May 26, 2026
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नई दिल्ली. 12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए सीरियल ब्लास्ट्स ने पूरी दुनिया को हिला दिया था. 257 लोगों की मौत, 700 से ज्यादा घायल और अर्थव्यवस्था को करीब 27 करोड़ डॉलर का नुकसान हुआ था. दाऊद इब्राहिम और उसके गिरोह ने शहर को खून से लाल कर दिया. इस केस की जांच में IPS अधिकारी राकेश मारिया की भूमिका ऐतिहासिक रही. लेकिन इस जांच का एक ऐसा चैप्टर था, जो न सिर्फ अपराध की दुनिया से जुड़ा, बल्कि बॉलीवुड के एक सुपरस्टार की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल गया वो नाम है संजय दत्त… हाल ही में देसी स्टूडियोज के साथ एक इंटरव्यू में राकेश मारिया ने 32 साल पुरानी इस घटना को याद किया. उन्होंने बताया कि कैसे संजय दत्त का नाम इस केस में आया और कैसे उन्होंने माना कि वो इस साजिश का हिस्सा बन बैठे थे.

राकेश मारिया ने वो पल याद किया और बताया कैसे संजय दत्त का नाम इस केस में सामने आया और गिरफ्तारी के बाद पहली बार जब संजय ने अपने पिता, दिग्गज एक्टर और राजनेता सुनील दत्त को देखा तो वह बच्चे की तरह रोने लगे. उन्होंने बताया कि वो पल ऐसा था कि सुनील दत्त का चेहरा पीला पड़ गया था.

रेस्तरां मालिकों ने खोला था संजू बाबा का नाम

1993 के ब्लास्ट्स की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच ने संभाली थी. राकेश मारिया तब एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस थे, उन्होंने इस केस को लीड किया. जांच में पता चला कि ब्लास्ट्स में इस्तेमाल हुए हथियारों और विस्फोटकों को मुंबई में ही छिपाया गया था. मारिया के मुताबिक, संजय दत्त का नाम सबसे पहले हनीफ कादावाला और समीर हिंगोरा के जरिए सामने आया. हनीफ बांद्रा के एक फेमस रेस्टोरेंट के मालिक थे, जबकि समीर उस वक्त इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के प्रेसिडेंट थे. दोनों पर अवैध हथियार रखने का आरोप लगा. पूछताछ में उन्होंने आरोपों से इनकार किया, लेकिन मारिया से मिलने की जिद की. मारिया ने बताया, ‘उन्होंने कहा, ‘बड़े लोगों को क्यों नहीं पकड़ते?’ मैंने पूछा, ‘किन बड़े लोगों को मैंने नहीं पकड़ा?’ फिर उन्होंने संजय दत्त का नाम लिया. मैं हैरान रह गया. संजू बाबा का इससे क्या लेना-देना?’

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एयरपोर्ट से ही संजय को किया गया ता गिरफ्तार.

संजय को सीधे एयरपोर्ट से उठाया

हनीफ और समीर ने कन्फेस किया कि आतंकियों को हथियारों को कार की कैविटी से निकालने के लिए शांत जगह चाहिए थी. उन्होंने संजय दत्त का बंगला सुझाया. मारिया के मुताबिक, ‘आतंकी संजय के घर पहुंचे. संजय को पहले ही कॉल आ चुकी थी. उन्होंने कार पार्क करने और सामान उतारने को कहा.’ जांच में पता चला कि संजय ने कुछ हथियार खुद रख लिए, लेकिन ज्यादातर आतंकियों को लौटा दिए, जो ब्लास्ट्स में इस्तेमाल हुए. मारिया ने कहा, ‘संजय ने गलती की, लेकिन वो आतंकी नहीं था. वो डर गया था.’ जब जांच टीम को संजय के इन्वॉल्वमेंट का पता चला, तो उन्हें क्वेश्चनिंग के लिए बुलाना जरूरी था. लेकिन संजय उस वक्त मॉरीशस में एक फिल्म की शूटिंग कर रहे थे. मारिया ने फैसला किया कि उन्हें भारत लौटने का इंतजार करेंगे. कुछ दिनों बाद जब संजय मुंबई एयरपोर्ट पर उतरे, तो मारिया की टीम ने उन्हें सीधे कस्टडी में ले लिया. मारिया ने याद करते हुए बताया कि हमने एयरपोर्ट से ही उन्हें उठा लिया. कोई ड्रामा नहीं, सीधा क्राइम ब्रांच ले गए.

