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Who Is Elder Ram or Hanuman: अक्सर मन में सवाल उठता है कि प्रभु श्रीराम और भक्त हनुमान में कौन बड़ा है. उम्र के हिसाब से दोनों में कौन बड़ा है. रामायण में कई प्रसंग ऐसे हैं, जहां भगवान राम ने स्वयं हनुमानजी की महिमा को स्वीकार किया है. यह दर्शाता है कि भगवान भी अपने सच्चे भक्त के प्रति कृतज्ञ होते हैं. आइए शास्त्रों के माध्यम से जानते हैं उम्र में राम बड़े हैं या हनुमान…

Who Is Elder Ram or Hanuman: हिंदू धर्म में भगवान राम और हनुमानजी का संबंध अद्वितीय माना जाता है. एक ओर भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम और विष्णु के अवतार के रूप में पूजा जाता है, वहीं हनुमानजी को उनकी परम भक्ति और शक्ति के साथ महादेव के अवतार के रूप में भी जाना जाता है. हनुमानजी एक भक्त हैं और उन्होंने इससे ज्यादा ना चाहा और ना कुछ बनने की कोशिश की. वह हमेशा रामभक्त के तौर पर जाने गए और राम मर्यादा पुरुषोत्तम के साथ सर्वोत्तम है, उनकी ही मर्जी से संपूर्ण सृष्टि चलायमान है. अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि उम्र के हिसाब से इन दोनों में कौन बड़ा है. धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के आधार पर इसका उत्तर दिलचस्प और ज्ञानवर्धक है. आइए जानते हैं राम बड़े या हनुमान…
भगवान राम का जन्म
शास्त्रों के अनुसार, त्रेता युग में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र और कर्क लग्न में अयोध्या में राजा दशरथ और माता कौशल्या के राजमहल में हुआ था. वे भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं और उन्होंने मानव रूप में जन्म लेकर धर्म की स्थापना की. उनके जीवन की घटनाएं एक निश्चित समय सीमा में घटित होती हैं, यानी उनका अवतार एक कालखंड में सीमित माना जाता है.
हनुमानजी का जन्म
वहीं दूसरी ओर हनुमान जी का जन्म चैत्र मास की पूर्णिमा को माना जाता है, जिसे हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है. कई अन्य मतों के अनुसार, उनका जन्म कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भी मनाया जाता है. हनुमानजी को चिरंजीवी (अमर) माना गया है. उनका जन्म भी त्रेता युग में ही हुआ, लेकिन कई मान्यताओं के अनुसार उनका अस्तित्व भगवान राम के जन्म से पहले का है. हनुमानजी को भगवान शिव का अंशावतार भी माना जाता है और उन्हें यह वरदान प्राप्त है कि वे युगों-युगों तक जीवित रहेंगे.
एक प्रसिद्ध कथन है—
राम बिना हनुमान अधूरे हैं और हनुमान बिना राम।
यह दर्शाता है कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं. आध्यात्मिक रूप से समझें तो भगवान राम आदर्श और ईश्वर का प्रतीक हैं, जबकि हनुमानजी भक्ति और सेवा का. एक हमें जीवन जीने का मार्ग दिखाते हैं, तो दूसरा उस मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है.
एक मत यह भी
कुछ उपनिषद में यह भी बताया गया है कि सभी देवी-देवताओं (विष्णु के अंशों को छोड़कर) ने रामजी के जन्म से पहले ही पृथ्वी पर अवतार ले लिया था, ताकि उनके आगमन के लिए पृष्ठभूमि तैयार की जा सके. इनमें सुग्रीव (सूर्य के पुत्र), बाली (इंद्र के पुत्र) आदि शामिल हैं. इनमें हनुमान (रुद्र के अवतार) भी शामिल हैं. एक कथा यह भी है कि जब राम का जन्म हुआ, तब हनुमानजी और शिवजी ने एक बंदर और मदारी का वेश धारण करके अयोध्या की यात्रा की थी, ताकि वे शिशु रूप में प्रभु श्रीराम के दर्शन कर सकें.
चिरंजीवी हैं हनुमानजी
कुछ धार्मिक कथाओं के अनुसार, बाल्यकाल में ही हनुमानजी ने सूर्य को फल समझकर निगलने का प्रयास किया था, जो उनके असाधारण शक्तियों का प्रमाण है. यह घटना भी उनके प्रारंभिक अस्तित्व को दर्शाती है, जो भगवान राम के अवतार से पहले की मानी जाती है. इस आधार पर देखा जाए तो उम्र के हिसाब से हनुमानजी को भगवान राम से बड़ा माना जाता है, क्योंकि उनका जन्म पहले हुआ और वे आज भी जीवित माने जाते हैं. दूसरी ओर भगवान राम का अवतार एक निश्चित समय के लिए था, जिसके बाद उन्होंने देह त्याग कर अपना दिव्य स्वरूप धारण कर लिया.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें
