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हम जिस शख्सियत की बात कर रहे हैं, उनके रचे गाने सिर्फ गाने नहीं हैं, सांस्कृतिक विरासत है, जिसे दशकों से संगीत-प्रेमी दिलों में संजोय हुए हैं. उन्होंने लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के साथ सुपरहिट गाने दिए हैं. वे पाकिस्तान से भारत आए थे. आज उनका पोता बॉलीवुड पर राज कर रहा है.

नई दिल्ली: अगर आप हिंदी गाने के दीवाने हैं, तो आपने ‘जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा’, ‘लगा चुनरी में दाग’, ‘संसार से भागे फिरते हो’, और ‘जिंदगी भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात’ जैसे हिट गाने कभी-न-कभी सुने होंगे, जो आपने-आप में एक दौर और संस्कृति को बयां करते हैं. इन गानों को रचने वाले लीजेंड संगीतकार के बारे में आज आपको बताएंगे.

रोशन परिवार एंटरटेनमेंट जगत में सबसे मशहूर परिवारों में से एक है. जबकि हम सभी ऋतिक रोशन, राकेश रोशन और राजेश रोशन की बात करते हैं, कई लोग नहीं जानते कि रोशन परिवार की कहानी पीढ़ियों पहले शुरू हुई थी.

ऋतिक, राकेश और राजेश रोशन के सिनेमा में अपनी पहचान बनाने से पहले, परिवार की जड़ें उन इलाकों में थीं जो अब पाकिस्तान में हैं. आइए हम परिवार की शुरुआत और जर्नी के बारे में गहराई से जानें.
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ऋतिक रोशन के दादा रोशन लाल नागरथ में वो टैलेंट था, जिसने रोशन विरासत की नींव रखी. उनका जन्म 14 जुलाई 1917 को पंजाब प्रांत के गुजरांवाला (अब पाकिस्तान) में हुआ था और उनकी संगीत के प्रति जुनून कम उम्र से ही जाहिर हो गई थी.

रोशन नाम से मशहूर संगीतकार ने लखनऊ के मैरिस कॉलेज में पंडित एसएन रतनजनकर से तालीम ली, जो भारत के सबसे सम्मानित शास्त्रीय संगीतकारों में से एक थे.

रोशन ने अपनी कला को निखारा और मैहर के प्रसिद्ध सरोद उस्ताद अलाउद्दीन खान के तहत सरोद बजाने में महारत हासिल की. उन्होंने 1940 में दिल्ली में ऑल इंडिया रेडियो में असिस्टेंट स्टाफ के रूप में शामिल होकर इसराज बजाया.

रोशन लाल नागरथ के सपने बड़े थे. उन्होंने 1948 में नौकरी छोड़ दी और बंबई में संगीत निर्देशक के रूप में काम खोजने के लिए निकल पड़े. रोशन ने 1949 की फिल्म सिंगार में ख्वाजा खुर्शीद अनवर के असिस्टेंट के रूप में काम किया.

रोशन लाल नागरथ ने संघर्ष किया, लेकिन आखिरकार उनका ब्रेकथ्रू तब आया, जब मेकर किदार शर्मा ने उन्हें ‘नेकी और बदी’ के लिए संगीत बनाने की जिम्मेदारी सौंपी. हालांकि, उनकी पहली फिल्म सफल नहीं हुई, किदार शर्मा ने उन्हें एक और मौका दिया.

‘बावरे नैन’ एक बड़ा म्यूजिकल हिट बन गया, जिसने हिंदी फिल्म संगीत में रोशन की मौजूदगी दर्ज कराई. 1950 के दशक में रोशन ने मोहम्मद रफी, मुकेश और तलत महमूद जैसे गायकों के साथ काम किया और ‘हम लोग’, ‘मल्हार’, ‘अनहोनी’, ‘शीशम’ और ‘नौबहार’ जैसी फिल्मों के लिए यादगार गाने बनाए.

रोशन का रचा मीरा भजन ‘ए री मैं तो प्रेम दीवानी’ आइकॉनिक बन गया, जिसे लता मंगेशकर ने फिल्म ‘नौबहार’ के लिए गाया था. रोशन ने लोक संगीत को हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के साथ मिलाकर ‘बरसात की रात’, ‘आरती’, ‘अनोखी रात’, ‘ताज महल’, ‘दिल ही तो है’ और ‘चित्रलेखा’ जैसी फिल्मों में कालजयी गाने बनाए.
