

Chanakya Niti: जब भी लड़का या लड़की के घर में विवाह की बात चलती है तो सबसे पहले उम्र पूछी जाती है. भारतीय समाज में शादी के लिए लड़के की उम्र कम ही देखते हैं. लड़का चाहें एक साल बड़ा हो या फिर 10 साल, इस पर कोई चर्चा नहीं करता. इसी संदर्भ को लेकर आचार्य चाणक्य ने एक नीति में पति-पत्नी के बीच क्या है उम्र का सही अंतर बताया है. चाणक्य के विचार आज भी वैवाहिक जीवन के लिए मार्गदर्शक माने जाते हैं. उनका मानना था कि पति-पत्नी के बीच सही उम्र का अंतर ना केवल रिलेशनशिप में मैच्योरिटी लाता है, बल्कि आपसी समझ, सम्मान और धैर्य भी बढ़ाता है. जब उम्र का फासला संतुलित हो तो जीवन के लक्ष्य, सोच और अपेक्षाएं एक जैसी रहती हैं, जिससे टकराव कम होता है और तलाक जैसी स्थितियों से काफी हद तक बचा जा सकता है.

आचार्य चाणक्य अपनी नीति में कहते हैं कि पति और पत्नी के बीच जितना कम रहता है, उतना अच्छा रहता है. 3 से 5 साल तक का अंतर दोनों के लिए बेहतर माना जाता है. चाणक्य कहते हैं कि पति-पत्नी के बीच उम्र का अंतर जितना कम होगा, दोनों के बीच समझ उतनी ज्यादा बढ़ेगी. दोनों एक साथ गलती करेंगे, दोनों एक साथ खुशहाल जीवन जीएंगे और दोनों गृहस्थ जीवन को साथ-साथ सीखेंगे. इसलिए शादी के समय उम्र का अंतर में जरूर ध्यान देना चाहिए.

चाणक्य नीति में कहते हैं कि पति-पत्नी के रिश्ते में शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होना बेहद जरूरी होता है. अगर पति-पत्नी के रिश्ते में उम्र का अंतर बेहद ज्यादा है तो कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. उम्र में ज्यादा अंतर होने से दोनों के बीच समझ की कमी की वजह से झगड़े बढ़ेंगे और रोज-रोज की लड़ाई से रिश्ता भी कमजोर हो जाएगा और बात तलाक तक पहुंच जाएगी. उम्र में अंतर ज्यादा होने से दोनों को एक दूसरे की भावनाओं को समझने में ज्यादा परेशानी होती है.

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चाणक्य ने यह भी बताया है कि किसी उम्रदराज लड़के को कम उम्र की लड़की से शादी नहीं करनी चाहिए अन्यथा शादी ज्यादा लंबे समय तक नहीं चलेगी. उम्र में इतना बड़ा अंतर होने से दोनों के बीच समझ मजबूत नहीं होगी, जिससे गृहस्थ जीवन सही से नहीं चल पाएगा. भारतीय समाज में पारंपरिक रूप से पति-पत्नी की उम्र में 3 से 5 वर्ष का अंतर स्वीकार्य है. समाज में यह आम बात है कि पुत्रियों की उम्र पुत्रों से छोटी होनी चाहिए, भारतीय विवाह इसी प्रकार संरचित हैं. हालांकि, कभी-कभी आयु का अंतर 10 से 15 वर्ष तक भी हो जाता है.

आज भी भारत में कई ऐसे परिवार हैं, जहां महिलाएं पुरुषों से छोटी होती हैं. यानी, दुल्हन दूल्हे से छोटी होनी चाहिए. कई लोगों का मानना ​​है कि अगर दूल्हा 30 साल का है, तो दुल्हन की उम्र 30 साल से कम ही होनी चाहिए. पहले पति-पत्नी की उम्र में 6 से 8 साल का अंतर होता था, लेकिन अब यह धीरे-धीरे कम हो रहा है. विज्ञान में इसके लिए अंग्रेजी शब्द ‘कॉपुलेशन’ का प्रयोग किया जाता है. इसके अनुसार, जब पुरुष और महिला के शरीर में हार्मोनल परिवर्तन होते हैं तो उनमें यौन संबंध बनाने की क्षमता आ जाती है.

लड़कियों में यह बदलाव लगभग 13 वर्ष की आयु से दिखने लगता है. वहीं लड़कों में यह बदलाव 9 से 15 वर्ष की आयु के बीच होता है. इसका अर्थ है कि लड़कियों में ये हार्मोनल परिवर्तन लड़कों की तुलना में पहले होते हैं. परिणामस्वरूप, वे लड़कों की तुलना में कम उम्र में ही शारीरिक संबंध बनाने में सक्षम हो जाती हैं. हालांकि, इस हार्मोनल बदलाव का यह मतलब नहीं है कि महिलाओं या पुरुषों को देर से शादी करनी चाहिए. दुनिया के कई देशों में शादी की न्यूनतम उम्र तय है, यह उम्र 16 से 18 साल के बीच है. हमारे देश में शादी के लिए लड़की की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष होनी चाहिए.

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