July 30, 2026
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भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर की एक ऐसी अदाकारा, जिसकी जादुई आवाज और हुस्न का पूरा जमाना कायल था. महज 12 साल की उम्र में कदम रखा और देखते ही देखते 70 फिल्में और 300 से ज्यादा गानों के साथ इंडस्ट्री पर राज करने लगीं. ताज्जुब की बात तो यह है कि उन्होंने संगीत की कोई ट्रेनिंग नहीं ली थी, फिर भी उन्हें ‘सुरों की मलिका’ कहा गया. लेकिन निजी जिंदगी किसी फिल्मी ट्रेजेडी से कम नहीं रही. उस दौर के सबसे हैंडसम सुपरस्टार देव आनंद के साथ प्यार परवान चढ़ा, पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. इस गम में उनका दिल कुछ ऐसा टूटा कि उन्होंने फिर कभी किसी का हाथ नहीं थामा और ताउम्र कुंवारी ही रहीं.

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देव आनंद संग अधूरी रह गई हीरोइन की मोहब्बत, फिर ताउम्र नहीं थामा किसी का हाथसुरैया को सुरों की मल्लिका कहा जाता था.

नई दिल्ली. भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ सितारे ऐसे हैं, जिनकी चमक कभी फीकी नहीं पड़ती. आज मशहूर एक्ट्रेस और प्लेबैक सिंगर सुरैया की पुण्यतिथि है. भले ही 31 जनवरी 2004 को वह इस दुनिया को अलविदा कह गईं, लेकिन उनकी आवाज और अदाकारी आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है. 40 और 50 के दशक में सुरैया का बॉलीवुड पर एकछत्र राज था. उनकी खूबसूरती और दिलकश अंदाज की वजह से उन्हें ‘मलिका-ए-हुस्न’ और ‘मलिका-ए-अदाकारी’ जैसे खिताबों से नवाजा गया. वह न सिर्फ एक बेहतरीन अदाकारा थीं, बल्कि अपनी जादुई आवाज से भी उन्होंने सिने प्रेमियों को अपना दीवाना बना दिया था.

सुरैया जमाल शेख का जन्म 15 जून 1929 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था. मात्र एक साल की उम्र में उनका परिवार मुंबई आ गया. उनकी मां घर पर के.एल. सहगल, खुर्शीद और कानन देवी के रिकॉर्ड सुनाती थीं, जिन्हें सुनकर सुरैया में गाने का शौक जागा. हैरत की बात है कि उन्होंने कभी औपचारिक संगीत शिक्षा नहीं ली, फिर भी उनकी आवाज इतनी मधुर थी कि लोग उन्हें ‘सुरों की मलिका’ कहने लगे.

70 से ज्यादा फिल्मों में किया काम

बचपन से ही सुरैया ने ऑल इंडिया रेडियो पर गाना शुरू कर दिया. 12 साल की छोटी उम्र में उन्होंने फिल्म ‘ताजमहल’ में मुमताज महल का किरदार निभाकर अभिनय की शुरुआत की. संगीतकार नौशाद ने उनकी आवाज सुनी और साल 1942 में फिल्म ‘शारदा’ में उन्हें प्लेबैक सिंगर के रूप में मौका दिया. उन्होंने ‘नई दुनिया बसेगी’ जैसे गाने गाए. सुरैया ने 70 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और 330 से ज्यादा गाने गाए. उनकी फिल्मों में ‘अनमोल घड़ी’, ‘प्यार की जीत’, ‘बड़ी बहन’, ‘दर्द’, ‘जीत’, ‘सनम’, ‘दास्तां’ और ‘रुस्तम सोहराब’, ‘शमां’, ‘शायर’ जैसी सफल फिल्में शामिल हैं.

देव आनंद और सुरैया.

देव आनंद के साथ हिट रही सुरैया की जोड़ी

देव आनंद के साथ उन्होंने कई फिल्में कीं, जैसे ‘नीली’, ‘विद्या’ और ‘दो सितारे’. दोनों के बीच निजी रिश्ते भी गहरे थे, लेकिन पारिवारिक कारणों से शादी नहीं हो सकी. सुरैया जीवनभर अविवाहित रहीं. वहीं केएल सहगल ने उनकी काफी मदद की. दोनों ने साथ कई फिल्में कीं और सहगल की सिफारिश से सुरैया को करियर की शुरुआत में बड़ी भूमिकाएं भी मिलीं.

साल 2004 में हुआ था सुरैया का निधन

उनकी मशहूर गीतों में ‘दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है’, ‘ओ दूर जाने वाले’, ‘तेरा ख्याल दिल से मिटा न सकेगा’ और ‘जाने क्या तूने कही’ जैसे सदाबहार गाने शामिल हैं. सुरैया 1963 में ‘रुस्तम सोहराब’ के बाद फिल्मों से दूर हो गईं. वह मरीन ड्राइव के अपने घर में अकेले रहती थीं. 31 जनवरी 2004 को मुंबई के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया था.

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Kamta Prasad

साल 2015 में दैनिक भास्कर से करियर की शुरुआत की. फिर दैनिक जागरण में बतौर टीम लीड काम किया. डिजिटल करियर की शुरुआत आज तक से की और एबीपी, ज़ी न्यूज़, बिज़नेस वर्ल्ड जैसे संस्थानों में काम किया. पिछले 6 सालों से …और पढ़ें

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देव आनंद संग अधूरी रह गई हीरोइन की मोहब्बत, फिर ताउम्र नहीं थामा किसी का हाथ



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