July 30, 2026
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मुंबई. संगीत जगत के महान गायक, जिनकी आवाज में अनोखी मिठास और गहरी भावनाएं भरी हैं. उनकी गायिकी इतनी दिलकश है कि उन्हें ‘गणगंधर्वन’ भी कहा जाता है. छह दशकों से अधिक के शानदार करियर में उन्होंने कई भाषाओं में 50 हजार से ज्यादा गाने को आवाज दी. 10 जनवरी 1940 को केरल में जन्मे प्लेबैक सिंगर के.जे. येसुदास (कट्टाससेरी जोसेफ येसुदास) को उनकी शानदार और मधुर आवाज के कारण ‘गणगंधर्वन’ (दिव्य गायक) कहा जाता है.

के.जे. येजुदास ने 6 दशकों के करियर में मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, हिंदी, ओडिया, बंगाली, मराठी सहित अरबी, अंग्रेजी, लैटिन और रूसी जैसी कई भाषाओं में 50 हजार से अधिक गाने रिकॉर्ड किए हैं. यह उपलब्धि उन्हें भारतीय संगीत के इतिहास में सबसे महान गायकों में से एक बनाती है. येसुदास के पिता ऑगस्टाइन जोसेफ एक प्रसिद्ध मलयालम शास्त्रीय गायक और स्टेज एक्टर थे, जो उनके पहले गुरु भी बने.

येसुदास ने 7 की उम्र से ली म्युजिक की शिक्षा

मात्र 7 साल की उम्र में येसुदास ने फोर्ट कोची के एक स्थानीय प्रतियोगिता में भाग लिया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया. बाद में उन्होंने चेम्बई वैद्यनाथ भगवतर जैसे महान गुरु से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली. उन्होंने सिर्फ 7 साल की उम्र में संगीत की शिक्षा लेना शुरू किया. इसके बाद साल 1961 में फिल्म ‘कालपादुकल’ से प्लेबैक सिंगिंग के तौर पर शुरुआत की.

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एआर रहमान के साथ येसुदास. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @varnammalaysia)

येसुदास ने 1971 से हिंदी गाने गाना शुरू किए

येसुदास का करियर 1960 के दशक से शुरू हुआ. साउथ फिल्मों में शुरुआत के बाद 1970 के दशक में उन्होंने बॉलीवुड में एंट्री की और साल 1971 में फिल्म ‘जय जवान जय किसान’ से हिंदी डेब्यू किया. 1975 में आई ‘छोटी सी बात’ के गाने ‘जानेमन जानेमन’ ने उन्हें ऑडियंस के बीच पॉपुलर बना दिया. वहीं, साल 1976 में आए ‘चितचोर’ के गाने ‘गोरी तेरा गांव बड़ा प्यारा’ ने उनके करियर में चार चांद लगाते हुए उन्हें नेशनल अवॉर्ड दिलाए.

येसुदास ने एक दिन में रिकॉर्ड किए 10 से ज्यादा गाने, बनाया रिकॉर्ड

वह एक ही दिन में 10 से ज्यादा गाने को आवाज देने का रिकॉर्ड रखते हैं. 1970-80 के दशक में उन्होंने कई मलयालम फिल्मी गीतों की रचना भी की. पुरस्कारों की बात करें तो येसुदास ने 8 बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड (बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर) जीते हैं. इसके अलावा 5 फिल्मफेयर साउथ अवॉर्ड्स, 30 से ज्यादा स्टेट अवॉर्ड्स (केरल, तमिलनाडु, आंध्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल से) मिले. भारत सरकार ने उन्हें साल 1975 में पद्म श्री, 2002 में पद्म भूषण और 2017 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया. इतने अवॉर्ड्स मिलने पर उन्होंने एक इवेंट में मजाकिया अंदाज में कहा था कि अब उन्हें पुरस्कार न दें, क्योंकि ये बहुत हो गए. येसुदास ने साल 1980 में थरंगिनी स्टूडियो स्थापित किया, जो मलयालम संगीत को स्टीरियो में लाने वाला पहला स्टूडियो रहा.



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