May 5, 2026
classical-dancer-2026-05-929fe6d1e3736bb8bdc31dc534629a01-1200x630.jpg
Spread the love


Last Updated:

मशहूर भरतनाट्यम डांसर लीला सैमसन ने मात्र 9 साल की आयु में डांस को अपना जीवन बनाने का निर्णय लिया था. तमिलनाडु में जन्मी लीला ने चेन्नई के ‘कलाक्षेत्र’ में महान गुरु रुक्मिणी देवी अरुंडेल से शिक्षा हासिल की. उन्होंने न केवल ग्लोबल स्तर पर भारतीय डांस को पहचान दिलाई, बल्कि ‘स्पंदा’ ग्रुप के जरिये इसे आधुनिक नजरिया भी दिया. उन्होंने डांस के साथ-साथ कलाक्षेत्र की निदेशक, संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष और सेंसर बोर्ड में अहम भूमिकाएं भी निभाईं. ‘पद्मश्री’ से सम्मानित लीला आज भी कला और समर्पण की एक मिसाल हैं.

ख़बरें फटाफट

नौसेना अधिकारी की बेटी, बचपन में 1 फैसले को बनाया जिंदगी का फलसफाZoom

लीला सैमसन बचपन से डांस सीख और सिखा रही हैं.

नई दिल्ली: भारतीय शास्त्रीय डांस की दुनिया में लीला सैमसन एक ऐसा नाम है, जिन्होंने भरतनाट्यम को महज एक कला नहीं, बल्कि अपनी रूह और जिंदगी का हिस्सा बना लिया. 6 मई 1951 को तमिलनाडु के कूनूर में जन्मी लीला के घर का माहौल ही कुछ ऐसा था कि उनका झुकाव बचपन से ही कला की तरफ हो गया. उनके पिता नौसेना में अधिकारी थे, लेकिन उनकी मां को संगीत और कला से इतना लगाव था कि उन्होंने ही लीला को इस रास्ते पर आगे बढ़ने का हौसला दिया. आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि जब बच्चे खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं, यानी सिर्फ 9 साल की छोटी सी उम्र में, लीला ने यह फैसला कर लिया था कि उन्हें एक डांसर ही बनना है. उनके पिता ने उन्हें चेन्नई के मशहूर संस्थान ‘कलाक्षेत्र’ भेजा, जहां उन्होंने महान गुरु रुक्मिणी देवी अरुंडेल की देखरेख में भरतनाट्यम की बारीकियां सीखीं और अपनी पूरी जिंदगी इस साधना के नाम कर दी.

लीला की खासियत यह रही कि उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ कभी अपनी डांस साधना को पीछे नहीं छूटने दिया. डिग्री हासिल करने के बाद भी वे लगातार सीखती रहीं और जल्द ही उनकी मेहनत रंग लाई, जब वे एक बेमिसाल डांसर के रूप में पहचानी जाने लगीं. उन्होंने न सिर्फ खुद को एक कलाकार के रूप में स्थापित किया, बल्कि दिल्ली के श्रीराम भारतीय कला केंद्र और गंधर्व महाविद्यालय जैसे संस्थानों में नई पीढ़ी को भी इस कला के गुर सिखाए. उनकी कला की गूंज सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका जैसे बड़े देशों में मंच पर अपनी प्रस्तुतियों से भारतीय संस्कृति का परचम लहराया. साल 1995 में उन्होंने ‘स्पंदा’ नाम का अपना डांस ग्रुप बनाया, जिसका मकसद भरतनाट्यम को एक फ्रेश और नए नजरिए के साथ पेश करना था ताकि युवा भी इससे जुड़ सकें.

कला की दुनिया को किया संपन्न
लीला सैमसन की शख्सियत सिर्फ नाचने-गाने तक ही सीमित नहीं रही, उन्होंने प्रशासन के क्षेत्र में भी बड़ी जिम्मेदारियां बहुत बखूबी निभाईं. वे 2005 से 2012 तक उस संस्थान ‘कलाक्षेत्र’ की डायरेक्टर रहीं जहां से उन्होंने खुद सीखा था, जो उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था. इसके अलावा उन्होंने संगीत नाटक अकादमी की चेयरपर्सन और सेंसर बोर्ड (CBFC) की प्रमुख के तौर पर भी काम किया और कला के क्षेत्र में कई कड़े और जरूरी फैसले लिए. उनकी इस अटूट निष्ठा और कला के प्रति समर्पण के लिए भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्मश्री’ जैसे बड़े नागरिक सम्मान से नवाजा और उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी मिला. हालांकि, ऊंचे पदों पर रहते हुए उनके करियर में कुछ विवाद भी आए, लेकिन लीला ने हमेशा साबित किया कि उनके लिए कला और शिक्षा सबसे ऊपर है. आज वे दुनिया भर के कलाकारों के लिए एक मिसाल हैं कि बचपन का एक छोटा सा फैसला कैसे आपकी पूरी जिंदगी की पहचान बन सकता है.

About the Author

authorimg

Abhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें





Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Notifications OK No thanks