थप्पड़ मारा, बाल खींचे, तब बताई थी सच्चाई

पूछताछ का वो सीन आज भी मारिया के जेहन में ताजा है. संजय को मुंबई क्राइम ब्रांच के एक कमरे में रखा गया, जिसमें अटैच्ड बाथरूम था, लेकिन दरवाजा हटा दिया गया था. दो कांस्टेबल कमरे में तैनात थे. मारिया ने बताया कि उन्होंने सख्त हिदायत दी थी, ‘संजय को सिगरेट न दो, किसी को फोन न करने दो.’ रात 2:30 बजे संजय कमरे में बैठे, और सुबह 8 बजे मारिया अंदर घुसे और पूछा, ‘तुम अपनी स्टोरी बताओगे या मैं तुम्हारा रोल बता दूं?’ संजय ने कहा, ‘मैं बेकसूर हूं.’ मारिया ने बताया कि आखिरकार गुस्सा फूट पड़ा. पिछले दिनों का स्ट्रेस, इमोशंस सब बाहर आ गए. संजय कुर्सी पर बैठा था, उसके बाल लंबे थे. मैं पहुंचा, एक थप्पड़ मारा. वो पीछे गिरा, मैंने बाल पकड़कर खींचा और उठाया. बोला, ‘जेंटलमैन की तरह बात करोगे या…?’ फिर संजय ने अकेले में बात करने की बात की.

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इस घटना के बाद संजय दत्त को TADA कोर्ट ने दोषी ठहराया.

सुनील दत्त के देख जब रोने लगे संजय, बोले- पापा, गलती हो गई मेरे से

राकेश मारिया ने बताया कि संजय ने पूरी कहानी कबूल ली. उसने कहा, ‘गलती हो गई, पापा को मत बताना.’ मैंने कहा, ‘कैसे न बताऊं?’ शाम तक सुनील दत्त क्राइम ब्रांच पहुंचे. उनके साथ राजेंद्र कुमार, महेश भट्ट, यश जौहर और पॉलिटिशियन बलदेव खोसा थे. ‘सबने कहा, संजय बेकसूर है, ये नहीं कर सकता.’ लेकिन सबसे इमोशनल मोमेंट तब आया, जब संजय को कमरे में लाया गया. मारिया ने वर्णन किया, ‘संजय ने पिता को देखा, बच्चे की तरह विलख-विलखकर रोया. वो अपने पिता सुनील जी के पैरों पर गिर पड़ा और बोला, ‘पापा, गलती हो गई मेरे से.’ सुनील का चेहरा पीला पड़ गया. मैंने सोचा, किसी भी बाप के लिए ये सीन बर्दाश्त से बाहर है.’ सुनील दत्त, जो खुद एक दिग्गज एक्टरऔर कांग्रेस नेता थे, उन्होंने बेटे की गलती को स्वीकार किया, लेकिन कानूनी लड़ाई लड़ी.

2007 में संजय को हुई थी 6 साल की सजा

इस घटना के बाद संजय दत्त को TADA कोर्ट ने दोषी ठहराया. 2007 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सजा को 6 साल कर दिया. संजय ने 2013 से जेल काटनी शुरू की और 2016 में सजा पूरी की. मारिया ने इंटरव्यू में कहा, टसंजय ने गलती मानी, लेकिन सिस्टम ने सजा दी. ये केस सिखाता है कि सेलिब्रिटी भी कानून से ऊपर नहीं.’ 1993 ब्लास्ट्स में कुल 100 से ज्यादा आरोपी थे, जिनमें दाऊद का भाई अनीस और टाइगर मेमन शामिल थे.



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