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Mohammed Rafi Sad Songs : बॉलीवुड में एक ही नाम से दो या तीन फिल्में कई बार बन चुकी हैं. 1947 में किदार शर्मा के निर्देशन में एक फिल्म थी. राज कपूर-मधुबाला इस फिल्म में लीड रोल में थे. फिल्म कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकी. आगे चलकर 1968 में इसी टाइटल से एक और फिल्म बनी. राजकुमार स्टारर इस फिल्म में मोहम्मद रफी के दो कालजयी गाने थे. दोनों गानों ने इतिहास रच दिया. पिछले 48 साल से इन गानों का क्रेज बरकरार है.

रफी साहब ने सदाबहार अभिनेता राज कुमार के लिए ज्यादातर दर्दभरे गाने गाए हैं. वैसे तो मोहम्मद रफी ने सबसे पहले 1955 की फिल्म ‘घमंड’ में पहली बार अपनी आवाज राज कुमार के लिए दी थी. फिर 1957 की कालजयी फिल्म ‘मदर इंडिया’ में उन्होंने राज कुमार के लिए एक गाना ‘मतवाला जिया, डोले पिया’ गाया. गाना रफी-लता ड्यूएट था. मदर इंडिया फिल्म के गाने शकील बदायूं ने लिखे थे. संगीत नौशाद का था. इस फिल्म की गिनती हिंदी सिनेमा के सार्वकालिक महान फिल्मों में होती है. रफी साहब ने वैसे तो अभिनेता राज कुमार के लिए कई गाने गाए लेकिन उनके तीन सॉन्ग कालजयी साबित हुए. ये गाने थे : छू लेने दो नाजुक होठों को और आ जा तुझको पुकारे मेरा प्यार. तीसरा कालजयी गाना ‘ये दुनिया, ये महफिल.’ आइये जानते हैं तीनों फिल्मों से जुड़े तथ्य….

‘मदर इंडिया’ के बाद 1957 की एक और फिल्म ‘फर्ज और मुहब्बत’ में भी मोहम्मद रफी ने राज कुमार के दो गाने गाए थे. सी. रामचंद्र संगीतकार थे. एक गाना ‘ये हसरत थी कि इस दुनिया में बस दो काम कर जाएं’ बहुत ही दर्दभरा था. 1958 में ‘पंचायत’ फिल्म का एक गाना राज कुमार पर फिल्माया गया था जिसमें रफी साहब की आवाज थी. 1962 में भारत-चीन युद्ध के समय एक नॉन-फिल्मी गाना राज कुमार पर फिल्माया गया था. इस गाने के बोल थे: ‘आवाज दो हम एक हैं…’ इस गाने को गीतकार जावेद अख्तर के पिता जां निसार अख्तर ने लिखा था. संगीतकार खैय्याम थे.

1965 का साल भारतीय सिनेमा के लिए बेहद खास है. इसी साल ‘गाइड’ जैसी महान फिल्म आई थी. इसी वर्ष राज कुमार की एक फिल्म में मोहम्मद रफी ने ऐसा गाना गाया जो अमर हो गया. फिल्म थी ‘काजल’ जिसका निर्देशन राम महेश्वरी ने किया था. यह एक रोमांस ड्रामा फिल्म थी. प्रोड्यूसर पन्नालाल महेश्वरी थे. फिल्म में मीना कुमारी, धर्मेंद्र, राज कुमार लीड रोल में थे. म्यूजिक रवि का था.
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फिल्म का एक गाना ‘छू लेने दो नाजुक होठों को’ बेहद पॉप्युलर हुआ. इस कालजयी गीत को मोहम्मद रफी ने गाया था. गाना राज कुमार पर फिल्माया गया था. ‘काजल’ फिल्म गुलशन नंदा के उपन्यास ‘माधवी’ पर बेस्ड थी. स्क्रीनप्ले फणि मजूमदार ने लिखा था. किदार शर्मा ने डायलॉग लिखे थे. यह 1965 की 10वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.

अभिनेता राज कुमार के लिए मोहम्मद रफी ने 1968 में फिल्म ‘नील कमल’ में एक ऐसा गाना गाया जो आज भी प्रेमियों के दिल में बसा हुआ है. गाने का एक-एक शब्द दिल को चीर देता है. प्यार में चोट खाए प्रेमी अक्सर इस गाने की लाइन को गुनागुनाकर दिल के दर्द को हल्का करने का प्रयास करते हैं. यह कालजयी गाना था : तुझको पुकारे मेरा प्यार’. गाने को संगीतबद्ध रवि ने किया था. गीतकार साहिर लुधियानवी थे. यह एक बेहद दर्दभरा, इमोशनल गीत है जो प्यार की तड़प, विरह की वेदना को बयां करता है.

‘नील कमल’ फिल्म की कहानी पुनर्जन्म पर बेस्ड थी. ‘तुझको पुकारे मेरा प्यार’ गाना फिल्म में कई बार चलता है. इसी फिल्म का एक और टाइमलेस गाना ‘बाबुल की दुआएं लेती जा, जा तुझको सुखी संसार मिले’ था. इस गाने को गाते समय रफी साहब स्टूडियो में रो पड़े थे. दरअसल, एक दिन पहले ही रफी साहब की बेटी की एंगेजमेंट हुई थी. गाना रिकॉर्ड करते समय उनकी आंखों के सामने बेटी की विदाई की तस्वीर झलकने लगी थी.

‘नील कमल’ फिल्म में मनोज कुमार, वहीदा रहमान और राज कुमार लीड रोल में थे. कहानी गुलशन नंदा ने लिखी थी. स्क्रीनप्ले फणि मजूमदार, डायलॉग किदार शर्मा-इला महेश्वरी ने लिखे थे. गीतकार साहिर लुधियानवी थे. ‘काजल’ और ‘नील कमल’ फिल्म की टीम एक ही थी. सभी कलाकारों का काम शानदार था. वहीदा रहमान को ‘गाइड’ के बाद ‘नील कमल’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. इसी फिल्म का एक और गाना ‘मेरे रोम में बसने वाले राम’ भी खूब पॉप्युलर हुआ. ‘नील कमल’ का बजट 85 लाख के करीब था और मूवी ने 1.75 करोड़ की कमाई की थी. यह एक हिट फिल्म साबित हुई थी.

मोहम्मद रफी ने 1970 की फिल्म ‘हीर रांझा’ में भी अभिनेता राज कुमार के लिए एक कालजयी सॉन्ग गाया. इस गाने के बोल थे : ये दुनिया, ये महफिल…..’. ‘हीर रांझा’ एक म्यूजिकल रोमांटिक फिल्म थी जिसका डायरेक्शन चेतन आनंद ने किया था. प्रोड्यूसर चेतन आनंद के बेटे केतन आनंद थे. फिल्म में राज कुमार, प्रिया राजवंश लीड रोल में थे. प्राण, पृथ्वीराज कपूर, अजीत, जयंत, सोनिया साहनी, कामिनी कौशल, इंद्राणी मुखर्जी, अचला सचदेव अहम सहायक भूमिकाओं में थे. फिल्म का म्यूजिक मदन मोहन ने कंपोज किया था.
