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थलापति विजय इंडियन सिनेमा के मैप पर एक ऐसा नाम है, जिसकी पॉपुलैरिटी नॉर्थ से साउथ तक है. अभी अपनी पार्टी तमिलनाडु वेत्री कझगम (TVK) के साथ तमिलनाडु की पॉलिटिक्स में हिस्टोरिक जीत हासिल करने वाले विजय का फिल्मी करियर भी उतार-चढ़ाव और दिलचस्प इत्तेफाक से भरा रहा है. खासकर 2009 से 2012 के बीच का समय उनके करियर के लिए एक एक्सपेरिमेंटल टेस्ट था, जब उन्होंने 2 बहुत सफल बॉलीवुड फिल्मों के ऑफिशियल रीमेक में हाथ आजमाया. दिलचस्प बात यह है कि जहां आमिर खान की फिल्म की कहानी उनके लिए लकी साबित हुई और उनके करियर को एक नई दिशा दी, वहीं बॉबी देओल की ब्लॉकबस्टर फिल्म का फॉर्मूला उनके लिए अनलकी साबित हुआ. आइए, जानते हैं क्या है पूरी कहानी.

नई दिल्ली. साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री, खासकर तमिल सिनेमा पर थलापति विजय का असर कोई सीक्रेट नहीं है. अक्सर देखा गया है कि बॉलीवुड स्टार्स ने विजय की ओरिजिनल तमिल फिल्मों का रीमेक बनाकर अपने करियर को बूस्ट किया है, जैसे सलमान खान की ‘वांटेड’. लेकिन, 2009 से 2012 के बीच एक ऐसा दौर था जब विजय खुद बॉलीवुड की सबसे अच्छी कहानियों को तमिल स्क्रीन के लिए अडैप्ट करने की कोशिश कर रहे थे. इस दौरान, उन्होंने दो बड़े स्टार्स बॉबी देओल और आमिर खान स्टारिंग फिल्में चुनीं, लेकिन नतीजे बिल्कुल अलग थे. (तस्वीर बनाने में एआई की मदद ली गई है.)

1998 में अब्बास-मस्तान की डायरेक्ट की हुई फिल्म ‘सोल्जर’ ने बॉलीवुड में तहलका मचा दिया था, जिसमें बॉबी देओल और प्रीति जिंटा थे. बॉबी देओल का चश्मा पहनने का स्टाइल और ‘सोल्जर-सोल्जर’ गाना आज भी लोगों की यादों में ताजा है. यह फिल्म उस साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक थी. इसकी सफलता से इम्प्रेस होकर, डायरेक्टर प्रभु देवा ने थलापति विजय के साथ ‘विल्लू’ नाम से एक तमिल रीमेक बनाने का फैसला किया.

विजय और प्रभु देवा की जोड़ी पहले ‘पोक्किरी’ ( सलमान खान की ‘वांटेड’ का ओरिजिनल वर्शन) जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म दे चुकी थी, इसलिए ‘विल्लू’ से उम्मीदें बहुत ज्यादा थीं. जनवरी 2009 में रिलीज हुई इस फिल्म में विजय ने बॉबी देओल का किरदार निभाया था. फिल्म एक्शन, डांस और ग्लैमर से भरपूर थी, लेकिन किसी तरह ‘सोल्जर’ की सादगी और सस्पेंस को दिखाने में नाकाम रही, जिसने बॉबी देओल को सुपरस्टार बनाया था. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही और इसे विजय के करियर की सबसे बड़ी नाकामयाब फिल्मों में से एक माना गया. बॉबी देओल का ‘लकी’ फॉर्मूला तमिल दर्शकों के बीच विजय के लिए अनलकी साबित हुआ.
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‘विल्लू’ के फेल होने के बाद, विजय का करियर एक अहम मोड़ पर था, वे एक ऐसी फिल्म की तलाश में थे जो उनकी ‘मास’ इमेज को दर्शकों से जोड़ सके. उन्होंने 2009 और 2011 के बीच कुछ और फिल्में कीं, लेकिन वे भी बॉक्स ऑफिस पर एवरेज रहीं. विजय को एहसास हुआ कि उन्हें सिर्फ एक्शन से नहीं, बल्कि एक मजबूत कहानी से वापसी करनी होगी.

इस बीच, आमिर खान की ‘3 इडियट्स (2009)’ ने बॉलीवुड में सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. राजकुमार हिरानी की इस मास्टरपीस फिल्म ने इंडियन एजुकेशन सिस्टम पर तीखा सटायर पेश किया. साउथ इंडिया के जानेमाने डायरेक्टर एस. शंकर ने इसका तमिल रीमेक बनाने का काम किया और थलापति विजय को लीड रोल में लिया. फिल्म का नाम ‘ननबन’ था.

विजय के लिए यह बहुत बड़ा रिस्क था, क्योंकि आमिर खान के ‘रैंचो’ के किरदार में खुद को ढालना किसी भी एक्टर के लिए चैलेंजिंग था. ‘ननबन’ जनवरी 2012 में रिलीज हुई और इसने हिस्ट्री रच दी. आमिर खान की कहानी विजय के लिए इतनी लकी साबित हुई कि फिल्म ने न सिर्फ बंपर बॉक्स ऑफिस कलेक्शन किया बल्कि विजय को एक सीरियस एक्टर के तौर पर भी पहचान दिलाई.

हालांकि ‘ननबन’ अपनी ओरिजिनल फिल्म की तरह वर्ल्डवाइड ब्लॉकबस्टर नहीं रही, लेकिन यह तमिल सिनेमा के लिए बहुत बड़ी हिट थी. आमिर खान के चंचल और इंटेलिजेंट किरदार को विजय ने आसानी से निभाया और किसी भी रोल में ढलने की उनकी काबिलियत साबित हुई.
